शस्त्रविज्ञ की कथा – नीति कथा


शस्त्रविज्ञ की कथा - नीति कथा

Enlightening and inspirational Hindi Story : एक राजधानी थी, उसका नाम था धारा. उस राजधानी में विवेक शर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था. उसके पुत्र का नाम निर्विवेक था. यथा नाम तथा गुण. संयोग से वह सच्चरित्र नहीं निकला.

उसे वेद शास्त्र के अध्ययन से कोई मतलब नहीं था. अतः उसे आचार-विचार का भी ज्ञान नहीं था. वह व्याधों की संगति में रहने लगा. शिकार खेलने का उसे शौक हो गया था.

एक बार की बात है. वह शिकार खेलने के लिए जंगल की ओर जाने लगा. उसकी मां ने उसे ऐसा करने से मना किया. मां के मना करने पर वह शिकार खेलने नहीं गया.

वह अपने आंगन में बैठा था. आंगन से ही एक मंदिर दिख रहा था. वहां कबूतर के बच्चे थे. कबूतर के बच्चों को देखकर उसने सोचा कि आज शिकार खेलने के लिए जंगल में नहीं जा सका. अच्छा मौका है. मंदिर के ऊपर चढ़ने से कबूतर के बच्चों को पकड़ा जा सकता है.

वह बिना सोचे-समझे मंदिर के ऊपर चढ़ गया. उसने विदर में हाथ डाला. उसमें एक काला विषधर सांप रहता था. वह उसके हाथ में लिपट गया.

ब्राह्मण कुमार अत्यंत भयभीत हो गया. वह घबरा उठा. उसके ऊपर नीचे मौत झांक रही थी. अगर वह सांप को छोड़ता तो वह बिना डसे नहीं रहता. भागने का कोई उपाय भी तो नहीं था. मंदिर के ऊपर से गिर जाने का डर अलग था.

कोई उपाय ना देख वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा – बचाओ बचाओ !

उसकी चिल्लाहट सुनकर वहां बहुत आदमी जुट गए. बात वहीं तक ना रही. राजा भोज तक भी यह बात पहुंच गई.

राजा भोज उस दुष्ट ब्राह्मण को बचाने के लिए वहां आ पहुंचा. एकत्र लोग उसे बचाने का उपाय सोच तो रहे थे, मगर उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

राजा भोज ने देखा कि वह ब्राह्मण कुमार ऊंचे मंदिर के ऊपर एक हाथ के सहारे खड़ा है. उसके सामने मौत नाच रही है.

ब्राह्मण कुमार की दशा देखकर राजा भोज को दया आ गई. राजा भोज ने घोषणा की कि उसे बचाने वाले को एक लाख स्वर्ण मुद्रा दी जाएगी.

राजा की घोषणा सबने सुनी. किसी में इतनी हिम्मत नहीं थी. कृति सिंह नामक एक राजपुत्र वहां उपस्थित था. वह धनुष विद्या में बड़ा कुशल था.

कृति सिंह आगे बढ़ा. उसने राजा से कहा, मैं इस ब्राह्मण कुमार को ऊपर से उतार लूंगा. उसने इतना भर कह दिया जाए कि जिस हाथ में सांप लिपटा है, उसे चुपचाप मुझे दिखाएं.

ब्राह्मण कुमार को सावधान कर दिया गया. कीर्ति सिंह ने धनुष पर बाण चढ़ाया. उसने इस कुशलता से बाण छोड़ा की सांप का शरीर टुकड़े टुकड़े होकर जमीन पर गिर पड़ा. ब्राह्मण कुमार के हाथ में जरा भी चोट नहीं आई.

वह मंदिर के ऊपर से खुशी-खुशी नीचे उतरा.

राजा भोज ने अपने वचन के अनुसार कीर्ति सिंह को एक लाख स्वर्ण मुद्रा और वस्त्र दिए. कृति सिंह काफी प्रसन्न हुआ.

विद्या की महिमा को देखिए. कृति सिंह ने ब्राह्मण की रक्षा की थी. अतः उसे एक लाख स्वर्ण मुद्रा मिली. राजा ने उसके भुजबल की पूजा की.

विद्या और बुद्धि से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है.

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