सेंधा नमक धरती पर सबसे शुद्ध नमक


सेंधा नमक धरती पर सबसे शद्ध नमक

सेंधा नमक प्रकर्ति का प्रसाद है, इस धरती पर पाये जाने वाले जितने भी प्रकार के नमक है उनमे सबसे ज्यादा उत्तम व शुद्ध नमक कोई है तो वो वह सच में सेंधा नमक ही है | सेंधा नमक की उत्पत्ति का इतिहाश करोड़ों वर्ष पुराना है | सेंधा नमक का महत्व सोने से भी ज्यादा माना गया है | इसका उपयोग ऋषि मुनि आयुर्वेद में चिकित्षा के लिए करते आये हैं | आज भी यह उतना ही गुणकारी व पोस्टिक है | हर प्रकार से रसायन व प्रदुषण से रहित है |

हमारे शरीर के लिए ज़रूरी सभी 84 प्रकार के सूक्ष्म पौषक तत्व इसमे मौजूद है, जैसे कैल्शियम, आयरन, फोस्फोरस , कॉपर, ज़िंक, आयोडीन आदि | इसमें सोडियम की मात्रा कम होती है | इसकी पवित्रता व सुद्धता के कारण ही व्रत व् उपवास ये यही नमक काम मे लिया जाता है | इससे भोजन श्रेष्ठ, पवित्र बनाता है |
यह नमक कई रोगों से हमारा बचाव करता है जैसे की अस्थमा, साइनस, थाइराइड, उच्च रक्तचाप व निम्न रक्त चाप, लकवा, मधुमेह, अपच, वायु रोग, कब्ज, मूत्र संबधी रोग आदि | यह स्वास क्रिया को ठीक करता है, शरीर में ख़राब कोलेस्ट्रॉल व मांशपेशियों को ताकत देता है, शरीर के पी॰ अच् । मन को नियंत्रित करता है, शरीर से खराब कोलोरेसट्रोल को बाहर निकल देता है व इसके उपयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है| शरीर में सेंधा नमक से जो – जो पौषकता मिलती है, इसी पौषकता की कमी होने से लकवा होता है व इसी पौषकता की कमी होने से ब्रेनहेमरेज होता है |

सब्जियों को बनाने से पहले यदि सेंधा नमक के घोल मे रखा जाए तो काफी हद तक कीट नाशक के जहर को कम करता है | इसके प्रयोग से सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है | अगर आचार मे डाला जाए तो आचार ज्यादा दिनों तक खराब नहीं होता |

सेंधा नमक के साबुत पत्थर को यदि ऑफिस, दुकान व कमरे आक्तद मे रखा जाए तो यह उस स्थान की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकल कर उस स्थान को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है व यदि इसे कम्प्यूटर या टीवी के सामने रख दें तो अल्ट्रा वायलेट रेज़ को अपने मे खीच कर लेता है |

समुद्री नमक : इस नमक मे 97.5% सोडियम क्लोराइड है व बाकी 2.5% मे, पोटैशियम आयोडाइड, सोडियम बाईकाबोनेट, एल्युमीनियम सिलिकेट व् सोडियम ग्लूटामेट, इसमें डालियाँ न बने इसकेलिए इसमें कुछ Anti-caking agents ( पोटैशियम और सोडियम फरोशयानिडे ) आदि केमिकल्स है |

इनमे सबसे ज्यादा खतरनाक पोटैशियम आयोडाइड व एल्युमीनियम सिलिकेट है, यह दोनों ही केमिकल्स यदि शरीर मे जाए तो नपुंसगता लाते है | ये सब शरीर के घातक विष है |
एल्युमीनियम हमारे मस्तिष्क और नाड़ियो को छतिग्रस्त करता है और अलझाइमर जैसे रोग पैदा करता है | इसी कारण आयोडीन युक्त नमक दुनिया के कई देशो मे प्रतिबंधित है |

नमक की एक विशेषता होती है की वह वातावरण की नमीं को अपने अंदर खिंचता है , ऐसा न हो व नमक एक्स्ट्रा फ्री फ्लो हो इसके लिए इस नमक मे कई प्रकार के केमिकल्स (मैग्नीशियम कार्बोनेट , कैल्शियम सिलिकेट , सोडियम सिलिको -अलुमिनाते और त्रिकालसिम फॉस्फेट । ) मिलाये जाते है व इसको सफ़ेद करने के लिए ब्लीचिंग एजेंट्स मिलाये जाते जो शरीर को नुकशान करते है |

रिफाइंड नमक के प्रयोग से शरीर को किसी भी प्रकार के मिनरल्स नहीं मिलते हैं. इसके सेवन से उच्च रक्तचाप, किडनी फेल्योर, कॉलेस्ट्रोल, ब्रेन हेमरेज एवं रक्त दोष, हृदय रोग, आंतों के रोग, सिरदर्द आदि और भी कई रोग होने की संभावना होती है. भारत में यह घातक रोग केमिकल वाले नमक के उपयोग करने के बाद ही आए हैं.

