द्रौपदी के श्राप के कारण, कुत्ते करते है “खुले में सहवास”


द्रौपदी के श्राप के कारण, कुत्ते करते है "खुले में सहवास"
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दोस्तों आज मैं आपके सामने एक बहुत ही रोचक कहानी लेकर आए हैं. यह लोक कथा बहुत ही प्रचलित है परंतु इसका प्रमाण किसी भी ग्रंथ में नहीं मिलता है. तो चलिए दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल ( द्रौपदी के श्राप के कारण, कुत्ते करते है “खुले में सहवास” ) में बताएंगे की क्यों द्रौपदी ने कुत्ते को ऐसा श्राप दिया. यह कहानी महाभारत काल की बताई जाती हे, दोस्तों आप ने हमारे द्रौपदी की सुहागरात के आर्टिकल में पढ़ा होगा, कि जब अर्जुन विवाह करके द्रोपति को घर लाए थे तो माता कुंती ने अपने किसी काम में व्यस्त होने की वजह से बिना देखे अनजाने में सभी भाइयों को यह आदेश दे दिया था कि सभी भाई मिलकर बराबर-बराबर उसका उपयोग करो. माता कुंती की बात का मान रखने के लिए सभी भाइयों ने द्रौपदी से विवाह किया था. दोस्तों पांडवों में यहां भी निर्धारित हुआ था कि द्रोपति प्रत्येक वर्ष एक ही पांडव के साथ अपना समय व्यतीत करेगी और जब द्रौपदी किसी पांडव के साथ कक्ष में समय व्यतीत कर रही हो तो उनके कक्ष में किसी दूसरे का आना वर्जित था.

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इसी दौरान कुछ ऐसी घटना घटित हो जिसकी वजह से कुत्ते को यह श्राप मिला की सहवास करते समय उनको पूरी दुनिया देखेगी. कहते हैं कि जब भी कोई एक पांडव द्रौपदी के कक्ष में जाया करता था तो वह अपनी पादुकाएं द्वार पर उतार दिया करता था ताकि कोई दूसरा पांडव पांडव की पादुका देख कक्ष में प्रवेश ना करें. परंतु एक बार जब अर्जुन अपनी पादुका प्रवेश द्वार के बाहर उतार कर द्रोपति संग प्रेम प्रसंग में लीन थे तभी वहां पर एक कुत्ता आया और खेल खेल में उस कुत्ते ने उस पांडवों की पादुका उठा ली और पास के जंगल में जाकर उसके साथ खेलने लगा. उसी दौरान भीम अपने कक्ष की ओर प्रस्थान कर रहे थे, उन्होंने देखा की द्रौपदी के कक्ष के बाहर कोई पादुकाएं नहीं रखी है, और वो द्रौपदी के कक्ष में प्रवेश कर गए. इस तरह से भीम को अपने कक्ष में देख कर द्रौपदी शर्मिंदा हो गयी और बहुत ही क्रोधित होते हुए उसने भीम से कहा कि उसने कक्ष में प्रवेश कैसे किया जब कि अर्जुन ने अपनी पादुका प्रवेश द्वार के बाहर उतारे. इस पर भीम ने कहा कि कोई भी पादुका द्वार पर नहीं रखी है. दोनों भाई कक्ष के बाहर और उन्होंने पादुकाओं को खोजना शुरू कर दिया, ढूंढते-ढूंढते पास के जंगल में पहुंच गए उन्होंने देखा की एक कुत्ता अर्जुन की पादुकाओं का साथ खेल रहा है.

दोस्तों द्रोपदी इस बात से बहुत ही लज्जित महसूस कर रही थी तो उसने क्रोध में आकर कुत्ते को यह श्राप दे दिया कि जैसे आज मुझे किसी ने सहवास करते देखा है उसी तरह तुम्हें सारी दुनिया सहवास करते देखेगी तभी से माना जाता है कि कुत्ते सहवास करते समय लोक लज्जा की चिंता नहीं किया करते हैं.

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