श्रीमद्भागवत गीता से जुड़े इन रोचक तथ्यों के बारे में नहीं जानते होंगे आप !


श्रीमद्भागवत गीता से इन जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में नहीं जानते होंगे आप !
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हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता में जीवन का पूरा सार मिलता है. आज हम आपको श्रीमद्भागवत गीता से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां दे रहे हैं, जो आपके संपूर्ण जीवन में महत्वपूर्ण योगदान निभाने का काम करेंगे.

Srimad bhagavad gita se jude rochak tathya ke baare me nahi jaante honge aap

आइए जानते हैं विस्तार पूर्वक श्रीमद्भागवत गीता के कुछ रोचक तथ्य : 

महाभारत के शब्दों का महत्वपूर्ण संग्रह है श्रीमद भगवत गीता. कहीं और ऐसा देखने को आपको नहीं मिलेगा.

विश्वभर में हर व्यक्ति इस बात को मानता है कि श्रीमद्भागवत गीता हिंदुओं के लिए सबसे अहम ग्रंथ है. और हमारी पीढ़ियों की महानता इस पावन ग्रंथ में दर्ज है.

ये ग्रंथ भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों की पूरी श्रृंखला है. जीवन के अर्थ को इस ग्रंथ में विस्तारपूर्वक बहुत हीं खूबसूरती से समझाया गया है.

आम शब्दों में अगर कहें तो पांडु पुत्र अर्जुन और उनके सारथी बने भगवान कृष्ण के बीच हुए संवाद इस ग्रंथ में हैं. जिसमें जीवन के अर्थ को बखूबी बताया गया है. इस ग्रंथ में उल्लेखों के विषय में भी बताया गया है, जिसके बारे में आपने कभी समझने की कोशिश भी शायद नहीं की होगी.

महाभारत में इस बात की पुष्टि की गई है कि भगवान श्री कृष्ण 3137 ईसापूर्व धरती पर थे. और 35 साल चली महाभारत की इस लड़ाई के बाद कलयुग शुरू हुआ था.

महाभारत में कई बार 18 अंक का प्रयोग हुआ है. दरअसल इस अंक का शाब्दिक अर्थ बलिदान से है. 18 त्योहार, 18 अंक का महाभारत में बहुत हीं ज्यादा महत्व है. गीता में भी 18 अध्याय होते हैं.

अलबर्ट आइंस्टाइन की जब मृत्यु होने वाली थी, तो कुछ दिनों पहले से उन्होंने भगवत गीता पढ़ना शुरू किया था. अलबर्ट आइंस्टाइन कहते थे कि अपने प्रारंभिक जीवन से हीं उन्हें भगवत गीता पढ़नी चाहिए थी. इस बात का उन्हें जिंदगी भर मलाल होगा.

इस बात को आप नहीं जानते होंगे, कि सिर्फ अर्जुन ने हीं नहीं, बल्कि बरबरीक, हनुमान और संजय ने भी भगवान श्रीकृष्ण से गीता का उपदेश सुना था.

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मूल रूप से भगवत गीता संस्कृत में लिखा गया है. लेकिन आगे चलकर इस महान ग्रंथ को अब तक 175 भाषाओं में अनुवादित किया गया है. क्योंकि भगवत गीता को पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है.

आमतौर पर फिल्मों में आप देखते होंगे कि कोर्ट की प्रक्रिया के दौरान गीता की कसम खिलाई जाती है. लेकिन असल जिंदगी में ऐसा कुछ भी नहीं होता है. कोर्ट में ना तो गीता की कसम खिलाई जाती है, और ना हीं किसी अन्य ग्रंथ की. ये सारी बातें 170 साल पहले हीं खत्म हो चुकी है. लेकिन फिल्मों में ये सिलसिला आज भी जारी है. ये सारी बातें अंग्रेजो के द्वारा कराया जाता था. क्योंकि उनका मानना था कि हिंदू अपने धर्म के प्रति बहुत हीं ज्यादा भावुक होते हैं. इसलिए उन्हें कसम खिलाकर सच्चाई स्वीकार करवाया जा सकता है.

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