माएँ विसर्जित हो जाती है….


 

पहले काट खाती है
फिर धीरे धीरे चबाती है
Politics कूड़े पर बैठी कुतिया है
जो अपनी जीभ से अपने पिल्लों के घाव चाट जाती है….

जब एक कश्मीरी द्वारा सैनिक को बचाये जाने की खबर आती है
जब कर्फ्यू तोड़कर 20 अमरनाथ यात्रियों को public बचाती है
जब पाकिस्तानी बेटियों को सुषमा स्वराज महफूज़ घर पहुचाती है
तब नजर आती है वो बात जो मेरे देश को हिन्दुस्तां बनाती है….

सियासत सरहदें बनाती है
हुकूमतें हिरोशिमा बनाती हैं
किसी surrealistic से सपने मे मुझे
बाबरी पर चली कुदाली, राजघाट खोदती नजर आती है….

Development तो पता नही पर सरकार कितना entertainment कराती है
पहले border पर reality show फिल्माती है
फिर कुछ दोगले लोगो की demand पर
उसे prime time मे telecast कराती है….

कहीं नन्ही मुनिया विजयादशमी के जलसे मे कुचली जाती है
कहीं 13 साल की ‘बाल तपस्विनी’ उपवास करते करते मर ही जाती है
मेरे मौला! मन्दिर मस्जिद मे मुझसे ना मिलना कभी
मुझे ऐसी बड़ी बियाबान इमारतें बड़ा डराती हैं….

मुझे शेर पे बैठी माँ नहीं लुभाती है
मेरी माँ तो kitchen मे खाना बनाती है
जैसे कहते हैं सरहदों पर सैनिक कभी सोता नहीं
पता नही माएँ पौ फटे कब जाग जाती है
जैसे कहते है सैनिक हमेशा किसी और की लड़ाई पर जाता है
माएँ औरों की बलाएं भगाते भगाते आखिर मे विसर्जित हो जाती हैं….

  • by Amit Choudhary

Comments


log in

Don't have an account?
sign up

reset password

Back to
log in

sign up

Captcha!
Back to
log in