दुनिया का सबसे अभिशापित हीरा कोहिनूर!


दुनिया का सबसे अभिशापित हीरा कोहिनूर
दुनिया का सबसे अभिशापित हीरा कोहिनूर

कोहिनूर, नाम सुनकर लोगों की आंखों में चमक आ जाए. लेकिन दोस्तों येे कोहिनूर कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा भी आप नहीं लगा सकते. इसका इतिहास गवाह है कि जिसके पास भी गया, उसे बर्बाद कर दिया. जी हां दोस्तों आपको सुनकर हैरानी होगी, लेकिन ये सच है.

आज हम आपको अपने आर्टिकल में इस खूबसूरत, आकर्षक हीरे की खूबसूरती के पीछे छिपे हैरतअंगेज दास्तान को बता रहे हैं. जिसे जानकर आप उसका नाम लेने से भी कतराएंगे.

पूरे विश्वभर में सबसे कीमती और प्रसिद्ध माने जाने वाले इस नायाब हीरे की कीमत अब तक नहीं लगाई जा सकी है. जब तक इस हीरे के श्रापित होने की बात लोगों को नहीं पति थी, हर कोई इसे पाना चाहता था. लेकिन जैसे – जैसे इस हीरे ने लोगों को बर्बाद करना शुरू किया, लोगों के सामने इसकी सच्चाई आने लगी. लेकिन तब तक इस खूबसूरत, आकर्षक हीरे ने बड़े – से – बड़े राजाओं को बर्बाद कर मिट्टी में मिला दिया था.

दोस्तों, कहा जाता है कि कोहिनूर को भगवान सूर्य ने अपने एक परम भक्त ‘सत्राजित’ की तपस्या से प्रसन्न होकर वरदान के रुप में उन्हें दिया था. और यहीं से इसकी उत्पत्ति की कहानी मानी जाती है. जब तक ‘सत्राजित’ के पास कोहिनूर था, तब तक तो वो बेहद प्रभावशाली था. लेकिन कहते हैं एक बार सत्राजीत से यह कोहिनूर कहीं गुम हो गया. और इसका झूठा आरोप भगवान श्री कृष्ण पर लग गया. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने इस हीरे को ढूंढ कर सत्राजित को वापस कर दिया. भगवान श्रीकृष्ण की इस बात से ‘सत्राजित’ काफी प्रसन्न हुआ और उन्होंने इसे भेंटस्वरूप श्रीकृष्ण को दे दिया.

चुकी भगवान श्री कृष्ण पर झूठा आरोप लगा था, इसलिए कहते हैं कि ये कोहिनूर हीरा अभिसापित हो गया. और उसके बाद हीं शुरू हुई इस हीरे की प्रचंड यात्रा. और जिसके पास भी यह गया उसे बर्बाद करता चला गया. और यही वजह थी कि संपूर्ण यदुवंश का विनाश हो गया.

कहते हैं यदुवंश के विनाश के बाद इतिहास में इस हीरे का कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता. और मध्यकाल तक इसका उल्लेख नहीं मिलता. लेकिन सन 1306 में एक लेख लिखा गया है जिसमें पहली बार इस हीरे के बारे में उल्लेख किया गया है. इस लेख में बताया गया है कि जो भी इस हीरे को अपने पास रखेगा उसका सर्वनाश निश्चित है. लेकिन उन दिनों के राजाओं ने इस बात को मजाक में टाल दिया. उन्होंने इसे अपने पास रखा और बर्बाद हो गए.

जानकारों के अनुसार चौदहवीं शताब्दी में काकतीय वंश ने इस हीरे को अपने पास रखा था. लेकिन जैसे ही उन्होंने इसको अपने पास रखा उसके बाद ही काकतीय वंश का सर्वनाश शुरू हो गया और उनका राज पूरी तरह से नष्ट हो गया.

