प्रखर बुद्धि : शिक्षाप्रद कहानी


प्रखर बुद्धि : शिक्षाप्रद कहानी
प्रखर बुद्धि : शिक्षाप्रद कहानी

Enlightening and inspirational Hindi Story :  बहुत दिनों की बात है सागरमाथा हिमालय के दक्षिण में एक छोटा सा गांव था. जिसमें प्रखर बुद्धि नामक एक व्यक्ति रहता था. एक दिन की बात है. वह जंगल में लकड़ियां तोड़ने गया. जब वह लकड़ियां तोड़ कर लौट रहा था तो उसे एक पेड़ के नीचे घायलावस्था में शेर लेटा हुआ नजर आया. वह शेर के निकट गया. शेर की पीठ पर एक तीर चुभा हुआ था. शेर दर्द से तड़प रहा था. किसी शिकारी ने उसे तीर मारा था. वह बच कर पेड़ के नीचे घायल होकर गिर पड़ा था.

प्रखर बुद्धि ने शेर की पीठ से तीर निकाल दिया और उसकी तीमारदारी की. थोड़ी देर में ही शेर होश में आ गया. प्रखर बुद्धि ने उसे अपने हाथों प्यार से थपथपाया. शेर एक अजनबी आदमी से स्नेह पाकर प्रसन्न हो गया. वह समझ गया कि इस आदमी से उसे कोई नुकसान नहीं होगा. प्रखर बुद्धि शेर को उठाकर गांव में ले आया. अपने घर में उसकी देखभाल करने लगा. कुछ ही दिनों में शेर पूर्णतया स्वस्थ हो गया.

वह प्रखर बुद्धि के घर का सदस्य बनकर रहता था. प्रखर बुद्धि भी उसे ठीक से रखते थे. लेकिन एक समस्या थी. शेर की खुराक बहुत ज्यादा थी. प्रखर बुद्धि के पास इतनी दौलत ना थी कि वह रोज शेर को मांस और नए नए शिकार लाकर खिला सके. अब तक शेर को खिलाते खिलाते उसने काफी संचित झोक डाली थी. यह तो उसका शेर के प्रति स्नेह था कि अब तक वह उसे पाले हुए था. वैसे उसकी इतनी हैसियत ना थी कि इतना खर्च कर सके .अंत में प्रखर बुद्धि ने निश्चय किया कि वह शेर को राजा के महल में छोड़ आएगा. राजा के महल में वह आराम से रहेगा.

सो एक दिन वह शेर के गले में रस्सी बांधकर ले जाने लगा, मगर शेर टस से मस न हुआ. वह समझ गया कि प्रखर बुद्धि उसे कहीं ले जा रहा है. पर वह उसका घर छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहता था. अब प्रखर बुद्धि क्या करें ? वह सोचने लगा. तभी एक उपाय उसके दिमाग में आया. वह तत्काल गांव से एक बकरी लाया, बकरी को देखकर शेर के मुंह में पानी आ गया. अब प्रखर बुद्धि बकरी को लेकर बाहर निकला. लालच में पीछे पीछे शेर भी निकला. आगे जाकर बकरी ठिठक गई. प्रखर बुद्धि ने उसे बहुत खींचा पर बकरी एक कदम भी आगे ना बढ़े.

यह देखकर प्रखर बुद्धि, पास से घास का गट्ठा उठा लाया. घास को देखकर बकरी की आंखों में लालच आ गया. अब प्रखर बुद्धि आगे आगे घास लेकर चलने लगा, घास की लालच से बकरी आगे बढ़ने लगी और बकरी को देखकर शेर भी आगे बढ़ने लगा. अब प्रखर बुद्धि बड़ी सुगमता से राजा के महल की ओर बढ़ने लगा. बढ़ते-बढ़ते रास्ते में नदी पड़ गई.

प्रखर बुद्धि के सामने यह समस्या आ गई कि नदी कैसे पार करें. नदी के तट पर उसने खोजपूर्ण दृष्टि डाली तो एक जगह उसे एक नाव नजर आया. लेकिन नाव बहुत टूटी-फूटी और छोटी थी. उस पर सब एक साथ बैठकर नदी पार नहीं कर सकते थे. हां, उन पर दो जने मिलकर जरूर जा सकते थे. यह देखकर प्रखर बुद्धि ने सोचा कि वह एक एक करके घास बकरी और शेर को उस पार ले जाएगा.

