मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश


मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश
मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश

मेष लग्न में सूर्य की स्थिति पंचम स्थान में

 

मेष लग्न में सूर्य पंचमेश यानी त्रिकोणाधिपति होने के कारण शुभ फलदाई है. पांचवें स्थान में सूर्य सिंह राशि में होने से स्वग्रही होगा. जातक राजा एवं राजा के समान प्राप्त प्रतापी, सरकार से सम्मानित होगा एवं उच्च शिक्षा प्राप्त करेगा. जातक ज्योतिष तंत्र इत्यादि गुप्त विद्याओं का जानकार और जातक का भाग्योदय संतान प्राप्ति के बाद होगा

 

अनुभव : पंचमेश पंचम भाव में स्वग्रही होने से भोज संघिता के अनुसार जातकों पर ईश्वरीय अनुकंपा बानी रहेगी. यह पुण्य का भी भाव है. जातक की संतति संपन्न होगी, जातक को सरकारी नौकरी मिल सकती है

 

निशानी : परिवार तरक्की का मालिक
दशा : सूर्य की दशा अति उत्तम फल देगी. जातक का भाग्योदय होगा. सरकारी क्षेत्र में सफलता कोर्ट कचहरी में विजय मिलेगी

 

 
सूर्य का अन्य ग्रहों से संबंध या युति

 

सूर्य चंद्र की युति : सूर्य के साथ यदि चंद्रमा हो तो जातक का जन्म भाद्र कृष्ण अमावस्या की रात्रि 10:00 बजे के लगभग होगी. जातक की माता भाग्योदय में सहायक होगी. यह युति प्रबल राजयोग कारक है
सूर्य मंगल की युति : यदि लग्नेश मंगल के साथ हो तो तीन पुत्रों की संभावना रहती है. जातक शस्त्र विद्या का जानकार होता है. जातक शत्रुओं का नाश करने में सक्षम होता है. यहां सूरज के साथ मंगल की युति प्रबल राजयोग कारक है

सूर्य बुध की युति : सूर्य के साथ बुध हो तो बुधादित्य योग बनेगा. यह पंचमेश सूर्य की तृतीय एवं सस्टेश बुद्ध के साथ युति पंचम भाव में होगी जहां सूर्य स्वग्रही होगा. यह युति राजयोग प्रधान साबित होगी. मित्रों की वजह से जातक को सफलता मिलती रहेगी

सूर्य गुरु की युति : प्रथम पुत्र होगा, जातक का पुत्र धनी होगा, स्वयं अध्यात्मिक विद्या का ज्ञाता होगा

सूर्य शुक्र की युति : विद्या से भाग्य चमकेगा, जातक का पुत्र धनी होगा

सूर्य शनि की युति :जातक का भाग्योदय पिता की मृत्यु के बाद होगा, संभवता पुत्र संतति भी

सूर्य राहु की युति : पितृदोष से जातक ग्रसित रहेगा, परिश्रम का फल नहीं मिलेगा, जातक जादू टोने में विश्वास रखेगा

सूर्य केतु की युति : जातक भूत विद्या का जानकार होगा. जातक जादू टोने में विश्वास रखेगा. सूर्य के साथ राहु या केतु हो तो सर्प के शाप से पुत्र संतान का नाश होता है. परंतु सर्प दोष शांति से संतान होगी.

 
पंचम भाव में सूर्य का उपचार

अपने वायदे वचन के प्रति पाबंद रहे

अपनी खानदानी परंपरा को नष्ट ना करें

लाल मुंह के बंदरों को गुड़, चना और फल खिलावे

बजरंग बाण का पाठ करें

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