इसके बाद जब तुगलकों को इस हीरे की जानकारी मिली तो उन्होंने काकतीय वंश से इस हीरे को छीन लिया. क्योंकि तुगलकों को इस हीरे की सच्चाई का कोई अनुमान नहीं था वो तो बस इस हीरे की खूबसूरती में खो गए और लालच वस इसे अपने पास रख लिया. बस क्या था कुछ समय बाद तुगलक वंश का विनाश हो गया. और इनका पूरा राज – पाट मिट्टी मिल गया.

दोस्तों बाबर ने अपने बाबरनामा में इस हीरे की कहानी का जिक्र करते हुए इसके शापित होने की बात बताई है. बहरहाल ये कोहिनूर मुगल सल्तनत के पास आया. लेकिन मुग़ल सल्तनत अपनी शक्ति के अहंकार के कारण इस हीरे की शापित होने की सच्चाई को भूल गए. और इस हीरे को शाहजहां ने अपने सिंहासन में जड़वा लिया. कुछ इस समय बीते थे कि उनकी बेगम मुमताज की मृत्यु हो गई. और खुद शाहजहां को भी जेल जाना पड़ गया.

इसके बाद मुगलों के पास से ये कोहिनूर नादिरशाह के पास पहुंचा. जिसे वो अपने साथ अफगानिस्तान ले गया. और उसकी हत्या कर दी गई. इसके बाद इस खूबसूरत हीरे को दुर्रानी शासकों ने अपने पास रखा. और उनके साथ भी वही हुआ जो पहले के शासकों के साथ हुआ था. अर्थात इनके भी पूरे शासन का सर्वनाश हो गया.

अब बारी थी महाराजा रणजीत सिंह की. लेकिन महाराजा रंजीत सिंह को पहले ही कई लोगों ने इस हीरे की काली सच्चाई से अवगत करवाया था. लेकिन बावजूद इसके रंजीत सिंह इसकी खूबसूरती में इस कदर खो गए, कि इसकी चमक से खुद को दूर नहीं रख पाए. और इस नायाब हीरे को अपने खजाने में शामिल कर लिया. बस क्या था रंजीत सिंह की भी बर्बादी की कहानी इस हीरे में लिखनी शुरु कर दी. और उनका राज – पट भी धीरे-धीरे का नष्ट होता चला गया. और पूरे राज्य को अंग्रेजों ने हड़प लिया.

शुरुआत में तो अंग्रेज भी इस हीरे की चमक में खोने लगे और इस हीरे को इंग्लैंड भेज दिया. लेकिन यह श्रापित हीरा इतना प्रभावी था कि उस समय का सबसे शक्ति शाली साम्राज्य भी इसके प्रकोप से अपने आप को नहीं बचा पाया. और उसका साम्राज्य भी छिन्न – भिन्न हो गया.

दुनिया का सबसे अभिशापित हीरा कोहिनूर

लेकिन अंग्रेज काफी चालाक किस्म के थे.उन्होंने इस हीरे को दो टुकड़ों में काट दिया. ताकि इसका श्राप खत्म हो सके. लेकिन शायद तब तक काफी देर हो चुकी थी. और सारी दुनिया से अंग्रेजी हुकूमत का बोलबाला खत्म हो चुका था.

दोस्तों कहते हैं महाराजा रणजीत सिंह ने कोहिनूर हीरे को भारत के जगन्नाथ मंदिर में दान देने की इच्छा जाहिर की थी. लेकिन 1839 में रंजीत सिंह की मौत हो गई. उसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने रणजीत सिंह की इच्छा का पालन नहीं किया. और लाहौर की संधि के तहत महाराजा की दूसरी संपत्तियों के साथ कोहिनूर का भी अधिग्रहण कर लिया. और अंग्रेजो ने इस हीरे को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को दे दिया. उसके बाद से ये कोहिनूर ब्रिटिश राजघराने का हिस्सा बना हुआ है.

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