अश्वसेन नाग कौन था, क्यों वह कर्ण का साथ लेकर अर्जुन को मारना चाहता था ?


अश्वसेन नाग कौन था, क्यों वह कर्ण का साथ लेकर अर्जुन को मारना चाहता था ?
अश्वसेन नाग कौन था, क्यों वह कर्ण का साथ लेकर अर्जुन को मारना चाहता था ?
दोस्तों आज हम अपने इस आर्टिकल में, उस कहानी का बात करने वाले हैं जिसमें अर्जुन और कर्ण के युद्ध के समय उनके बीच में अश्वसेन नामक नाग गया था. जिसने एक बाण के रूप में कर्ण के धनुष से छूट कर अर्जुन पर आक्रमण किया था. यदि उस समय भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को नहीं बचाया होता तो उस महाभारत युद्ध का परिणाम कुछ और ही होता है.

दोस्तों अश्वसेन नाम का नाग कौन था और क्यों वह कर्ण का साथ लेकर अर्जुन को मारना चाहता था. जानते है इस कहानी के बारे में.

दोस्तों, एक पौराणिक कहानी के अनुसार, अग्निदेव जब खांडव वन को जला रहे थे तब देवराज इंद्र उन्हें वह वन जलाने नहीं दे रहे थे. उस समय अर्जुन और भगवान श्री कृष्ण ने अग्नि देव की मदद करने के लिए देवराज इन्द्र के साथ युद्ध करके उनको रोका था और तब अग्निदेव उस खांडव वन को पूरी तरह जला पाए थे. उस खांडव वन में देवराज इंद्र का मित्र तक्षक नाग का परिवार के रहता था.

दोस्तों, जिस समय अग्निदेव खांडव वन को अपनी अग्नि से भस्म कर रहे थे, उस समय तक्षक नाग उस खांडव वन में नहीं था. परंतु उसकी पत्नी और पुत्र अश्वसेन उस वन की आग में फस गए थे. उस समय तक्षक नाग की पत्नी अपने पुत्र को निगल लिया था और आकाश में उड़ चली थी. तब अर्जुन ने तक्षक की पत्नी को अपने बाण का निशाना बना लिया था, जिससे तक्षक की पत्नी मर गई थी परंतु उसका पुत्र अश्वसेन जीवित बच गया था.

दोस्तों, अश्वसेन को यह बात मालूम थी कि उसकी मां को अर्जुन ने मारा है. इसलिए वह हमेशा अर्जुन से बदला लेने के बारे में सोचता रहता था. महाभारत के 17वे दिन जब अश्वसेन को यह पता चला कि आज अर्जुन और कर्ण का युद्ध होने वाला है, तो वह कुरुक्षेत्र में आ गया और एक बाण का रूप बनाकर कर्ण के तरकस में घुस गया.

कर्ण युद्ध करते समय अपने तरकस से बाण निकालकर अपने धनुष पर चढ़ाता था और अर्जुन पर छोड़ता था. इसी बीच बाण बना अश्वसेन नाग कर्ण के हाथ में आ गया और उसने उसे अपने धनुष पर चढ़ा कर अर्जुन पर छोड़ दिया.

दोस्तों, जब कर्ण ने उस अश्वसेन नाग को बाण के रूप में अर्जुन पर छोड़ा तो भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर यह कोई नहीं जान पाया था कि वह बाण नहीं, एक नाग है. उस समय भगवान श्रीकृष्ण को अर्जुन की मृत्यु अपने सामने दिखाई पड़ी. तब उन्होंने अर्जुन को बचाने के लिए अपने पैर से रथ को दबा दिया था. भगवान श्री कृष्ण के ऐसा करने से रथ के पहिए जमीन में धंस गए थे और साथ ही रथ के घोड़े भी झुक गए थे. तब वह बाण रूपी अश्वसेन अर्जुन की जगह अर्जुन के सर के मुकुट पर जा लगा था. जिससे वह मुकुट सर्प अग्नि से जलता हुआ जमीन पर जा गिरा था.

अपना वार खाली जाता देख उस अश्वसेन नाग ने फिर से कर्ण के तरकश में बाण बनकर घुसने की कोशिश की, परंतु कर्ण ने उसे देख लिया और उससे पूछा कि तुम कौन हो ? और मेरे तरकस में क्यों घुस रहे हो ? तब अश्वसेन ने कर्ण को पूरी बात बताकर उससे कहा कि मुझे एक बार फिर से अपने धनुष पर चढ़ा दो, इस बार मैं तुम्हारे शत्रु अर्जुन को जीवित नहीं छोडूंगा.

तब कर्ण ने उस नाग से कहा कि मैं अर्जुन को अपने बल से मारूंगा, उसके लिए मैं किसी दूसरे के बल का आश्रय नहीं ले सकता हूं. इसलिए तुम चले जाओ यहां से.

दोस्तों, अश्वसेन से कर्ण की यह बात सही नहीं गई. तो उसने अपना भयंकर रुप धारण कर खुद ही अर्जुन को मारने के लिए दौड़ पड़ा. परंतु तब गांडीव धारी अर्जुन ने अपने बाणों से उस नाग के 6 टुकड़े करके उसे यमलोक भेज दिया था.


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