क्या आप जानते हैं भगवान शिव की बहन के बारे में


क्या आप जानते हैं भगवान शिव की बहन के बारे में
क्या आप जानते हैं भगवान शिव की बहन के बारे में

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे शिवपुराण से जुड़ी एक रहस्यमई कथा भगवान शिव की बहन की कथा. भगवान शिव की पत्नी और बच्चों के बारे में तो आप सभी जानते हैं. लेकिन क्या आप को यह पता है कि भगवान शिव की एक बहिन भी है. एक पौराणिक कथा के अनुसार जब माता पार्वती ने भगवान शिव से विवाह किया उसके तदुपरांत वह खुद को घर में अकेला महसूस करती थी. उनकी इच्छा थी कि काश उन की भी एक ननद होती. जिससे उनका मन लगा रहता है.

लेकिन भगवान शिव जी तो अजन्मे थे, भगवान शिव तो अंतर्यामी थे. उन्होंने देवी पार्वती के मन की बात जान ली. उन्होंने पार्वती से पूछा कोई समस्या है देवी. तब देवी पार्वती ने कहा कि काश उनकी भी कोई ननद होती. भगवान शिव ने कहा मैं तुम्हें तो ननद ला कर दे दूं, लेकिन क्या ननद की आपके साथ आपकी बनेगी. पार्वती जी ने कहा भगवन ननद से मेरी क्यों नहीं बनेगी. भगवान शिव ने कहा ठीक है देवी मैं तुम्हें एक ननद ला कर देता हूं. भगवान शिव ने अपनी माया से एक देवी उत्पन्न कर दिया. भगवान शिव ने कहा यह लो तुम्हारी ननद आ गई. इसका नाम असावरी देवी है.

देवी पार्वती अपनी ननद को देख कर बड़ी खुशी हुई. असावरी देवी स्नान करके आई और भोजन मांगने लगी. देवी पार्वती ने भोजन परोस दिया. जब असावरी देवी ने कहना शुरू किया तो पार्वती के भंडार में जो कुछ भी था, वह सब खा गई और महादेव के लिए कुछ भी नहीं बचा. इस बात से पार्वती दुखी हो गई. इसके बाद जब देवी पार्वती ने ननद को पहनने के लिए नए वस्त्र दिए तो मोटी असावरी देवी के लिए वह बस्तर छोटी पड़ गए. पार्वती उनके लिए दूसरा बस्तर का इंतजाम करने लगी. इस बीच ननद रानी को अचानक मजाक सुझा और उन्होंने अपने पैरों की दरारों में अपनी भाभी जी यानि पार्वती जी को छुपा लिया. पार्वती जी का वहां दम घुटने लगा. महादेव ने जब असावरी देवी से पार्वती के बारे में पूछा तो असावी देवी ने झूठ बोला. जब शिव जी ने कहा कि कहीं यह तुम्हारी बदमाशी तो नहीं तो असावरी देवी हंसने लगी और जमीन पर पौ पटक दिया इससे पैर की पैर की दरारों में दबी देवी पार्वती बाहर आ गिरी. उधर ननद के व्यवहार से देवी पार्वती का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. देवी पार्वती ने भगवान शिव से कहा कृपया कर के ननद को जल्दी ससुराल भेजने की कृपा करें मुझसे बड़ी भूल हुई मैंने ननद की चाह कि. इस पर भगवान शिव ने आशावरी देवी को कैलाश से विदा कर दिया.

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kya aap jaante hai ki bhgwan shiv yani mahadev ki ek behan bhi hai


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