कैसे चुंबक यानि मैगनेट ने इतिहास बदल दिया ?


कैसे चुंबक यानि मैगनेट ने इतिहास बदल दिया ?
कैसे चुंबक यानि मैगनेट ने इतिहास बदल दिया ?

 

कैसे चुंबक यानि मैगनेट ने इतिहास बदल दिया ? चलिए दोस्तों जानते है क्यों और कैसे एक चुम्बक यानि मैगनेट ने सारा इतिहास ही बदल कर रख दिया. आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व मैगनस नाम का एक चरवाहा तुर्की के किसी गांव में रहता था. एक दिन गांव के निकट वह अपनी भेड़ो को चरा रहा था. भेड़ों को हांकने के लिए उसने अपने हाथ में जो छड़ी ले रखी थी उसके सिरे पर लोहे की टोपी चढ़ी हुई थी. उसने वह छड़ी एक चट्टान पर टिका दी पर जब उसने भेड़ों को हांकने के लिए उसे उठाना चाहा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ. छड़ी की लोहे की टोपी चट्टान के साथ चिपक गई थी. उस चट्टान में एक ऐसा “रहश्यमय बल” मौजूद था जिस ने लोहे की टोपी को अपनी ओर आकर्षित कर लिया था.

 

मैगनस उस चट्टान का पता लगाने वाला पहला व्यक्ति था. इसलिए वह चट्टान मैगनेट नाम से प्रसिद्ध हुई. चुंबक को आज भी अंग्रेजी में मैगनेट ही कहा जाता है. बाद में लोगों को ऐसी अनेक चट्टाने मिली जो लोहे की वस्तुओं को आकर्षित करती थी. यह प्राकृतिक चुंबक थी.

पर कुछ लोगों का विचार है कि मैगनेट नामकरण यूनान के मैग्नेशिया जिले के नाम पर, जहां इस प्रकार की चट्टानों का पता सबसे पहले चला था, हुआ था.

इसी प्रकार कहा जाता है कि एक समय चीन में होअंगति होअंगति नाम का एक राजा था, जो एक बार अपनी सेना समेत घने कोहरे में फंस गया. उस समय वह अपने एक जानी दुश्मन का, जो उसका राज्य हड़प लेना चाहता था, पीछा कर रहा था. उस समय कोहरा इतना घना था कि किसी को भी रास्ता नहीं दिख रहा था. इससे सब परेशान थे, पर होअंगति को अपनी मूर्ति पर अटूट विश्वास था कि वह उन सबको रास्ता अवश्य दिखा देगी. लोहे की बनी वह मूर्ति एक स्त्री की थी और वह उसके रथ में खड़ी थी. वह चारों ओर घूम सकती थी, पर उसका एक हाथ हमेशा उत्तर दिशा की ओर इशारा करता रहता था. उसकी मदद से होअंगति और उसकी सेना कोहरे में से बाहर निकल आए. निश्चय ही उस मूर्ति में चुंबक रही होगी. इतिहासकार यह बताते हैं कि चीन के निवासियों को आज से हजारों वर्ष पहले ही चुंबक के गुणों के बारे में जानकारी हो गई थी और चीनी यात्री अपने साथ चुंबक रखते थे. इसकी मदद से वे कहीं भी घने जंगलों और सैकड़ों हजारों किलोमीटर दूर तक फैले सागरों में खो जाने के बाद भी अपना मार्ग खोज लेते थे.

 

धीरे-धीरे चुंबक के गुण मुक्त रूप से लटका दिए जाने पर उसका एक सिरा उत्तर दिशा की ओर होता है और दूसरा दक्षिण दिशा की ओर का ज्ञान अन्य देशों के निवासियों को भी हो गया. इस जानकारी का कदाचित सबसे अधिक लाभ यूरोपीय देशों के लोगों ने उठाया. चुंबक की मदद से वह समुंद्री यात्राओं के दौरान की अपनी सही दिशा खोज लेते थे.

इसलिए उन्होंने 15 वीं शताब्दी में लंबी लंबी समुंद्री यात्राएं आरंभ कर दी और वे हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों में पहुंचने लगे इस प्रकार वे एशिया अफ्रीका तथा उत्तर और दक्षिण अमेरिका के देशों में पहुंच गए. वहां के निवासियों को छल कपट से हराकर उनके राज्य हड़प लिए. इस प्रकार चुंबक ने मनुष्य जाति के एक बहुत बड़े भाग का इतिहास ही बदल दिया.

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