रहस्य : तियतीहुआकान – देवताओं का शहर


रहस्य : तियतीहुआकान - देवताओं का शहर
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प्राचीन मेक्सिको की धार्मिक राजधानी तियुतीहुआकान की खोज हो जाने के बाद भी कुछ ऐसे प्रश्न अनुत्तरित रह गए हैं जिनका जवाब प्राप्त किए बिना अमेरिकी इतिहास के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं हो सकती. आखिरकार व्यवस्थित तरीके से डेढ़ लाख लोगों की बसावट वाले इस शहर को कौन सी सभ्यता ने स्थापित किया था. वह सभ्यता अचानक ही क्यों नष्ट हो गई ? तियुतीहुआकान में कौन सी भाषा बोली जाती थी. इससे पहले ओल्मेक सभ्यता विकसित हो चुकी थी, हम ओल्मेख माया लोगों तथा इंका सभ्यता के बारे में जितना जानते हैं उसका दशांश भी तियुतीहुआकान के बारे में नहीं जानते. क्या इसकी सभ्यता बाहरी आक्रमण से नष्ट हुई थी या प्राकृतिक प्रकोप और अकाल ने देवताओं के इस शहर की बलि ले ली थी ?
1400 साल पहले जब पश्चिमी में बड़बड़ कबीलों का राज्य था तब अटलांटिक महासागर की दूसरी दिशा में एक ऐसी सभ्यता विद्यमान थी जिसने 150,00 0लोगों को व्यवस्थित रुप से बसा सकने वाले शानदार महानगर तियुतीहुआकान की स्थापना कर ली थी. तियुतीहुआकान मेक्सिको की धार्मिक राजधानी थी. 5वीं ईस्वी में 8 वर्ग मील में फैले हुए इस नगर को अमेरिकी विद्वान थेल्मा सुलीवान ने देवताओं के शहर का नाम दिया. यह शहर उस समय खंडहरों में बदल कर जमीन के नीचे दब चुका था जब अज्टेक लोगों ने दक्षिण अमेरिका पर अपना कब्जा किया.

आज अज्टेक के बारे में हम काफी कुछ जानते हैं. लेकिन एक शताब्दी तक की गई आधुनिक खोज के बाद भी यह पता नहीं चल पाया कि किन लोगों ने इस शहर की स्थापना की थी और कौन सी सभ्यता में इस शहर में रहकर अपना उत्कर्षकाल देखा था. वह सभ्यता अचानक नष्ट क्यों हो गई ? वहां कौन सी भाषा बोली जाती थी ? इस शहर का 9/10 भाग अभी भी धरती के नीचे दबा हुआ है. जिस 7500 फीट ऊंचे पठार पर इस शहर का निर्माण किया गया था वह मेक्सिको घाटी एवं प्युबला की घाटी को जोड़ने वाले प्राकृतिक रास्ते पर स्थित है. इस शहर के चारों तरफ उपजाऊ घाटी थी जिसे सोते और सरिताओं से पानी मिलता रहता था. ज्वालामुखीय वायुमंडल के कारण ओब्सीडियन नामक कांच काफी मात्रा में उपलब्ध था. जिस के उपकरण बर्तन तथा हथियार बनाए जा सकते थे. इस पत्थर में 100 से 300 की जनसंख्या वाले इंडियनो के ग्राम थे. जिन्होंने निश्चित रुप से नगर के निर्माण में भाग लिया होगा.

पता चला है कि इस से भी पहले अमेरिका में ओल्मेक लोगों की सभ्यता का अस्तित्व था. जो भवन निर्माण कला में दक्षता प्राप्त कर चुके थे. विश्वास किया जाता है कि इस शहर के बसने से पहले वहां बसे हुए आदिवासी ही बाद में विकसित होकर यहां के निवासी बने. लेकिन इस विश्वास से भी यहां के निवासियों का जातीय स्रोत पता नहीं चलता है.

