सुलझ गया बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य!


sulajh gaya bermuda triangle ka rahashya
thumbnail-caption

 

 बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य 

बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य दुनिया के सबसे बड़े अन्सुनझे रहस्यों में से एक है लेकिन शोधकर्ताओं द्वारा दि गए नई थ्योरी के मुताबिक उन्होंने इस रहस्य को सुलझा लिया है | जिनको बरमूडा ट्रायंगल के बारे में नहीं पता उन्हें हम बता दें की बरमूडा ट्रायंगल उत्तरी अटलांटिक महासागर में एक डेंजर जोन है जहा न जाने कितने सारे हवाई और समुद्री जहाज़ रहस्यमयी ढंग से गायब हो चुके है और आज तक किसी का मलबा भी नहीं मिला है |

५ दिसम्बर १९४५ को अमेरिकन नेवी के १४ एयरमैन ने अपने 5 लड़ाकू विमानों से फ्लोरिडा से एक रूटीन ट्रेनिंग एक्सरसाइज के सिलसिले में उड़ान भरी |इस ट्रेनिंग एक्सरसाइज का नाम था फ्लाइट १९ . उड़ान भरने के केवल १ घंटे ४५ मं बाद ही फ्लाइट लीडर लिएउटनन्ट चालीस टेलर ने रेडियो से कण्ट्रोल टावर को सूचित किया की वहाँ कुछ गड़बड़ है | उन्होंने कहा की उनके तीनो कंपास ने काम करना बंद कर दिया है और उन्हें नहीं पता की पश्चिम दिशा कौन सी है | यहाँ तक की समुद्र भी सामान्य से बिलकुल अजीब दिख रहा है | थोड़ी ही देर बाद उनका संपर्क टूट गया और उसके बाद उनका कोई अता पता नहीं चला | थोड़ी बाद उन्हें ढूढने के लिए एक सर्च प्लेन भेजा गया लेकिन उड़ान भरने के महज़ २७ मिनट बाद वो भी गायब हो गया |

बरमूडा ट्रायंगल समुद्र के 5 लाख स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है और इसे डेविल ट्रायंगल भी कहते है | हालाँकि ये ट्रायंगल कहा से शुरू होता है और कहा पर ख़तम होता है इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता | पिछले १०० साल में यहाँ १००० से भी ज़्यादा हवाई और समुद्री जहाज़ गायब हो चुके है और हर साल लगभग 4 – 5 जहाज़ यहाँ गायब होते है |

कोलाराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक यहाँ २७३ किमी/घ. की रफ़्तार से चक्रवाती तूफ़ान हेक्सागोनल क्लाउड्स में तब्दील हो जाते है जिन्हें एयर  बोम्ब्स कहा जाता है | इन तूफ़ानो की रफ़्तार किसी भी हवाई या समुद्री जहाज़ को तबाह करने के लिए काफी है | इन बादलो की डेंसिटी यानि की घनत्व इतना ज़्यादा होता है की किसी भी प्रकार के रेडियो सिग्नल काम नहीं करते |

मेटेओरोलॉजिस्ट रैंडी सर्वानी के मुताबिक माइक्रोबर्स्ट्स के कारण बन ने वाले ये हेक्सागोनल एयर बोम्ब्स जब समुद्र से टकराते है समुद्र में कई फ़ीट ऊँची लहरें उठ टी है | ये लहरें इतनी विशाल और ऊँची होती है की ये आपस में एक दुसरे से टकराने लगती है | और शोधकर्ताओं के मुताबिक बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य उन्ही बादलों में छिपा है जो एयर  बोम्ब्स पैदा करते है |

बरमूडा ट्रायंगल का पहला ज़िक्र क्रिस्टोफर कोलंबस के जर्नल्स में मिलता है जिसमें उन्होंने लिखा था की जहाज़ के अंदर उनके कंपास ने काम करना बंद कर दिया था | इसके बाद उन्होंने आसमान में आग का एक गोला देखा था |

फ्लोरिडा , बरमूडा और पुएर्तो रीको के बीच में स्थित बरमूडा ट्रायंगल का नाम ऑथर विन्सेन्ट गद्दीस के द्वारा साल १९६४ में अरगॉय मैगज़ीन में छपे उनके लेख के बाद पड़ा |

हालाँकि ये भी जान ना ज़रूरी है की बरमूडा ट्रायंगल के रहस्य की नयी थ्योरी पर कई सारे शोध करता एक राय नहीं रखते |
साल १९७५ में लॉरेंस डेविड कुस्चे की किताब द बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्री : साल्व्ड के मुताबिक बरमूडा ट्रायंगल की घटनाओ को कुछ ज़्यादा ही बढ़ा चढ़ा कर बताया जा रहा है और यहाँ होने वाली घटनाएं किसी आम महासागर में होने वाली घटनाओ के समान ही है |

सुलझ गया बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य!, sulajh gaya Bermuda triangle ka rahashya, Bermuda triagne mystery  solved,mystery of Bermuda triangle.

Loading...

Comments


log in

Don't have an account?
sign up

reset password

Back to
log in

sign up

Captcha!
Back to
log in