मेष लग्न में सूर्य दुत्तीय घर या भाव में : वैदिक फलादेश


मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश
मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश
मेष लग्न में सूर्य की स्थिति द्वितीय स्थान में
मेष लग्न में सूर्य पंचमेश यानी त्रिकोणाधिपति  होने के कारण शुभ फलदाई है. द्वितीय स्थान में सूर्य वृषभ राशि में होगा, ऐसा जातक  समाज में इज्जत मान पाने वाला, दस्तकार, फैक्ट्री का मालिक, राजदरबार या सरकार से मान सम्मान पाने वाला यशस्वी जातक होता है. ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली होता है लेकिन अपनी कुटुम के सदस्यों से दुश्मनी रखता है. इस जातक का धन सही मार्ग एवं शुभ कार्य में खर्च होता है. ऐसे जातक का घर बहुत बड़ा होता है और बहुत सारे वाहन होते हैं. जो आपकी प्रतिष्ठा और शोभा को बढ़ाने में मददगार है.
निशानी : अपने भुजा बल का स्वामी, प्रथम पुत्र जन्म के बाद जातक का भाग्योदय होगा
अनुभव : भृगु संघिता के अनुसार जातक की वाणी अभिमानी एवं कटाक्ष वाली होती है
दशा : सूर्य की दशा बहुत अच्छा फल देगी. धन की भी खूब प्राप्ति होती है और संतान सुख का भरपूर लाभ मिलेगा.
सूर्य का अन्य ग्रहों से संबंध या युति
सूर्य चंद्र की युति : सूर्य के साथ यदि चंद्रमा हो तो जातक को माता की संपत्ति मिलती है. जातक धनवान होता है. जातक का पुत्र भी धर्मात्मा होगा ऐसे जातक का जन्म जेष्ठ कृष्ण अमावस्या रात्रि 4:00 बजे के आसपास होगा. यह युति प्रबल राजयोग कारक है.
सूर्य मंगल की युति : सूर्य के साथ यदि लग्नेश मंगल हो तो जातक स्वह पराक्रम से खूब धन कमायेंगे. जातक का परिश्रम सार्थक रहेगा
सूर्य बुध की युति : सूर्य के साथ बुध हो तो बुद्धादित्य योग बनेगा. यह पंचमेश सूर्य की सस्टेश एवं तृतीय बुध के साथ युति होती है. बुध यहां स्वग्रही है. ऐसा जातक पराक्रमी होगा परंतु धीरे धीरे अटक अटक कर बोलेगा
सूर्य गुरु की युति : जातक का भाग्य साथ देने वाला और सुखी होगा. तीर्थ यात्रा एवं धार्मिक कार्य में पैसे कमाएगा
सूर्य शुक्र की युति : सूर्य के साथ यदि शुक्र हो तो पुत्रमूल धन योग बनेगा. जातक पुत्र द्वारा धन, यश एवं मृत्यु को प्राप्त करेगा
सूर्य शनि की युति : सूर्य के साथ शनि पिता की मृत्यु के बाद जातक का भाग्योदय करता है.
सूर्य राहु की युति : सूर्य के साथ राहु, धन के घड़े छेद, धन की बरकत नहीं, पुत्र खर्चीले स्वभाव का होगा
सूर्य केतु की युति : जातक की जुबान घमंडी होगी पर अचानक  बोला गया वचन सत्य हो जाएगा
द्वितीय भाव में सूर्य का उपचार
मुफ्त का माल नहीं खाना चाहिए
मुफ्त  का दान नहीं ले
नारियल का तेल या बादाम का तेल धर्म स्थान पर चढ़ाये
आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ रोज करें

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