सच्ची कहानी : बुढा न्यायाधीश स्पष्टवादी एवं निडर न्यायाधीश


सच्ची कहानी : बुढा न्यायाधीश स्पष्टवादी एवं निडर न्यायाधीश
सच्ची कहानी : बुढा न्यायाधीश स्पष्टवादी एवं निडर न्यायाधीश

Sachi Kahani – Enlightening and inspirational Hindi Story : रघुनाथ नामक एक राजा था. वह बहुत लालची था. उससे पहले गद्दी पर उसके बड़े भाई बैठे थे. पर उनकी मृत्यु के बाद चुकी उसका पुत्र बहुत छोटा होने के कारण राजकाज नहीं संभाल सकता था, अतः रघुनाथ ने गद्दी संभाल ली.

कई वर्ष तक राज करने के बाद उसके मन में लोभ आ गया. उसने मन में सोचा – जैसे ही मेरा भतीजा नारायण बड़ा होगा तो यह राज की मांग करेगा. तब मुझे गद्दी छोड़नी पड़ेगी. अतः क्यों ना नारायण को मरवा दूं. यह विचार करके, उसने अपने कुछ निकटतम व्यक्तियों को बुलवाया और नारायण की हत्या का आदेश दे दिया. उसने जल्लादों से कहा – इस बात का किसी को पता तक न चले.

जल्लाद चुपके से नारायण को लेकर चल पड़े. जंगल में जाकर उन्होंने नारायण को मारना चाहा. नारायण बहुत गिड़गिड़ाया, उसने कहा मैं जीवन भर राज नहीं लूंगा. पर जल्लाद ने उसे नहीं छोड़ा और तलवार से उसकी गर्दन काट दी. रघुनाथ प्रसन्न था. अब उससे कोई राज नहीं छिनेगा.

एक दिन वह सो रहा था. उसके स्वप्न में नारायण दिखाई दिया. वह कह रहा था – चाचा यह राज तुम्हारे साथ नहीं चलेगा. तुम मेरी आत्मा की तरह तड़पते रहोगे. तभी से रघुनाथ पर मृत्यु का भय सवार हो गया. उसे दिन रात चिंता लगी रहती थी की कहीं कोई मेरी हत्या कर के गद्दी न छिन ले. उसका मन किसी काम में नहीं लगता था. रात को भी इस चिंता के कारण उसे नींद नहीं आती.

धीरे-धीरे नारायण की हत्या की खबर लोगों में फैलने लगी. राजा के मंत्री ने कहा – महाराज आप अपने मन को राज कार्यों में लगाइए. यदि आप चाहें तो हम मैसूर राज्य पर चढ़ाई कर देते हैं. आप का मन भी बहल जाएगा और कुछ प्राप्त भी होगा.

वे ये बातें कर ही रहे थे कि एक सिपाही दरबार में आया और राजा से बोला महाराज आपको न्यायालय ने बुलाया गया है. यह न्यायाधीश का आदेश पत्र है. ऐसा कहते हुए उसने एक कागज़ राजा को सौंप दिया. रघुनाथ आवाक रह गया उसके अपराध का पता न्यायाधीश को कैसे लगा. अब तो वह और भी बेचैन हो गया.

उसने मंत्री को तुरंत मैसूर पर चढ़ाई करने का आदेश दिया. सेना तैयार होने लगी और शुभ मुहूर्त में चढ़ाई का विचार कर लिया. जाने से पहले रघुनाथ ने अपने सभी दरबारियों को एकत्र किया और कहा आप जानते ही हैं कि आज हम मैसूर पर आक्रमण करने जा रहे हैं. कब लौटकर आएंगे कुछ नहीं पता. पीछे से आप उत्तम तरीके से राज्य का प्रबंध करें. प्रभु से प्रार्थना करना की हम विजय हो. सभी दरबारी जय जयकार करने लगे.

तभी एक सादे कपड़ों वाला बुड्ढा ब्राह्मण चिल्लाया – हत्यारे रघुनाथ, तुमने अपने भतीजे की हत्या की है. अतः तुम कभी चैन से नहीं रह सकोगे. तुमने न्यायालय का भी अपमान किया है. इसलिए तुम कभी विजय नहीं हो सकते. दरबार में सन्नाटा छा गया. राजा के सामने बोलने वाले बुड्ढे न्यायाधीश को देख सभी हैरान रह गए.

पेशवा रघुनाथ क्रोध से उबल पड़ा. किस की हिम्मत है जो मुझ पर मुकदमा चलावे. मैं तुम्हें न्यायाधीश पद से हटाता हूं. खुद ही न्यायाधीश ने कहा तुम मुझे क्या हटाओगे, मैं स्वयं ही ऐसे पापी के राज में नहीं रहना चाहता. मैं न्यायाधीश हूं, राजा और प्रजा में कोई भेद नहीं समझता. न्यायाधीश के पास धार्मिक पुस्तकों के सिवाय कोई संपत्ति तो थी नहीं, अतः उन्हें उठाकर दरबार से निकल गए.

और सचमुच कुछ दिन बाद रघुनाथराव पेशवा का पतन हो गया. चलिए आपको बताएं यह स्पष्टवादी एवं निडर न्यायाधीश कौन था ? यह थे राम शास्त्री जो न्यायप्रियता के लिए विख्यात हुए.

Comments


log in

Don't have an account?
sign up

reset password

Back to
log in

sign up

Captcha!
Back to
log in