भगवान श्री राम ने क्यूं की थी एक “शूद्र” की हत्या ?


श्री राम ने क्यूं की थी एक शूद्र की हत्या
श्री राम ने क्यूं की थी एक शूद्र की हत्या

दोस्तों, भगवान श्री राम जी के बारे में तो आप सभी जानते ही हैं और यह भी जानते ही होंगे कि उन्होंने कभी भी अपने जीवन में कोई अधर्म का कार्य या अमर्यादित कार्य नहीं किया था. इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम कहा जाता है. परंतु एक बार भगवान श्रीराम ने अपने राज्य की एक शुद्र की हत्या कर दी थी. धर्मात्मा श्री राम ऐसा करने पर क्यों? और किसलिए विवश हो गए थे? चलिए इस कहानी को हम अपने इस आर्टिकल (भगवान श्री राम ने क्यूं की थी एक “शूद्र” की हत्या ?) में जानते हैं.

दोस्तों, यह तो आप जानते ही होंगे कि भगवान श्री राम अपना 14 साल का बनवास समाप्त करने के बाद इस पृथ्वी के राजा बन गए थे. भगवान श्री राम के राम राज्य में सभी लोग बड़े खुश थे. परंतु बहुत सालों के बाद उनके राज में अचानक एक बालक की मृत्यु हो गई थी. तो उस बालक के माता पिता उसका शव लेकर भगवान राम के राज्य द्वार पर बैठ गए थे और उस बालक के पिता ने रोते हुए यह कहा था की राजा श्रीराम के ही किसी दुष्कर्म के कारण उनके इकलौते पुत्र की मृत्यु हुई है. अतः श्री राम मेरे इस पुत्र को जीवित करें अन्यथा हम दोनों पति पत्नी भी इसी राज्य द्वार पर प्राण त्याग देंगे. और हमारी हत्या का पाप श्रीराम को लगेगा.

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दोस्तों, भगवान श्री राम ने जब उस व्यक्ति की बात सुनी तो बड़े दुखी हो गए थे. तब उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए अपने राज्य दरबार में देवर्षि नारद समेत कई बड़े महाऋषि-मुनियों को राजमहल में बुलाया था. जब उन महाऋषियों ने भगवान श्री राम की समस्या सुनी. तब देवर्षि नारद ने एक बात कही कि सतयुग में सिर्फ सत्य और धर्म का वास है. इस कारण सतयुग में सिर्फ ब्राह्मण ही तपस्वी हुआ करते हैं. लेकिन त्रेतायुग में अधर्म अपना एक पैर भूतल पर रख देता है जिससे तपस्या का तेज घटने के साथ मनुष्य की आयु भी घट जाती है. इस कारण त्रेतायुग में ब्राह्मणों की तरह क्षत्रिय को भी तपस्या करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है. त्रेता युग के बाद अधर्म अपना दूसरा पैर इस भूतल पर उतरता है. इस कारण ही उस युग को द्वापरयुग कहा जाता है. उस द्वापर युग में तपस्या का तेज और भी घट जाता है और मनुष्यों की आयु और भी कम हो जाती है. इसलिए द्वापर युग में तपस्या का अधिकार वैश्यों को भी प्राप्त हो जाता है. और कलयुग में अधर्म का अगला पैर भी धरती पर आ जाने से चारों तरफ अधर्म का बोलबाला हो जाता है. इस कारण कल युग में सभी तपस्या का अधिकार पा जाता हैं.

दोस्तों, देवर्षि नारद ने भगवान श्री राम से कहा कि वर्तमान में त्रेता युग चल रहा है. इस युग में ब्राह्मणों . क्षत्रियों को छोड़कर किसी और का तपस्या करना अधर्म है. निश्चय ही आपके राज्य में कोई शुद्र महान तप कर रहा है, इसी कारण उस बालक की मृत्यु हुई है. यदि आपने इस दुष्कर्म को नहीं रोका तो आप भी नर्क में पड़ेंगे. देवर्षि नारद की यह बात सुनकर भगवान राम ने उस मरे हुए बालक का शव सुरक्षित रखवा दिया था और स्वयं पुष्पक विमान से उस शुद्र की खोज में चल दिए थे.

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दोस्तों, खोजते-खोजते जब भगवान श्री राम उस शूद्र के पास पहुंचे तब उन्होंने देखा कि वह शूद्र अपना सर नीचे किए हुए बड़ी कठिन तपस्या कर रहा है. तब श्री राम ने उस कठिन तपस्या करने वाले व्यक्ति से यह कहा कि तुम किस चीज को प्राप्त करने के लिए इतना कठिन तप कर रहे हो. तब उस तपस्वी ने कहा कि मैं उस देवलोक को पाने के लिए यह तपस्या कर रहा हूं. तब श्री राम ने कहा की तुम धन्य हो और कहा की क्या तुम मुझे बता सकते हो कि तुम्हारा जन्म किस जाति या वर्ण में हुआ है. तब उसी तपस्वी ने कहा कि मैं शूद्र जाति में उत्पन्न हुआ हूं. दोस्तों इतना सुनते ही भगवान श्रीराम ने अपने तलवार से उस शुद्र का गला काट दिया था.

उसके मरते ही उसकी तपस्या से डरे हुए इंद्र समेत सभी देवता प्रसन्न हो गए थे और वह बालक भी जीवित हो गया था जो इस अधर्म के कारण मृत्यु को प्राप्त हुआ था. दोस्तों उस शूद्र का नाम शंबूक ( Shambuk) था. इस कहानी का उल्लेख वाल्मीकि के रामायण सुंदरकांड ब्रम्हांड महापुराण मैं भी साफ़ साफ़ वर्णित किया गया है.

दोस्तों आपको हमारा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा आप अपने कमेंट के जरिये जरूर बताएं. Bhagwan sri raam ne kyon ki the ek shudr ki hatya. us shudr ka naam shambuk tha

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