इस नमक को यदि दही में डाल कर खाते हैं तो कई बीमारियां होती है. कारण इस से दही में मौजूद सभी जीवाणु जोकि शरीर के लिए लाभकारी है समाप्त हो जाते हैं. जबकि सेंधा नमक से दही में मौजूद जीवाणु समाप्त नहीं होते. वह दही शरीर को नुकसान करने के बजाय फायदा करता है.

सेंधा नमक की कुछ विशेषताएं –

  • सेंधा नमक सफेद सोना है
  • इसमें 84 तरह के सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं
  • इसमें प्राकृतिक आयोडीन होता है जो कि आसानी से शरीर में घुल जाता है
  • सेंधा नमक की खानें किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त होती है.
  • इसके निर्माण में केमिकल्स का प्रयोग नहीं होता.
  • आयुर्वेद में वर्णन है एवं सबसे अच्छा माना जाता एवं कई दवाइयों में प्रयोग किया जाता है.
  • यह वात पित्त एवं कफ आदि त्रिदोष के नियंत्रण में सहायक है.
  • इसको सीमित मात्रा में प्रयोग से किसी प्रकार की बीमारी का खतरा नहीं रहता.

इसके विपरीत आयोडीन युक्त समुद्री नमक की कुछ खामिया –

  • समुद्री नमक सफेद जहर है
  •  सिर्फ तीन मिनरल होते हैं
  • इसमें केमिकल आयोडीन होता है
  • केमिकल आयोडीन शरीर में घुलता नहीं है जिसके फलस्वरुप किडनी एवं गॉल ब्लेडर में स्टोन बनने की पूरी संभावना रहती है.
  • समुंद्र के प्रदूषित पानी को शुद्ध करने की प्रकृति द्वारा कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए इसको शुद्ध करने के लिए
  • रासायनिक प्रक्रिया की जरूरत होती है.
  • इस के निर्माण में केमिकल्स का प्रयोग होता है.
  • आयुर्वेद में सबसे खराब माना जाता है.
  • यह केवल औद्योगिक उपयोग के लिए ठीक है
  • इससे वात पित्त एवं कफ बिगड़ता है.
  • समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप, लकवा, ह्रदयघात आदि गंभीर बीमारियों का भय रहता है.
  • समुद्र में मछलियां समेत कई जीव जंतु मरते रहते हैं जिनके अवशेष समुद्री किनारों पर देखा जा सकता है

हमलोग आयोडीन के पीछे भागकर केमिकल वाला नमक खा रहे हैं. यह कोई समझदारी नहीं है जितने आयोडीन की हमें जरुरत है वह तो हमें दालों, आलू ,अरवी एवं हरी सब्जियों से भी मिल जाता है. हां जहां पहाड़ों में आयोडीन की कमी हो वहां यह जरुरी हो सकता है. 1930 से पहले समस्त भारत में सेंधा नमक ही काम में लिया जाता था. अंग्रेजों ने इसे बंद करा के समुद्री नमक का व्यापार शुरू किया. प्रसिद्ध वैज्ञानिक और समाज सेवी श्री राजीव भाई दीक्षित का कहना है कि समुंद्री नमक तो अपने आप में बहुत खतरनाक है लेकिन उसमे आयोडीन एवं अन्य केमिकल्स मिलाकर उसे और जहरीला बना दिया जाता है. आयोडीन युक्त समुद्री नमक कोई बहुत ज्यादा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी नहीं होता लेकिन इसका इतना ज्यादा प्रचार कर दिया गया है कि हमें लगता है कि यह सेंधा नमक के मुकाबले बहुत अच्छा होता है.

विश्व के लगभग 56 देशों जैसे अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क, स्वीडन आदि ने कई वर्षों पहले ही आयोडीन युक्त नमक को प्रतिबंधित कर दिया है.

sendha namak dharti par sabse sudh namak

Comments


log in

Don't have an account?
sign up

reset password

Back to
log in

sign up

Captcha!
Back to
log in