सभी देवो में भगवान श्री गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है ?


सभी देवो में भगवान श्री गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है ?
सभी देवो में भगवान श्री गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है ?

सभी देवो में भगवान श्री गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है ? हिंदू धर्म में ऐसा कोई कार्य नहीं जो गणपति पूजन के बिना प्रारंभ किया जाता. श्री गणेश कहकर कोई कारोबार या शुभकाम या दुकान आरंभ करता है. गणेश जी का सिर हाथी का है, इसका तात्पर्य है कि हाथी ही एकमात्र ऐसा जीव है जो बहुत गहराई से सोचा है और इतना ही नहीं जब वह चलता है तो अपनी सूंड से फूक मार मार कर कदम रखता. इसका अभिप्राय है कि रास्ते में एक चींटी के सामान भी अड़चन ना आने पाएं, कहने का मतलब यह है की एक छोटी सी दिक्कत, जो देखने में चींटी के सामान लगे, परंतु बाद में आप की अक्ल को, दिमाग को खराब कर दे, जिसके नुकसान से आप सर पटक-पटक कर अपना नुकसान कर बैठे. हाथी का विशाल मस्तक इस बात का प्रमाण है कि जब हाथी किसी विपत्ति में होता है, तो वह धैर्य रखकर उसे निकालने, उभरने की कोशिश करता है और अपनी बुद्धि द्वारा उसे हल कर लेता है. ऐसे में आप भी जब कोई काम करें तो हाथी की भांति पहले पूर्ण विचार करके एक-एक कदम फूक-फूक कर रखें अर्थात पूरे ध्यान से रखें और ऐसा रखें कि पीछे ना मुड़ना परे, तभी तो श्री गणेश कहते हैं.

Sarvprathm Ganesh Pujan kyon in Hindi.

गणेश जी के साकार विग्रह में मनुष्य के धड़ पर हाथी का मुख संयुक्त किया गया. इसमें भी रहस्य है. हाथी में बुद्धि, धैर्य एवं गम्भीरता का प्राध्यान है. गणेश जी का हाथी का सिर उनके इन्हीं गुणों को प्रदर्शित करता है. हाथी के नेत्रों की भी अपनी महिमा है. हाथी के नेत्र का निर्माण संसार के सभी प्राणियों के नेत्रों से विपरीत है. हाथी का नेत्र छोटी वस्तु को भी बड़ी देखते हैं. अपने कार्य मे विघ्न ना चाहने वाले व्यक्ति को भी अपना दृष्टिकोण हाथी की भांति दूसरों को अपने से बड़ा देखने वाला बनाना चाहिए. जब मनुष्य दूसरों को अपने सामने तुच्छ समझ कर उनका अपमान करता है, तो दूसरे लोग अपने सम्मान की रक्षा के लिए उसे ह्रदय से सहयोग नहीं देते. इसलिए दूसरों को अपने से बड़ा देखने की शिक्षा एकमात्र हाथी के नेत्र से ही मिलती है. हाथी की तरह बड़े कानो का अर्थ है हमें सब कुछ धैर्य और गंभीरता से सुनना चाहिए. गणेश जी का लंबोदर, अर्थात लंबा, मोटा पेट हमें सबकी भली बुरी बातें अपने पेट में रखने की शिक्षा देता है. गणेश जी को एकदंत कहा जाता है. उनका एकदंत एकता का संदेश देता है. एक कहावत है कि अमुक लोगों को बहुत एकता है “एक दांत से रोटी खाते हैं”. गणेश जी का वरदहस्त भक्तों को कामना पूर्ति तथा अभयहस्त संपूर्ण भयों से रक्षा सूचक है.

जैसा कि सब जानते हैं कि गणपति जी का वाहन मूषक, अर्थात चूहा है. गणपति बुद्धि के देवता हैं और चूहा तर्क का प्रतीक इसलिए बुद्धि सदेव तर्क पर सवार रहती है. मूषक का एक अन्य अर्थ है चोरी करने वाला. मनुष्य के भीतर जो चोरी आदि पाप कि वृतियां है, उनका प्रतीक है मूषक. गणेश जी उस मुषक पर चढते है अर्थात उस चरण प्रहार करके उसे दवाये रहते हैं. गणेश जी के चिंतन और स्मरण से भीतर के दुर्गुण दब जाते हैं. गणेश जी को गजमुख भी कहा जाता है जिसका अर्थ है आठों दिशाओं कि और मुख करने वाले. गणेश जी आठों पहर की और आठों दिशाओं की खबर रखते हैं इसलिए उन्हें गजमुख कहा जाता है. इसलिए इनकी पूजा किए बिना किसी भी मांगलिक कार्य का प्रारंभ नहीं किया जाता है.

दोस्तों अब तो आप समझ गएँ होंगे की क्यों सभी देवो में भगवान श्री गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है. अगर आपको हमारा यह आर्टिकल आपको पसंद आये तो शेयर और लाइक जरूर करें. अगर आप ऐसे है किसी विषय के बारे में जानकारियां चाहिए तो आप हमें कमेंट कर के बता सकते है.

sabhi devo me bhagwan shri ganesh ki puja sabse pehle kyon ki jaati hai.

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