सुहागरात को लेकर पुरुषों में चिंता, अज्ञानता भय एवं संकोच


सुहागरात को लेकर पुरुषों में चिंता, अज्ञानता भय एवं संकोच

सुहागरात को लेकर पुरुषों में चिंता, भय, अज्ञानता और संकोच. विवाह के दिन नजदीक आते ही कुछ युवा स्त्री पुरुष परेशान होने लगते हैं. बहुत से पुरुष तो अपने मन में यह सोचते हैं कि सुहागरात को मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट कर पाऊंगा या नहीं. मैं अपनी पत्नी को अच्छा लगूंगा या नहीं. क्या वह मुझे पूरी तरह से अपना पाएगी या नहीं.

फिर यह भी सोचकर परेशान होते हैं कि यदि मैं सुहागरात को अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाता तो उसे जिंदगी भर पत्नी के ताने सुनने पर सकते हैं. यदि इस रात (सुहागरात) को मेरे लिंग में उत्थान नहीं आया या मैं जल्दी स्खलित हो गया तो पत्नी से सिर उठाकर बात नहीं कर पाऊंगा. वह यह भी सोच-सोचकर भयभीत रहता है कि यदि पत्नी इस कारण से मुझे छोड़कर चली गई तो मैं घर वालों तथा समाज के सामने क्या मुंह दिखाऊंगा.

इस प्रकार के लक्षण सिर्फ अनपढ़ लोगों में ही नहीं बल्कि पढ़े लिखे पुरुषों में भी दिखाई देते हैं. इस रात को लेकर केवल परेशान ही नहीं रहते बल्कि इस तरीके से वह भयभीत भी रहते है.

सुहागरात से पहले पुरुषों के मन में भी कई प्रकार की बातें चलती रहती है. लेकिन उसके मन में स्त्री की अपेक्षा कुछ कम संकोच तथा भावनाएं होती है क्योंकि उसके लिए सभी परिवार वाले जाने पहचाने होते हैं जबकि स्त्री सभी से अनजान होती है.

बहुत से पुरुष तो यह भी सोचते हैं कि हमारे द्वारा की गई सेक्स क्रिया से हमें शारीरिक संतुष्टि तो हो जाती है इसलिए स्त्री को भी अवश्य ही संतुष्टि मिल जाती होगी. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि इस प्रकार के विचार बिल्कुल गलत होते हैं क्योंकि बहुत से पुरुष सेक्स के मामले में अज्ञानी होते हैं. जिसका परिणाम यह होता है कि वह सुहागरात को अपनी पत्नी को संभोग करने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं कर पाते हैं.

जब स्त्री में स्वयं को आनंद देने वाला उन्माद नहीं उत्पन्न होता तब तक वह सेक्स के लिए तैयार नहीं हो सकती. उसने सेक्स उत्तेजना जगाने के लिए पुरुष फॉर प्ले की क्रिया उसके साथ कर सकता है. बहुत से पुरुष तो यह सोचते हैं कि यदि स्त्री सेक्स की दृष्टि से ठंडी तथा स्वभाव से ही उत्शाहीन है अथवा उसमें पुरुष के प्रति प्रेम का अभाव है तो उसमें उत्तेजना उत्पन्न नहीं हो सकती.

कुछ लोग तो यह भी कल्पना कर लेते हैं कि विवाह से पहले इसका किसी के साथ संबंध बन चुका है तभी यह मुझसे संभोग क्रिया ठीक से नहीं कर पा रही है. ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है क्योंकि जब आप उन्हें ठीक प्रकार से सेक्स करने के लिए तैयार नहीं कर पा रहे हैं तो उसमें उनका क्या दोष.

बहुत से पुरष अपनी सेक्स अज्ञानता के कारण से सुहागरात में जब वह बलपूर्वक वैवाहिक अधिकार प्राप्त करना चाहता है तो स्त्री उसके व्यवहार से मन ही मन दुखी हो जाती है और संभोग करते हुए भी संभोग का वास्तविक आनंद नहीं उठा पाती.

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