जब पहली बार सन 1880 में डिजायर चार्ने नामक फ्रांसीसी ने इस शहर का एक हिस्सा खोज निकाला तो बहुतों की तरह उसने भी इसे एक टोल्टेक शहर माना . बाद के अध्ययन से साबित हुआ की टोल्टेक 10वीं शताब्दी के दूसरे भाग में मौजूद थे तब तक यह शहर खंडहरों में बदल चुका था. इन अध्ययनों की पर्याप्ता पर उस समय प्रश्नचिन्ह लगा था जब अज्टेक लोग अपने ग्रंथों में यह स्वीकार करते हैं कि शायद यह टाल्टेक लोगों की राजधानी ही थी. क्योंकि टोल्टेक अपनी महान वास्तु कला के लिए उस युग में सर्वश्रेष्ठ माने जाते थे. अज्टेक की भाषा में टोल्टेक शब्द का अर्थ होता है महान.

शिल्पी फ्रेंच मूल के एक मेक्सिकन पुरातत्वशास्त्री लौरेट सेजोर्न ने अज्टेक मिथक शास्त्र की नई व्याख्या हाल ही में प्रस्तुत की है. उनका कहना है कि, देवताओं के शहर के संस्थापकों ने एक नए युग का सूत्रपात भी किया. जिसे आध्यात्मिक शब्दावली में गति के युग की संज्ञा दी जानी चाहिए. सूर्य का पिरामिड एक ऐसा ही महान स्मारक है जो इस शहर की मुख्य विशेषता है.

कुछ विद्वानों का विचार है कि यहां पर पुजारियों की हुकूमत रही होगी जो मध्य पूर्व खाड़ी के इलाके से आए होंगे. लेकिन अभी तक इन तथाकथित शासकों के स्रोत के बारे में विश्वासपूर्वक कुछ नहीं कहा जा सकता. एक विस्तृत ज्यामितीय पैटर्न पर निर्मित संपूर्ण नगर दो चौड़े मार्गों के आसपास खड़ा किया गया है यह दोनों एक दूसरे को समकोण पर काट रहे हैं. इन मार्गों को मृतकों का रास्ता कहा जाता है क्योंकि आज तक लोगों ने इन मार्गों के आसपास के पिरामिड की आकृति के प्लेटफार्म को मकबरा समझ लिया था. लेकिन बाद में यह प्लेटफ़ॉर्म मंदिरों के आधार निकले.

सूर्य का पिरामिड

सूर्य का पिरामिड 1000 श्रमिकों ने लगातार 50 वर्ष तक परिश्रम करके बनाया होगा. यह पहली शताब्दी ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था इस में प्रयोग किया गया साज सामान 1000000 धन गज स्थान घेरेगा. इस से इस पिरामिड की विशाल भव्यता का अनुमान लगाया जा सकता है. मृतकों के रास्ते के निकट चंद्रमा का पिरामिड था जो छोटा अवश्य है लेकिन आकृति में सूर्य के पिरामिड जैसा ही था. रास्ते के अन्य सीरे पर पंख धारी सर्प देवता का मंदिर था. दरअसल यही देवता सर्प और पक्षी का आध्यात्मिक मिश्रण पेश करता है. अर्थात पृथ्वी और स्वर्ग के बीच में सर्प देवता द्वारा संपर्क स्थापित करने की भावना पूरे नगर के स्थापत्य से व्यक्त होती है. सर्प देवता ने सृष्टि की रचना का तथा आत्मा और पदार्थ का प्रतिनिधित्व करता है. इसके अलावा नगरवासी इस देवता द्वारा मानव मन की दुहेरी प्रकृतियों को भी दर्शाना चाहते थे.

धार्मिक आचार व्यवहार के अलावा इस बात के भी पूरे सबूत मौजूद है कि यह उद्योगों से भरा पूरा नगर था. भवन निर्माण कला में कुशल होने के साथ-साथ यहां के वासी बर्तन बनाने तथा शिल्पकार भी थे. यद्यपि उनके पास पत्थरों के ही औजार थे लेकिन उन्होंने अपने शवों के साथ गाड़ने के लिए जो मुखोटे बनाए थे वे शिल्पकारिता की महान कृतियां हैं. यह प्रभावशाली अंडाकार आंखों और चौड़े चेहरे वाले मुखोटे बासाल्ट इत्यादि पर उकेरे गए हैं. इन चेहरों का शिल्प समय को भी लांघ जाने वाला है क्योंकि मिस्र जैसी विकसित सभ्यता भी इससे अधिक प्रभावशाली मुखोटे बनाने में असफल रही.

