दूसरे का दुख


दूसरे का दुख
दूसरे का दुख

Hindi stories with moral : यह दुर्ग बहुत अच्छा है.

हां हां चलो ऊपर तक देख कर आते हैं.

अरे, शाम हो रही है, जल्दी करो. कल फिर नहीं आ सकेंगे.

आज हम इस किले को पूरा ही देख लेंगे.

ये बातें हो रही थी कलकत्ते के एक कॉलेज के विद्यार्थियों में, जब वे फोर्ट विलियम देखने गए. किले की बनावट एवं सुंदरता पर सभी मंत्रमुग्ध थे.

10-15 लड़कों के इस समूह में एक बच्चा कुछ कमजोर सा था. बाकी विद्यार्थी तो भाग भाग कर दुर्ग देख रहे थे. पर वह बेचारा ठीक से चल नहीं पा रहा था. घर से तो संग-संग चला आया.

जब चलने में स्वयं को पूर्णतया असमर्थ पाया तो उसने अपने साथियों से कहा – भाइयों ! मेरे पेट में दर्द है. मैं आगे नहीं चल सकूंगा.

सभी बच्चों ने उसकी ओर कटु दृष्टि से देखा फिर एकत्र होकर उसका उपहास करने लगे. कोई उसके मरियल शरीर का मजाक उड़ाता तो कोई उसकी बीमारी को बहाना कह कर टालने लगा.

उनके मन में किले को देखने की उत्सुकता थी. उन्होंने कमजोर लड़के को वहीं सीढ़ियों पर लेटे रहने को कहा और यह कहते हुए आगे बढ़ गए कि तुम्हें वापस आते समय साथ ले लेंगे.

वह लड़का वहीं सीढ़ियों पर लेट गया. बच्चे किले को देख रहे थे कि अचानक उनमें से एक ने मन में सोचा हमें अपने साथी को यूं नहीं छोड़ना चाहिए था. किला तो कल भी यही रहेगा पर बेचारा साथी को कुछ हो गया तो उसके माता-पिता को अपार दुख होगा.

वह किला देखना छोड़ कर वापस सीढ़ियों की ओर चल पड़ा. वहां जाकर उसने देखा वह कमजोर बच्चा बेहोश पड़ा था. उसने भाग कर अपनी एक साथी को बुलाया और उसे तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया. अस्पताल में डॉक्टर ने पूरी तरह देखने के बाद कहा अगर कुछ देर और ना आते तो लड़का मर गया होता.

तब तक शेष बच्चे भी वहां पहुंच गए थे. वे सभी प्रायश्चित करने लगे. लड़के के माता पिता को भी बुला लिया गया. सभी उस सहायक लड़के को धन्यवाद देने लगे. पर लड़का चुपचाप एक कोने में खड़ा आंसू बहा रहा था.

जब उससे पूछा गया कि वह क्यों रो रहा है तो उसने उत्तर दिया – पहले तो मैं भी इसका मजाक उड़ा रहा था. अगर इसे कुछ हो गया होता तो शायद मैं अपने आप को क्षमा ना कर पाता. इसलिए मैं किला छोड़ कर वापिस आया था.

कमजोर बच्चे के माता-पिता ने उस बच्चे को चूम लिया.

आज संसार में उस कमजोर बच्चे के नाम को शायद ही कोई जानता हो पर उस सहायक बनने वाले लड़के को पूरा विश्व सम्मान देता है.

यह लड़का था नरेंद्र, जो आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के नाम से विख्यात हुआ.

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