हनुमानजी के कितने भाई थे, हनुमान जी के भाइयों के नाम ? ब्रह्मांड पुराण के अनुसार !


हनुमानजी के कितने भाई थे, हनुमान जी के भाइयों के नाम ? ब्रह्मांड पुराण के अनुसार
हनुमानजी के कितने भाई थे, हनुमान जी के भाइयों के नाम ? ब्रह्मांड पुराण के अनुसार

हनुमानजी के कितने भाई थे, हनुमान जी के भाइयों के नाम ? ब्रह्मांड पुराण के अनुसार : दोस्तों राम भक्त हनुमान की गाथा हर कोई गाता है, उनके विषय में व्यक्ति – व्यक्ति भली – भांति परिचित है. लेकिन आज हम यहां हनुमान जी से जुड़ी उन बातों की चर्चा कर रहे हैं, जिनके बारे में बहुत हीं कम लोग जानते हैं .

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी के और भी भाई-बहन थे? अगर नहीं जानते हैं, तो हम आपको बताते हैं कि हनुमान जी के और कितने भाई-बहन थे.

 

Hanumanji Ke Kitne Bhai The, Hanuman Ji Ke Bhaiyon Ke Naam ? Bhrahmand Puran ke Anusar

 

ब्रह्मांड पुराण के अनुसार हनुमान जी के सगे 5 भाई थे

ब्रह्मांड पुराण में हनुमान जी से जुड़ी इन बातों के विषय में विस्तारपूर्वक बताया गया है. ब्रह्मांड पुराण के अनुसार हनुमान जी के सगे 5 भाई थे. और उनके पांचों भाई विवाहित थे. और उनके बच्चे भी थे.

ब्रम्हांडपुराण के अनुसार हनुमानजी के पिता वानर राज केसरी के 6 पुत्र थे. जिनमें हनुमान जी सबसे बड़े थे. उनके बाद क्रमशः मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान तथा
धृतिमान थे. हनुमान जी के पांच भाइयों के वंश वर्षों तक चले. इसी ब्रह्मांडपुराण ग्रंथ में बजरंगबली के माता और पिता का विवरण मिलता है. बजरंगबली के पिता केसरी का विवाह अंजना से हुआ था, केसरी वानर राज थे.

ब्रह्मांड पुराण में इस बात को विस्तार से बताया गया है कि, कुंजर की पुत्री अंजना बेहद ही रूपवती थीं और इन्हीं के गर्भ से प्राण स्वरूप वायु के अंश बजरंगबली का जन्म हुआ था. और हनुमान जी के अन्य भाइयों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है.

 

हनुमान जी भगवान श्री राम के भाई थे ?

रामचरित्र मानस में तो लिखा है कि, हनुमान जी भगवान श्री राम के भाई थे . इस कथा के अनुसार भगवान राम के पिता राजा दशरथ की तीन रानियां थीं, लेकिन संतान सुख के अभाव की वजह से दशरथ जी काफी दुखी रहते थे. और गुरु वशिष्ट की आज्ञा अनुसार दशरथ जी ने श्रृंग ऋषि को पुत्रेष्ठि यज्ञ करने के लिए आमंत्रित किया था. और जब उस यज्ञ की समाप्ति हुई, तो उस अग्निकुंड से दिव्य खीर से भरा हुआ सोने का पात्र हाथ में लिए, अग्नि देव स्वयं प्रकट हुए थे. और राजा दशरथ से उन्होंने कहा कि – “देवता आप पर काफी प्रसन्न हैं, इस दिव्य खीर को आप अपनी रानियों को खिला दें, इससे आपको चार दिव्य पुत्र प्राप्त होंगे.”

कहते है राजा दशरथ काफी शीघ्रता से अपने महल के अंदर गए, और उन्होंने खीर का आधा भाग महारानी कौशल्या को खिला दिया. और आधे में से आधा भाग सुमित्रा को दिया. और उसके बाद जो आधा बचा था वो अपनी रानी कैकई को दिया. कैकई को राजा दशरथ की ये बात अच्छी नहीं लगी और गुस्से में आकर उन्होंने दशरथ से काफी कठोर शब्द कहे. तब भगवान शंकर की प्रेरणा से एक चील वहां आ गई, और कैकई के हाथ से उसने प्रसाद उठाकर अंजना पर्वत पर तपस्या में लीन अंजनी देवी के हाथ में रख दिया. कहते हैं उसी प्रसाद को ग्रहण करने के कारण अंजनी गर्भवती हो गई.

धीरे-धीरे समय बीतता गया, और 9 महीने पूरे होने पर राजा दशरथ के घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ. वहीं दूसरी ओर अंजनी में भी हनुमान जी को जन्म दिया. एक हीं खीर से भगवान श्री राम और हनुमान का जन्म हुआ. इसलिए भगवान श्रीराम और हनुमान जी भाई माने जाते हैं.

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