लोभी माली की कथा – नीति कथाएं


लोभी माली की कथा - नीति कथाएं
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Hindi stories with moral : एक माली था, उसका नाम कृति कुशल था, वह विजय नगर में रहता था, माला बनाने में वह बड़ा ही चतुर था. लोगों को वह पूजा के लिए रोज रोज फूल देता था. नगर के रहने वाले लोग उसकी इस सेवा से काफी खुश रहते थे. उसे उसके बदले में बहुत धन देते थे.

वह माली लोभी था. लोग उसे खूब धन देते. इस पर भी उसे संतोष नहीं था और अधिक धन पाने के लोभ में वह राजा की सेवा करने लगा. वह राजा को प्रतिदिन सुंदर सुंदर मालाएं देने लगा.

राजा उससे बहुत खुश रहते उसे बहुत धन देते. बहुत धन बटोरने पर भी उसका लोभ नहीं मिटा. वह धन एकत्र करने के लिए बराबर कोशिश करता ही रहा. एक दिन उसने सोचा, धन लाभ नहीं होने से जो उदासीन हो जाता है उस पुरुष के धन में वृद्धि नहीं होती है. धन लाभ होने से जो संतुष्ट हो जाता है इस संसार में अत्यंत दान और सुख करता है. उसने फिर सोचा, मुझे अपना धन, कला, कृषि आदि व्यापार में लगा देना चाहिये. अधिक से अधिक धन पाने का यही उपाय हैं.

ऐसा सोचकर, उस ने एक ही साथ अनेक व्यापार करना आरंभ किए. राजा की सेवा भी वह करता रहा. उसे किसी पर विश्वास नहीं था. अतः वह सब व्यापार स्वयं करता. अनेक काम एक साथ हाथ में लेने से वह संकट में पड़ गया. वह बेचैन हो गया, उदास हो गया.

व्यापार में लगने पर उसका कृषि कार्य ठप होता, खेती में लग खेती में लगता तो इसका प्रभाव कला पर पड़ता, कला की और मन लगाता तो पशुपालन का काम गड़बड़ा जाता.

इस प्रकार इक्षा रहते हुए भी उस से कोई काम ठीक नहीं हो पाता. माली की हालत देखकर राजा बहुत क्रोधित हुआ, राजा ने उसे दंड दिया और उसकी सारी संपत्ति छीन ली. इसके बाद वह माली कंगाल हो गया. माली के माथे पर उसके परिवार के पालन की चिंता हुई. वह फिर से शक्ति बटोरकर, साहस से काम लेने लगा. वह साहसी तो था ही इसलिए, उसे बेकार बैठे रहना अच्छा नहीं लगा.

एक बार की बात है, वह माली कुछ फूल लेकर रात में एक दूसरे नगर में जा रहा था. उसी रास्ते में दो नदियां बहती थी. नदियों के बीच सात मटके बह रहे थे. उसे आश्चर्य हुआ, वह सोचने लगा कि यह आश्चर्य की ही तो बात है कि मटको में जीव नहीं है फिर भी वे जीवधारी की तरह एक नदी से दूसरी नदी में जा रहे हैं. मालूम पड़ता है कि यह धन से भड़े मटके हैं. ये देवताओं की कृपा से चालयमान है.

उसने मटको की पूजा की, हर रात वह माली मटकों की पूजा करने लगा. पूजा करते करते कुछ दिन बीत गए. मालिक की पूजा से वे मटके बड़े प्रसन्न हुए.

एक रात की बात है, वह माली रात में वहां गया. उसने प्रथम मटके की पूजा की, वह मटका बड़ा खुश हुआ. उसके भीतर से एक करुणामई आवाज निकली. अरे कंगाल – पीछे जो मटका आ रहा है उसमे सोना भरा है, उसमें से सोना निकाल लेना. इसी प्रकार 6 मटको ने उससे एक ही बात कही. अब 7 वें मटके के आने की बारी थी. वह भी माली के सामने आ गया. उसका ढक्कन खुला था.

उस मटके ने कहा – रे माली, यहां आ जाओ इसमें से 7 अंजुली सोना निकाल लो. माली ने उसमें से 7 अंजुलियाँ सोना निकाल लिया. उसने उसे फूल के थैले में रख लिया. माली को और लालच हुआ उसने आखिरी बार सोना निकालना चाहा, मटके का मुंह बंद हो गया.

अब वह मटका चलने लगा, माली के दोनों हाथ उसने फंस गए थे. माली ने हाथ निकालना चाहा किंतु बेकार. हाथ नहीं निकले, मालिक के दोनों हाथ जड़ के साथ उखड़ गए. वह नदी में गिर पड़ा. मालिक का देहांत हो गया.

अंत में लोभी माली की यही दशा हुई.

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