भोजन करने से पहले क्यों कई लोग चारो और जल छिड़कते है ?


भोजन करने से पहले क्यों कई लोग चारो और जल छिड़कते है ?
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भोजन करने से पहले क्यों कई लोग चारो और जल छिड़कते है : परंपरा में कई ऐसे रिवाज़ चलते आए है जिनके पीछे का कारण लोग भूल गये है मगर क्योंकि यह किया जाता था और दादी मा ने कहा था इसीलिए किए जाते है. इन प्रथा में से एक है भोजन से पहले ताली के चारो और उंगली को पानी में डुबोकर जल छिड़कने का. आज के इस पश्चिमी सभ्यता को हमलोग इतनी तेजी से अपना रहे है की अगर कोई ऐसा आपके सामने यह करें तो बड़ा अजीब लगता है. क्योंकि ना तो हमे इनमे रूचि है और ना ही हमने कभी इसे समझने की कोशिश की. अगर आप के बच्चे आप से कभी गलती से ये सवाल कर दे तो आप क्या करेंगे. शायद पता नहीं कर के उस बच्चे की जिज्ञाषा को शांत कर देंगे. चलिए दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे है इस प्रथा के पीछे का राज़.

हिन्दू परंपरा अनुसार भोजन से पहले थाली के चारो और पानी को छिड़का जाता है और वो भी तीन बार. इस के साथ एक मन्त्र भी पढ़ा जाता है.

Bhojan se Pehle Kyon Kai Log Charo Aur Jal Chidkte Hai

दोस्तों, आज भी कुछ लोग अपने घर के रशोई में ही ज़मीन पर बैठ के भोजन करते है परम्परांगत तरीके से. खास कर के गांव में आज भी ये प्रथा दिखने को शायद मिल जाए. अन्न और भोजन सभी को नसीब नहीं होता है. जब भी हमे भोजन मिलता है तो हमे अन्न का पूरा आदर करना चाहिए और अपने देवी देवताओ का सुक्रगुजार मानना चाहिए.

भोजन के चारों ओर जल छिड़कना एक विधि है, इससे हम अन्न की पूरी तरह से आदर करते है. और दूसरा कारण है भोजन के पहले चारो और जल छिड़कने का की यह स्वास्थय के लिए फायदेमंद है.

व्यावहारिक दृष्टि से देखे तो उस जमाने के परिस्थितियों को समझना होगा. पहले के समय मे टाइल्स नहीं हुआ करते थे. घरो में गोबर से लिपाई और पोताई होती थी या फिर मिट्टी से. लोग नीचे बैठ कर ही भोजन करते थे. जल छिड़कने से मिट्टी उड़ता नहीं है और ऐसे हवा में से बॅक्टीरिया और धूल भोजन में प्रवेश नहीं होता है. यही नही, ज़मीन के उपर चलते कीड़े-मकोड़े जल से दूर रहके भोजन की थाली में प्रवेश नहीं कर पाते है.

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