इंसान की यह 6 बुरी आदतें जिनके कारण छिन जाता है धन सुख और शांति


इंसान की यह 6 बुरी आदतें जिनके कारण छिन जाता है धन सुख और शांति
इंसान की यह 6 बुरी आदतें जिनके कारण छिन जाता है धन सुख और शांति

हजारों साल पहले भगवत गीता में ही बता दिया गया था कि इंसान की बुरी आदतों के कारण अपने जीवन को नर्क बना लेता है और अपने जीवन में सुख शांति को भी समाप्त कर लेता है. रामायण से लेकर गीता और महाभारत तक सभी में बताया गया है कि मनुष्य के अंदर अगर यह 6 बुरी आदतें हैं तो उसका विनाश तय है. यह 6 बुरी आदतें ऐसी है जो न सिर्फ आपको आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आपके पारिवारिक जीवन और सुख शांति का नाश कर डालते है. दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे इंसान की यह 6 बुरी आदतें जिनके कारण छिन जाता है धन सुख और शांति  के बारे में. तो चलिए देखते है वह 6 बुरी आदतें जिन्हें अपनाकर मनुष्य खुद ही अपने सर्वनाश को आमंत्रण देता है. आज हम आपको उन 6 अवगुन बता रहे हैं हो सके तो आप इनसे दूर ही रहे. वह 6 आदत कौन-कौन सी है ?

 

काम और वासना

किसी भी व्यक्ति के धन और सुख का नाश करने वाला सबसे पहला कारण काम को बताया गया है. काम भाव से पीड़ित व्यक्ति अपने धन का नाश करता है. कामी व्यक्ति अपने परिवार की सुख शांति का नाश कर बैठता है.
पुराणों में इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. देवराज इंद्र भी कई बार काम भाव के कारण अपनी सत्ता गवा चुके हैं. रावण और दुर्योधन के विनाश की एक वजह यह भी थी.

 

क्रोध

क्रोध को दूसरा कारण माना गया है जो व्यक्ति का सब कुछ छीन लेता है. शास्त्रों में बताया गया है कि प्रस्थिति जब गंभीर हो उस समय क्रोध को अपने पर बिल्कुल भी हावी नहीं होने देना चाहिए .विपत्ति में जो लोग संयम खो देते हैं और क्रोध करते हैं उनका अक्सर नाश हो जाता है. इसका कारण यह है कि क्रोध मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है, जिससे उचित अनुचित का विचार नहीं रहता और मनुष्य का अपना ही नुकसान कर बैठता है.
शास्त्रों में क्रोध को असुरों का गुण कहा गया है और इसी कारण असुर हमेशा देवताओं से हारे हैं.

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अहंकार

अहंकार को विनाश का तीसरा कारण माना गया है. पुराणों में कई उदाहरण मौजूद है जो बताते हैं की अहंकार के कारण व्यक्ति अपना सब कुछ समाप्त कर लेता है. रावण, हिरणाकश्यप, कंस दुर्योधन, जरासंध और बाली सभी अपने अहंकार के कारण अपना सब कुछ लुटा बैठे.

 

मोह

मनुष्य को विनाश की ओर ले जाने वाला चौथा कारण है मोह. जब कभी भी किसी चीज से व्यक्ति बहुत अधिक मोह करने लगता है तो उसके लिए गलत सही का विचार समाप्त हो जाता है. और व्यक्ति अपनी मर्यादा से भटक जाता है और फिर विनाश की ओर जाने लगता है.
ध्रितराष्ट्र ने अपने पुत्र से मोह किया परिणाम द्रोपदी का चीर हरण हुआ. महाभारत का महा विनाश हुआ. राजा भरत ने हिरन से मोह किया तो अगले जन्म में खुद ही हिरन बने.

 

लोभ और लालच

इंसान को विनाश तक पहुंचाने वाला पांचवी आदत है लोभ और लालच. लोभ-लालच पाचवा कारण है जो मनुष्य को विनाश की ओर ले जाता है. लोभ मनुष्य से वह छीन ले जाता है जो उसके पास होता है. इसलिए शास्त्र कहता है संतोषम परम सुखम, यानी संतोष ही सबसे बड़ा सुख है. जो व्यक्ति दूसरों की संपत्ति को पाने की लालच करता है उसका सब कुछ नष्ट हो जाता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत है. कौरवो ने पांडवों के धन का लोभ किया परिणाम यह हुआ कि उन्हें अपने धन और जन दोनों का नुकसान हुआ.

 

जलन और ईर्ष्या

छठी आदत है जलन होना या ईर्ष्या करना. बहुत से लोगों में आदत होती है कि किसी की खुशी और उन्नति से उनके मन में द्वेष उत्पन्न होने लगता है. आम भाषा में कहें तो मन में जलन होने लगता है. यह आदत भी मनुष्य को नाश की ओर ले जाती है. जलन की भावना दूसरों का नहीं बल्कि खुद का ही नाश कर देती है.
कर्ण महान योद्धा थे लेकिन उनके मन में अर्जुन के प्रति द्वेष की भावना थी. इस भावना ने कर्ण को खलनायक की श्रेणी में ला दिया और अर्जुन के हाथों ही दानवीर कर्ण मृत्यु के मुंह में पहुंच गए.

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ahankar, krodh, moh, lobh, lalach, kaam aur vashna | inshan ki yeh 6 buri aadtein jinke karan chin jaata hai dhan shukh aur shanti


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