कितना दर्दनाक होता है स्त्री ‘खतना’ पढ़कर दहल जाएगा आपका दिल


कितना दर्दनाक होता है स्त्री 'खतना' पढ़कर दहल जाएगा आपका दिल
कितना दर्दनाक होता है स्त्री 'खतना' पढ़कर दहल जाएगा आपका दिल

Kitna dardnak hota hai stri khatna padhkar dahal jayega aapka dil

खतना, ये शब्द तो आपने कई बार सुने होंगे और हो सकता है कि इसके बारे में जानते भी हों. अगर नहीं जानते तो हम आपको बता रहे हैं इसके पीछे की दर्दनाक हकीकत को. आखिर क्यों स्त्री का खतना किया जाता है? और किस तरह लड़की के साथ  दर्दनाक रवैया अपनाया जाता है.

एक छोटी सी बच्ची के कई औरतें मिलकर हाथ पैर पकड़ लेती है. और कोई औरत ब्लेड या फिर चाकू से उस दुधमुंही बच्ची की भग्नासा (क्लाइटोरल हुड)  बेरहमी से काट देती है. खून से लथपथ वह बच्ची एक-दो दिन नहीं, बल्कि महीनों तक दर्द से कराहती रहती है. दोस्तों सिर्फ 1 साल से 5 साल तक की बच्चियों की योनि की पूरी भग्नासा (क्लाइटोरल हुड) को बेरहमी से काट कर फेंक दिया जाता है. कई बार तो इस दौरान बच्चियों की मौत भी हो जाती है. स्त्रियों के खतना का ये दर्दनाक और अमानवीय रिवाज प्राचीन काल से हीं अफ्रीका महाद्वीप के मिस्र, युगांडा, केन्या, इरीट्रिया जैसे कई देशों में चली आ रही है.

stri khatna

अफ्रीकी महिलाओं के बीच एक कहावत काफी मशहूर है कि ‘लड़की की जिंदगी में तीन ऐसे मौके होते हैं जब उसे भीषण तकलीफ का सामना करना पड़ता है. पहला – जब उसका खतना होता है. दूसरा – शादी के बाद सुहागरात और तीसरा मौका – जब वह स्त्री बच्चे को जन्म देती है.’ दोस्तों हम उन महिलाओं की बात कर रहे हैं जिनकी खतना के बाद योनि का प्रवेशद्वार सिलाई करके बंद कर दिया जाता है. सिर्फ एक छोटा रास्ता खुला छोड़ दिया जाता है जिससे स्त्री मूत्र त्याग कर सके और मासिक धर्म का स्त्राव रिस कर बाहर आ सके.

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दोस्तों अब आप सोचते होंगे कि आखिर इस समाज में लड़कियों का खतना क्यों किया जाता है? दरअसल इनकी मानसिकता काफी संकीर्ण होती है, जो इनके दिमाग में ये सोच पैदा करती है कि लड़की युवा होने के बाद अपने किसी प्रेमी के साथ यौन संबंध ना बना सके. यहां तक कि पहला बच्चा होने के बाद पति अपनी पत्नी को इस बात के लिए फोर्स करता है कि वह अपनी योनि फिर से सिलवा कर बंद कर ले. ताकि किसी अन्य पुरुष के साथ वो संपर्क न कर सके.

खतना woman khatna

अफ्रीका में तो युवा लड़कियों की शादी इसी बात पर होती है कि बचपन में उसका खतना हो रखा हो. जिस लड़की का खतना नहीं होता है, उसकी शादी नहीं होती. क्योंकि यहां खतना हीं लड़की के पवित्र और कुंवारी होने का प्रमाण माना जाता है.

अफ्रीका में तो खतना सिर्फ भग्नासा काटने या छिलने तक हीं सीमित नहीं होता. बल्कि यहां तो क्रूरता अपने चरम पर होता है. छोटी लड़कियों का खतना एक सार्वजनिक समारोह में किया जाता है. जहां दर्द से छटपटाती, चीखती लड़की को चारों ओर से भीड़ घिरे हुए रहते हैं. और खतना करने वाली महिला या पुरुष किसी इस्तेमाल हो चुके ब्लैड, रेजर, चाकू या फिर टूटे हुए कांच के टुकड़े से बच्ची की योनि द्वार को कवर करने वाले अंग क्लिटोरिस को काटकर अलग कर देता है. और दर्द से कराहती उस लड़की के योनि द्वार को खून के रिसाव के बीच हीं आपस में सिल देता है.

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पुरुषवादी मानसिकता के कारण इन समाज में लड़की का खतना करवाया जाता है, ताकि युवा होने पर किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध ना बना सके. पहला बच्चा होने के बाद भी अगर पति को कुछ दिन के लिए भी बाहर जाना होता है तो वह अपनी पत्नी की योनि द्वार को फिर से सिलवा कर बंद करने के लिए कहता है, ताकि उसकी पत्नी किसी दूसरे पुरुष के साथ शारीरिक संबंध ना बना ले.

अमीर घराने के जो संपन्न लोग होते हैं इस कार्य को डॉक्टरों के सहायता से करते हैं. चुकी डॉक्टर यही कार्य बच्चे को एनेस्थिसिया देकर करते हैं जिस कारण तकलीफ कम होती है. लेकिन जो गरीब हैं उनके लिये खतना काफी दर्दनाक और असहनीय पीड़ा दायक होता है.

सदियों से चली आ रही ये प्रथा आज भी निरंतर जारी है. जबकि समाज इतनी प्रगति कर चुका है. लोगों की सोच बदल चुकी है. बावजूद इसके इन समाजों में खतना जैसे अमानवीय व्यवहार स्त्रियों के लिए आम बात है. क्या जरूरत नहीं की वहां की सरकार इस अमानवीय प्रथा को बंद कराए? इसके लिए सामाजिक संस्थाएं भी आगे आएं और इस अमानवीय प्रथा को समाप्त करने के प्रति लोगों को जागरुक करने का काम करे. दुनियां के जिस भी हिस्से में ये अमानवीय प्रथा आज भी निरंतर जारी है उसे खत्म कर समाज को नई राह पर लाने का काम करे.

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