क्या सम्मोहन या हाइप्नॉटाइज़ सचमुच में होता है ?


क्या सम्मोहन या हाइप्नॉटाइज़ सचमुच में होता है ?
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एक दुखी व्यक्ति सम्मोहन चिकित्सक के पास जाता है. चिकित्सक धर्य से मरीज के दुख दर्द की कहानी सुनता है. सुनते समय वह एक टक मरीज़ की आंखों में आंखें डाल कर देखता है. अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की कुछ बातें बताने के बाद, वह मरीज एक दूसरी दुनिया में पहुंच जाता है. वह अपने वातावरण के हाथ की कठपुतली बन जाता है. अब उसे ना दर्द होता है और ना ही उसे कोई परेशानी घेरती है.

पर यह स्थिति देर तक नहीं रहती. शीघ्र ही सम्मोहन चिकित्सक उसे इस गला काट संसार में वापस ले आता है. मरीज घर लौटता है, लेकिन केवल कुछ घंटों के लिए डॉक्टर के घर नियमित चक्कर उसके सामान्य जीवन का हिस्सा बन जाता है.

क्या सम्मोहन या हाइप्नॉटाइज़ सचमुच में होता है ? kya sammohan ya hypnotize sachmuch me hota hai

बीसवीं शताब्दी में सम्मोहन विद्या की लोकप्रियता अपने शिखर तक पहुंच चुकी है. सन 1920 के अंत में अनेक ऑपरेशन किए गए जिनमें मरीजों को बेहोशी की दवा नहीं दी गई थी. एक फ्रांसीसी डॉक्टर ए.ए. लीबिआल्त ने अपने मरीजों पर सम्मोहन चिकित्सा का प्रयोग किया. उनका प्रयोग सफल हुआ और उसे अस्पताल की आम चिकित्सा पद्धति में शामिल कर लिया गया.

लेकिन, शंकालु लोगों ने यह मानने से इनकार कर दिया कि सम्मोहन चिकित्सा जैसा भी कोई विज्ञान है. उनका मानना है कि इसका संबंध हिस्टीरिया से है. उन्होंने पूरे जोर-शोर से कहा कि सम्मोहन में यकीन नहीं किया जा सकता. डॉक्टर भी इस से कतराते रहे.

बीसवीं शताब्दी के आधी गुजर जाने के बाद इसके प्रति काफी ध्यान दिया गया है. यह अध्ययन का एक गंभीर विषय बन गया. इस पर अनेक किताबें लिखी गई और टीवी कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस विषय को लेकर लोगों के विचार बदलने लगे. जिन दो पुस्तकों ने इस दिशा में बहुत गहरा प्रभाव डाला वे थी ‘मोर लाइव्स देन वन’ और ‘इंकॉरटेज विथ द पास्ट’. इनमें से पहली बी. बी. सी. के प्रोड्यूसर और दूसरी पीटर बोस द्वारा लिखी गई है.

सबसे ज्यादा जाने वाला प्रयोग स्वर्गीय आर्नल ब्लाक्सहम ने किया था. उन्होंने कार्डिफ की एक ग्रहणी जेन इव्नास को सम्मोहित किया. सम्मोहित होने के बाद जेन 12 वीं शताब्दी की यहूदी रिबेका बन गई. सम्मोहन के प्रभाव में उसने अपने सारे जीवन के बारे में बताएं. उसने चर्च और यहूदियों की निर्मम हत्या का विस्तृत वर्णन दिया. उसकी बातें शत प्रतिशत सच पाई गई.

सम्मोहन केवल आदमियों पर ही नहीं, जानवरों पर भी किया जा सकता है. इसका उदाहरण उस चूजे का था जिस की चोंच सम्मोहन के दौरान जबरदस्ती एक चौक से बनाई रेखा तक झुका दी गई थी. जब तक वह सम्मोहित रहा उसने वह चोंच रेखा से ऊपर नहीं उठाई. आलोचक भी सम्मोहन की शक्ति का इतना विस्तृत क्षेत्र देख कर दंग रह गए.

इसके बाद सम्मोहन का प्रयोग पुलिस विभाग में किया गया. सम्मोहित व्यक्ति इतना सटीक विवरण देते हैं, कि पुलिस ने मुजरिम को पकड़ने में इसका प्रयोग शुरू किया. एक ऐसा ही उदाहरण एक इसराइल लड़की का है जिससे निर्ममता से ब्लात्कार किया गया था. लेकिन उसे अपने हमलावारों की कोई पहचान नहीं थी. लेकिन जब उसे सम्मोहित किया गया तो उसने मुजरिम का बहुत बारीक वर्णन दिया. उसके वर्णन के आधार पर पुलिस मुजरिम को पकड़ने और सजा देने में कामयाब हुई.

इसका प्रयोग कुछ खिलाड़ियों ने भी किया जैसे बॉब विलिस( फास्ट बॉलर) रोजलेन फ्यू (1970 की ऊंची दौर का चैंपियन) और आर्थर ऐश ( टेनिस स्टार) सभी ने पश्च सम्मोहन चिकित्सा करवाएं ताकि वह अपने खेल में अपने प्रदर्शन को चरम सीमा तक दिखा सके.

जो भी हो आज भी ऐसे अनेक शोधकर्ता और विज्ञानिक है जो सम्मोहन की संकल्पना से सहमत नहीं है. उनके अनुसार ऐसी कोई चीज होती ही नहीं है. चुंकी स्वयं इस के प्रवर्तक इसकी प्रक्रिया को समझते नहीं है इसलिए आलोचकों के प्रश्न अनुत्तरित रही रह जाते हैं.

परंतु यह सच है कि ऐसे अनेक ऑपरेशन किए गए हैं जिनमें मरीजों को बेहोशी की दवा नहीं दी गई और उन्होंने किसी किस्म का दर्द नहीं महसूस किया. यह भी सच है कि सम्मोहन की मदद से हत्याओं और बलात्कारों की गुत्थी सुलझाई गई है. अनेक रोगियों को उनके दुख और तकलीफों से निजात दिलाई गई है.

कोई नहीं जानता कि यह अद्भुत कार्य कैसे किए गए है. सम्मोहन के प्रयोगों पर रहस्य का एक पर्दा पड़ा हुआ है.

 

सम्मोहन का एक अजीबोगरीब प्रयोग :

सन 1976 में फ्रांस के कुछ लोगों को नींद ना आने की शिकायत की. वे एक सम्मोहन चिकित्सक जैकवे न्यूगेट के पास गए. उसने मेडिकल निरीक्षण में एक चमत्कार कर दिखाया. उसने उन लोगों को सामूहिक निंद्रा की अवस्था में ला दिया. वे लगातार दस दिन तक सोते रहे. बीच बीच में वह थोड़ी देर के लिए दैनिक कर्म निपटाने के लिए और थोड़ा सा नारंगी का रस पीने के लिए उठते थे. यह प्रयोग सफल हुआ. सभी मरीजों को अनिंद्रा के रोग से छुटकारा मिल गया. चिकित्सा विज्ञान के पास प्रयोग का कोई जवाब नहीं है.

अंत में हम यह कह सकते हैं – इसमें कोई विवाद नहीं है कि यह मस्तिष्क की एक दशा है… जिसे अनेक तरीकों से पैदा किया जा सकता है और इस दौरान कुछ व्यक्ति अद्भुत गुणों एवं कौशल का प्रदर्शन करते हैं… कुछ व्यक्ति बहुत मुखर भी हो जाते हैं… वह अपनी तमाम घेरेबंदी तोड़ देते हैं.

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