चंदन का प्याला


चंदन का प्याला
चंदन का प्याला

Hindi stories with moral : एक ऊंचे खंभे पर रत्नजटित चंदन का एक प्याला टंगा था. प्याले की सुंदरता सभी का मन मोह रही थी. इसके पास ही लिखा था, जो कोई साधक सिद्ध या योग्य बिना किसी सीढ़ी या सहारे के इस प्याला को उतारता है, प्याला उसे ही दे दिया जाएगा. यह भाग्यवान प्याला है, जिसके पास भी रहेगा उसके सभी कार्य पूर्ण हो जाएंगे.

जिसने इस प्याले को टांगा था उसी के कई आदमी इसकी रखवाली करते थे. प्याले को बिना सहारे इतने ऊंचे से कोई उतारता भी कैसे. एक दिन कश्यप नामक एक सन्यासी उधर से गुजरा. उसने प्याले की तरफ हाथ बढ़ा दिया प्याला अपने आप नीचे आ गया.

कश्यप उसे लेकर आश्रम में चला गया. लोक कश्यप की जय जयकार कर उठे. सर्वत्र इसी बात की चर्चा थी. कश्यप बहुत प्रसन्न था. धीरे-धीरे यह बात उसके गुरु तक पहुंच गयी. वे तुरंत अपने आसन से उठे और आश्रम में शिष्य के पास गए. लोग उनकी भी जय जयकार करने लगे. महाराज ! आप महान हैं. आप के शिष्य ने अद्भुत चमत्कार दिखाया है.

गुरु ने प्याला अपने हाथ में उठाया और वापस चले गए जहां वह टंगा था. जाकर उसे वैसा ही टांग दिया और कहने लगे मैं नहीं मानता इसने चमत्कार से उतारा है. मेरे सामने उतार कर दिखाएं. शिष्य मुस्कुराया और हाथ प्याले की ओर बढ़ा दिया लेकिन प्याला हिला भी नहीं. उसे आश्चर्य हुआ कि वही प्याला अब क्यों नहीं उतर रहा. पुनः कोशिश की, लेकिन सब प्रयास विफल गए. अंत में शिष्य लज्जित होकर आश्रम में चला गया.

गुरुजी ने लोगों को कहा इस प्याले को सीढ़ी लाकर उतार लो. सीढ़ी ला कर प्याला उतारा गया. गुरुजी ने प्याले को जमीन पर पटक कर टुकड़े टुकड़े कर दिए. लोग कुछ भी समझ नहीं पाए.

शाम को गुरुजी ने अपने सभी अनुयायियों को एकत्र किया और बोले – शिष्यों यह मोहन, वशीकरण अथवा चमत्कारपूर्ण कार्य तुम्हें नहीं करने चाहिए. यह तो जादूगर भी कर सकता है. तुम्हारा कार्य सदाचार से जीना और धार्मिक उपदेश देना है. तुम लोगों को यह ना दिखाओ कि हम महान हैं अपितु दूसरों को महान समझो. यदि तुम ऐसा नहीं करते तो तुम्हें धर्म का कुछ भी ज्ञान नहीं.

कश्यप से नहीं रहा क्या उसने कहा गुरुजी लोगों में मेरा अपमान हुआ है. वह मुस्कुराए, तुम्हारे मन में घमंड हो गया था कश्यप. इसलिए तुम प्याला नहीं उतार सके. क्योंकि घमंड ज्ञान का शत्रु है. तुम इस घमंड की बनावटी सीमा को तोड़ दो फिर तुम्हें मन के अंदर की शक्ति दिखाई देगी. घमंड मस्तिष्क का विकार है और जब तक हमारा शरीर विकारी होगा तब तक हम स्वयं को भी नहीं पहचान सकते. अतः इंद्रियों पर संयम ही वास्तविक ज्ञान का मार्ग है. कश्यप विनम्र हो चुका था. वह गुरु के चरणों में लेट गया. महात्मा बुद्ध ने इस बौद्ध भिक्षु के सिर पर स्नेह का हाथ फेरा और अष्ट मार्ग की शिक्षा दी.

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