प्रखर बुद्धि सोचने लगा कि सबसे पहले वह अपने साथ किसे ले जाए. अगर, वह पहले घास ले जाता है तो पीछे से शेर बकरी को खा डालेगा. अगर, वह शेर को ले जाता है बाद में मौका पाकर बकरी घास को खा जाएगी. उसके दिमाग में यह भी आया कि क्यों न पहले बकरी को ले जाए. इस हालत में शेर घास पर मुंह भी नहीं मारेगा. लेकिन, समस्या यह थी कि बकरी के बाद जब वह किसी और को दूसरे किनारे ले जाता तो फिर वही हालत होगी. बकरी के बाद अगर घास ले जाता तो बकरी घास चट कर देगी. दूसरी हालत में अगर शेर ले जाता तो शेर बकरी का हाथ साफ कर देगा.

बेचारे प्रखर बुद्धि की सारी बुद्धि हवा में उड़ गई. उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें. शेर सचमुच उसके लिए मुसीबत बन गया था. वह सोच रहा था – किस कुघड़ी में वह शेर को उठा लाया.

प्रखर बुद्धि के पास में शेर और बकरी बैठे थे. घास का गट्ठा प्रखर बुद्धि ने नीचे रख दिया. शेर ललचाई नजर से बकरी को देख रहा था और बकरी भूखी नज़रों से घास को ताक रही थी. लेकिन प्रखर बुद्धि को उनकी लालच या भूख की चिंता न थी. वह तो किसी प्रकार शेर से छुटकारा पाना चाहता था और शेर से छुटकारा पाने का एक ही उपाय था कि उसे महल में छोड़ दिया जाए. प्रखर बुद्धि जानता था कि महल की ओर एक लालच में चल रहा है – वह है बकरी. अगर उसने बकरी यही खा ली तो फिर आगे नहीं बढ़ेगा.

सोचते सोचते शाम हो गई. उसने कई उपाय सोचें पर कोई भी उपाय उसे पसंद नहीं आया. लेकिन उसका नाम था प्रखर बुद्धि. आख़िर उसकी बुद्धि में एक उपाय आ ही गया. वह उपाय इतना सरल और सुगम था कि वह खुश हो गया. उसने सोचा यह उपाय पहले क्यों नहीं उसकी बुद्धि में आया. बेकार ने सारा दिन बर्बाद चला गया.

उसने सबसे पहले बकरी को नाव पर बिठाया और उस पार चल दिया. दूसरे किनारे बकरी को एक पेड़ से बांधकर वह वापस आ गया. इधर घास का गट्ठा और शेर उसी हालत में पड़े थे. उसने शेर को उठाया और नाव पर बिठाए. शेर बड़ा प्रसन्न हुआ. दूसरे किनारे पर बकरी थी. शेर सोच रहा था कि जब प्रखर बुद्धि तीसरे चक्कर में घास लेने आएगा तो वह मौका पाकर बकरी चट कर जाएगा. उसे भूख भी बड़े जोर से लग आयी थी.

दूसरे किनारे पहुंचकर प्रखर बुद्धि ने शेर को नाव से उतारा और जहां बकरी बंधी थी वहां ले आया. बकरी शेर को देखकर सहम गई. लेकिन प्रखर बुद्धि ने वहीँ पर शेर को बांध दिया और बकरी को लेकर वापस नाव पर बैठ गया. शेर बड़ा मायूस हुआ. पर उसकी उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई थी.

उधर बकरी के साथ प्रखर बुद्धि वापस लौटा. उसने बकरी को किनारे पर छोड़ दिया और घास का गट्ठा लेकर शेर के पास पहुंचा. अब रह गई सिर्फ बकरी. वह दोबारा पहले किनारे की और लौटा और बकरी को भी ले आया.

इस प्रकार अपनी बुद्धि से वह तीनों को सुरक्षित इस पार ले आए. अब वह निर्भय होकर राजा के महल की और चल पड़ा.

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