भारत का गद्दार एजेंट रविंद्र सिंह.


भारत का गद्दार एजेंट रविंद्र सिंह
भारत का गद्दार एजेंट रविंद्र सिंह

भारत का गद्दार एजेंट रविंद्र सिंह : Bharat Ka Gaddar Agent Rabinder Singh

दोस्तों, आज हम आपको जिस खुफिया एजेंट के बारे में बताने जा रहे हैं, उसने चंद पैसो के लिए अपने देश को बेच दिया. आइये जानते हैं इस गद्दार एजेंट की कहानी.

बात है इस साल 2003 की, अमेरिका और इराक के बीच रिश्ते बहुत बिगड़ गए थे. अमेरिका को शक था कि इराक के पास वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन और खतरनाक बायोलॉजिकल वेपन्स हैं. इराक पर हमला करने से पहले अमेरिका इराक के अंदरूनी मामलों की पुख्ता खबर जुटाना चाहता था.

इसके लिए अमेरिका ने भारत से मदद मांगी क्योंकि उस समय भारत और इराक के संबंध बहुत अच्छे थे और रॉ के कई एजेंट्स इराक में मौजूद थे. उन्ही एजेंट्स में एक था रविंद्र सिंह. रविंद्र सिंह एक रिटायर्ड आर्मी अफसर था और रॉ के सीनियर एजेंट्स में से एक था.

इराक में ही रविंद्र की पहली सीआईए के एजेंट से मुलाकात हुई. रविंद्र ने अपना काम बखूबी निभाया और अमेरिका को इराक के अंदरूनी मामलों के बारे में खुफिया जानकारी दी. फिर उसके कुछ समय बाद जब भारत में रॉ के हेडक्वॉर्टर्स आया तो उसका व्यवहार कुछ बदला-बदला सा नजर आने लगा. वह रॉ के उन डिपार्टमेंट में भी इंटरेस्ट लेने लगा जिन डिपार्टमेंट से इसका कोई लेना देना नहीं था.

एक बार रविंद्र को रॉ के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में कुछ दस्तावेजों की फोटो कॉपी करता हुआ पाया गया. तभी रविंद्र की जूनियर ऑफिसर्स को उस पर शक होने लगा और उन्होंने रॉ की काउंटर इंटेलिजेंस विंग को आगाह कर दिया. काउंटर इंटेलिजेंस विंग का काम होता है रॉ के एजेंट पर नजर रखना और यह देखना कि कहीं कोई रॉ का एजेंट भारत की खुफिया जानकारी किसी और देश तक तो नहीं पहुंचा रहा.

इसके बाद रॉ ने रविंद्र पर कड़ी निगरानी रखना शुरु कर दिया और उसके फोन टैप किए जाने लगे. उसके ऑफिस में हिडन कैमरा लगाए गए, उसकी कार में हिडन माइक लगाए गए और रविंद्र जिस जिम में जाता था वहां भी रॉ के एजेंट्स उसका पीछा करने लगे.

लेकिन रविंद्र की जासूसी करने के दौरान रॉ ने एक गलती कर दी. रॉ ने रविंद्र के डिपार्टमेंट के एक क्लर्क से पूछताछ करना शुरु कर दिया और इस बात की भनक रविंद्र को लग गई. रविन्द्र को शक हो गया कि उसका भांडा फूट चुका है और रॉ की निगरानी में हैं.

रविंद्र ने ज्यादा समय ना गवाते हुए भारत छोड़ने का प्लान बनाना शुरु कर दिया और इस काम में सीआईए ने उसकी बखूबी मदद की. एक दिन अचानक रविंद्र अपनी पत्नी परमिंदर कौर के साथ भारत से नेपाल चला गया जहाँ सीआईए के एजेंट्स ने दोनों के फर्जी पासपोर्ट तैयार रखे थे. जिनमे उनका फर्जी नाम राजपाल प्रसाद शर्मा और दीप कुमार शर्मा था.

और इस प्रकार रविंद्र सिंह 4 मई 2004 को काठमांडू से वाशिंगटन की फ्लाइट से अमेरिका चला गया. यह गद्दार आज भी अमेरिका में आजाद घूम रहा है.

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