कैसे हुई थी मृत्यु की उत्पत्ति, जानिये मौत के जन्म की रोचक कहानियां ?


कैसे हुई थी मृत्यु की उत्पत्ति, जानिये मौत के जन्म की रोचक कहानियां ?
कैसे हुई थी मृत्यु की उत्पत्ति, जानिये मौत के जन्म की रोचक कहानियां ?

कैसे हुई थी मृत्यु की उत्पत्ति, जानिये मौत के जन्म की रोचक कहानियां ? Mrityu ki Utpatti Ya Maut ka janm

दोस्तों आज मैं अपने इस आर्टिकल में प्राणियों की होने वाली मृत्यु पर बात करने वाले हैं. दोस्तों यह अटल सत्य है कि किसी भी प्राणी के भूत, भविष्य और वर्तमान में कुछ भी निश्चित हो या न हो परंतु प्राणी की मृत्यु अवस्य निश्चित है. यानि जो भी प्राणी इस जगत में उत्पन्न होता है, उसे मृत्यु को अवश्य ही प्राप्त होना होता है. यह मृत्यु क्या है और प्राणियों को यह मृत्यु क्यों प्राप्त होती है और कैसे इस मृत्यु की उत्पत्ति हुई थी ? चलिए जानते हैं अपने इस आर्टिकल में.

दोस्तों आप लोग यह तो जानते ही हैं की परम पिता ब्रह्मा जी सदैव इस सृष्टि और इस सृष्टि पर विचरने वाले सभी प्राणियों की रचना करते हैं. हमारी सृष्टि का इससे पहले कई बार विनाश हो चुका हैऔर कई बार इसकी रचना हो चुकी है.

लेकिन हम उस समय की बात कर रहे हैं, जब पहली बार परमपिता ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी. पहली बार इस सृष्टि की और इस सृष्टि की सभी प्राणियों की रचना करने के कई हजार वर्षों के बाद जब परम पिता ब्रह्मा जी ने यह देखा कि प्राणियों की संख्या तो उनकी जन्म की प्रक्रिया के कारण बढ़ती ही चली जा रही है. तो वह इस सोच में डूब गए की यदि इन प्राणियों की संख्या ऐसे ही बढ़ती गई तो इस समस्त प्राणियों के भार से यह पृथ्वी पुनः रसातल में डूब जाएगी. तब ब्रह्माजी पृथ्वी पर भार का संतुलन बनाने के विषय में सोचने लग गए.

परंतु बहुत सोचने के बाद भी परम पिता ब्रह्मा जी को समझ नहीं आया तो उन्हें क्रोध आ गया और उनके क्रोध से अग्नि प्रकट हो गई. तब परम पिता ने उस क्रोधाग्नि से पृथ्वी के समस्त प्राणियों का संघार करने का निर्णय ले लिया. उनके ऐसा निर्णय लेते ही वह अग्नि संपूर्ण दिशाओं में फैल गई. और उसने इस संपूर्ण जगत को जलाना आरंभ कर दिया.

दोस्तों सारे संसार को अग्नि मैं भस्म होता देख सभी देवता चिंतित हो उठे. तब भगवान शिव ब्रह्मा जी के पास आये और उनसे बोले भगवन आप इस प्रकार इस सृष्टि का संघार किस कारण कर रहे हैं. तो ब्रह्मा जी ने उनसे कहा कि देवी पृथ्वी जगत के भार से पीड़ित हो रही थी और उनकी उस पीड़ा ने प्राणियों का विनाश करने के लिए प्रेरित किया है.

तब भगवान शिव ब्रह्मा जी से प्रार्थना की भगवन आपके इस क्रोधाग्नि से प्राणियों के साथ-साथ पेड़-पौधे, पर्वत, नदियां आदि सभी कुछ भस्म हुआ जा रहा है. इसलिए आप इस क्रोधाग्नि को रोकिए और प्राणियों के विनाश का कोई दूसरा उपाय सोचिए.

 

परमपिता ब्रह्माजी के क्रोधाग्नि से हुई मृत्यु उत्पत्ति : Brahma Ji Ke Krodhagni se Hui Mritu ki utpatti

दोस्तों भगवान शिव के इस प्रार्थना सुनकर परमपिता ब्रह्मा जी ने अपनी उस क्रोधाग्नि को पुनः अपने शरीर में समेट लिया. अग्नि को अपने शरीर में वापस समेटते समय परमपिता ब्रम्हा की इंद्रियों से काले, लाल और पीले तीन रंगों की एक स्त्री उत्पन्न हुई. ब्रह्मा जी ने उस स्त्री को मृत्यु कहकर पुकारा और उससे कहा कि मैंने तीनों लोकों का संघार करने की इच्छा से जो क्रोध किया था मेरे उस क्रोधाग्नि से तुम्हारी उत्पत्ति हुई है. अतः तुम तुम मेरी आज्ञा से जगत के प्राणियों का विनाश करो.

दोस्तों ब्रह्मा जी यह बात सुनकर मृत्यु बहुत दुखी हुई और यह कहती हुई रोने लगी- मैं पाप और अधर्म से डरती हूं और फिर एक स्त्री होकर यह अहितकारक और कठोर कार्य कैसे कर सकती हूं.

रोती हुई मृत्यु की आंखों से जो आंसू टपक पड़े उन्हें परमपिता ब्रम्हा जी ने अपनी हथेली में ले लिया और मृत्यु को समझाते हुए बोले – हे मृत्यु तुम मेरी आज्ञा का पालन करो. इससे तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा. मैंने जो तुम्हारे आंखों से निकले आंसुओं के जिन बूंदों को अपनी हथेली में ले लिया है वह व्याधियां बन कर उन प्राणियों का विनाश करेगी और उसके पश्चात तुम उन प्राणियों के प्राणों को हर लेना. इससे तुम्हें अधर्म नहीं, धर्म की प्राप्ति होगी और सनातन धर्म तुम्हें सदा ही पवित्र बनाए रखेगा. दोस्तों परमपिता ब्रह्मा जी की यह बात सुनकर मृत्यु ने उनका यह आदेश स्वीकार कर लिया और तभी से इस जगत के सभी प्राणियों मृत्यु को प्राप्त होने लगे.

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