दो टुकड़ों में क्यों पैदा हुआ था जरासंध?


दो टुकड़ों में क्यों पैदा हुआ था जरासंध

दोस्तों लेख के माध्यम से हम आप लोगों को हमेशा कुछ ना कुछ नया बताने की कोशिश करते हैं. आज हम महाभारत की एक ऐसी कहानी आपके सामने लेकर आए जिसे शायद आप लोगों ने नहीं सुना होगा . महाभारत काल में मगध देश में जरासंध नाम का एक बड़ा ही ताकतवर राजा राज्य करता था. उसकी प्रतिज्ञा थी कि वह अपने यज्ञ में सौ राजाओं की बलि देगा. अपनी इस प्रतिज्ञा को पूरी करने के लिए जरासंध में 86 राजाओं के युद्ध में जीत है उन्हें अपने घर में रख लिया था. परंतु १०० राजाओं को कैद करके अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर सके उससे पहले भगवान कृष्ण ने कुंती पुत्र भीम के हाथों जरासंध को मरवा दिया था.

दोस्तों जरासंध दुनिया का पहला ऐसा इंसान था जिसका जन्म दो माताओं के गर्भ से हुआ था. इस कहानी को जानने के लिए चलिए सबसे पहले आपको एक कहानी बताता हूँ. दोस्तों सबसे पहले मगध देश पर जरासंध के पिता राजा वृहद्रथ राज्य किया करते थे .राजा वृहद्रथ के दो रानियां थी परंतु उसे कोई संतान नहीं थी. राजा ने संतान प्राप्त करने के लिए सरे उपाय कर चुके थे पर उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ इसलिए प्राप्त नहीं हुआ. इसलिए अपनी दोनों पत्नियों के साथ अपना राज हमेशा के लिए मगढ़ देश छोड़ जंगल चले गए थे. उसी जंगल में ऋषि चंड कौशिक का भी आश्रम था . एक दिन राजा अपने दोनों पत्नी के साथ ऋषि चंड कौशिक के पास पहुंचे और उनको प्रसन्न किया फिर उनसे अपनी संतान नहीं होने की बात बताई. ऋषि चंड कौशिक उस समय आम के पेड़ के नीचे बैठे थे . तभी उस काम के पेड़ से टूटकर उनकी गोद में आ गिड़ा. तो वह आम राजा बृहद्रथ को देते हुए कहते हैं कि लो इसे अपनी पत्नी को खिला देना, तुम्हें एक बड़े ही बलवान पुत्र की प्राप्ति होगी.

राजा वृहद्रथ जानते थे ऋषि कौशिक की बात कभी झूठी नहीं हो सकती. इसलिए खुश होकर अपने राज्य लौट आये. अपनी इसी खुशी में या भूल गए की ऋषि कौशिक ने उनसे एक ही पुत्र प्राप्त होने की बात कही थी. अपनी दोनों पत्नियों को आधा-आधा आम खिला देते हैं. जिसके जिसके कारण उनकी दोनो पत्नियां गर्भवती तो जरुर हो जाती है पर फिर बच्चे का जन्म भी आधा-आधा टुकड़े टुकड़े में हुआ , जैसे एक आंख 1 हाथ 1 पैर. इन बच्चों को देख दोनों रानियां घबरा जाती और आधे आधे बचे को महल के बहार फिकवा देती है.

राजा वृहद्रथ के महल के बाहर ही एक मायावी राक्षसी रहा करती थी जिसका नाम था जरा. जरा राक्षसी मनुष्य को मारकर खाती थी परंतु राक्षसी राजा वृहद्रथ का बहुत सम्मान करती थी. इस कारण का राजा वृहद्रथ का कोई नुकसान नहीं करती. राक्षसी जरा को कूड़े के ढेर पर बच्चे के टुकड़े दिखाई पड़ते हैं. वह उन्हें खाने के लिए उठा लेती हैं . राक्षसी जरा के हाथ में आकर बच्चे के दोनों आधे टुकड़े आपस में जुड़ जाते हैं. और वो पूरा बालक बन जाता है और जोर-जोर से रोने लगता है. बच्चे के साथ हुआ यह करिश्मा देखकर राक्षसी जरा सोच में पड़ जाती है. तभी बच्चे के रोने की आवाज सुनकर राजा वृहद्रथ भी वहां आ जाता है. राक्षसी जरा उस बच्चे को राजा वृहद्रथ को सौंप देती है और उनको पूरी कहानी बताती है. राजा वृहद्रथ के उस बेटे के टुकड़े राक्षसी जरा के हाथो जुड़े थे इस कारण राजा ने अपने बेटे का नाम जरासंध रख दिया था

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