Teotihuacan art

यहां की सभ्यता कैसे नष्ट हुई होगी इसका अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग तर्क दिए जाते रहे हैं. कुछ का कहना है कि, भयानक आग लगने से यह नगर खंडहरों में बदल गया होगा. कुछ का कहना है कि उत्तर दिशा से आए हुए घुमक्कड़ कबीलों के योद्धाओं के आक्रमण से यह गुजरा होगा क्योंकि अपनी प्राकृति और रहन सहन से यहां के वासी युद्ध प्रिय नहीं थे और उन्होंने बाहरी आक्रमण से निबटने के लिए कोई तैयारी नहीं की थी.

यहां मानव बलि देने की प्रथा भी थी. यहां के पतन से ही सबक लेकर बाद की मध्य अमेरिकी सभ्यताओं मैं लड़ाकू प्रवृतियां उत्पन्न हुई होगी. कुछ विद्वानों का कहना है कि इस नगर पर सातवीं शताब्दी में तथा कुछ का कहना है इसपर छठी शताब्दी में हमला हुआ होगा. यही समय नगर के चरमोंत्कर्ष का काल था. स्विजरलैंड के लेखक हेनरी को विश्वास है की बाहरी हमले के कारण नगरवासी 700 मील दक्षिण पूर्व में स्थित गांव की ओर भाग गए होंगे. लेकिन कुल मिलाकर विद्वानों का बहुमत इस बात पर एकमत हैं कि नगर का पतन सातवीं शताब्दी के दौरान ही हुआ. अगर बाहरी हमले से नहीं तो संभवत वर्ग संघर्ष इस पतन का कारण रहा होगा. एक नई सामंती वर्ग ने पुजारियों के साथ इस वर्ग की व्यवस्था को नष्ट कर दिया होगा. उन्होंने एक ऐसे शासन की स्थापना कर डाली होगी जो दमन और शोषण पर आधारित होगी. जाहिर है कि इस तरह की शासन व्यवस्थाएं अपने साथ असंतोष और विद्रोह लेकर आती है. ऐसी स्थिति में खराब फसलें होने के कारण यहां की जनता को खाद की आपूर्ति भी ठीक से नहीं हुई होगी एक और शासकीय व्यवस्था तथा दूसरी और प्राकृतिक प्रकोप यह स्थितियां नगर को उजार देने के लिए पर्याप्त थी.

Teotihuacan sacrifice

इन तमाम धारणाओं की अनिश्चितता से स्पष्ट है कि अभी आधुनिक पुरातत्व शास्त्र को कोलंबस से पहले की अमेरिकी सभ्यताओं के बारे में कितनी कम जानकारी है. आठवीं शताब्दी आते आते यह शहर आंशिक रूप से ध्वस्त हो चुका था. इसका पुजारी वर्ग प्राय: समाप्त तथा निवासियों के धार्मिक विश्वास हिल चुके थे. अधिकांश निवासी शहर छोड़ कर जा चुके थे. यह आज प्राचीन सभ्यता की खोई हुई समिति के रूप में खड़ा हुआ है.

इस नगर के खंडहर पुरातत्व शास्त्री के लिए चुनौती बने हुए हैं. सूर्य और चंद्रमा के पिरामिडों तथा मृतकों के रास्ते के बारे में हम जितना जानते हैं उससे कहीं अधिक जानना अभी शेष है. सर्प देवता के अस्तित्व की कई व्याख्याएं की जा चुकी है लेकिन अभी अंतिम ठोस परिभाषा आनी शेष है. आज जो भी देवताओं के शहर के इन अवशेषों को देखता है उसका मुंह आश्चर्य से खुला रह जाता है. आधुनिक सभ्यता तथा शिल्प इत्यादि पर गर्व करने वाले कोलंबस से भी पहले की इस सभ्यता की खूबियों को देख कर सोचने लगते हैं कि कौन थे वह लोग जिन्होंने इस नगर की रचना की. इसका रहस्य अभी भी इसी प्रश्न के चारों ओर केंद्रित है.

Teotihuacan murals

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