विवेक का महत्व


विवेक का महत्व
विवेक का महत्व

Bodh Kahani – Hindi story with moral : एक आदमी था. उसके पास एक अशर्फी थी. उसे अचानक रुपयों की आवश्यकता पड़ी. उसने सोचा क्यों ना इस अशर्फी को बेचकर रुपए ले लूं.

वह अशर्फी लेकर बाजार में गया. उसने वह अशर्फी एक बनिया को दिखाई. अशर्फी असली सोने की थी. बनिया ने यह जानना चाहा कि इस आदमी को अशर्फी की पहचान है या नहीं.

उसने उस आदमी से पूछा – यार ! तुम्हें कहां मिली.

भाई, यह तो मुझे मेरे पिता ने दी थी.

तभी तो मैं सोच रहा था कि बात क्या है ?

क्यों क्या बात है ? उस आदमी ने पूछा.

इस में मिलावट है. असली सोने की नहीं है.

फिर भी इसकी कीमत कितनी होगी.

यही कोई ₹50.

बस !

तो 75 ले लो.

उस आदमी ने सोचा, यह अगर असली नहीं है तो बनिया 50 से 75 पर कैसे पहुंच गया.

उसे कुछ सोचता हुआ देखकर, बनिया बोला – चलो सौ रुपए दे दो.

नहीं, सौ तो बहुत कम है.

तो सवा सौ दे दूं.

नहीं, अब मैं इसे कहीं और बेचूंगा. इतना कहकर, वह आदमी चल दिया.

बनिया बोला, देखो मैं सवा सौ रुपए से ज्यादा नहीं दे सकता. लेकिन इतना जरूर बता सकता हूं कि इसकी कीमत ढाई सौ रुपए है. इससे कम में मत बेचना.

वह आदमी उस बनिया के बहकावे में आ गया. वह बाजार में जहां भी गया, उस अशर्फी को ढाई सौ रुपए से कम में बेचने के लिए तैयार ना हुआ. वह कहता, सेठ जी ! यह अशर्फी ढाई सौ रुपए में लोगे. सेठ को शक हो जाता. जरूर इसमें कोई बात है और मना कर देता. वह फिर उस बनिया की दुकान की ओर चला. तभी उसका एक पुराना मित्र मिल गया. बातों-बातों में उसने अशर्फी वाली बात कही.

जो व्यक्ति अपना विवेक छोड़कर किसी के बहकावे में आ जाता है वह अवश्य धोखा खाता है. यह बात तुम सदा के लिए याद रखना. वह मित्र उसे एक शरीफ की दुकान पर ले गया. शरीफ अशर्फी को देखते हुए वह बोला, इसकी कीमत मैं ₹500 दे सकता हूं.

ठीक है दे दो. उस आदमी ने कहा. फिर उसने मित्र की तरफ देखा. जैसे कह रहा हो. तुमने ठीक कहा था, अपना विवेक खो कर बहकावे में आने से सदा हानि होती है.

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