जानिए भगवान श्री कृष्ण की 8 पत्नियों और 80 पुत्रों के नाम


जानिए भगवान श्री कृष्ण की 8 पत्नियों और 80 पुत्रों के नाम
जानिए भगवान श्री कृष्ण की 8 पत्नियों और 80 पुत्रों के नाम

 

जानिए भगवान श्री कृष्ण की 8 पत्नियों और 80 पुत्रों के नाम : कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं. क्या यह सही है? जानते हैं कि श्री कृष्ण की 16,108 पत्नियां होने की सच्चाई क्या है. महाभारत के अनुसार, विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणी भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करती थी तथा उनसे विवाह करना चाहती थी. रुक्मणी के पांच भाई थे- रुक्मरथ, रुक्मबाहु, रुक्म, रुक्मकेस तथा रुक्ममाली. रुक्मणी सर्वगुण संपन्न तथा अति सुन्दरी थी. उसके माता-पिता उसका विवाह श्री कृष्ण के साथ करना चाहते थे किंतु एक भाई रुक्म चाहता था कि रुक्मणी का विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ हो. यह कारण था कि भगवन श्री कृष्ण को रुक्मणी का हरण कर उनसे विवाह करना पड़ा.

Jaaniye Bhagwan Sri Krishn ki 8 Patniyo Aur 80 Putro Ke Naam

पांडवों के लाक्षागृह से सफलतापुर्वक बच निकलने पर सात्यिकी आदि यदुवंशियों को साथ लेकर कृष्ण पांडवों से मिलने के लिए इंद्रप्रस्थ गए. पांडवो ने उनका आतिथ्‍य सत्कार और पूजन किया. इस प्रवास के दौरान एक दिन अर्जुन को साथ लेकर भगवान श्री कृष्ण वन विहार के लिए निकले. जिस वन में वे विहार कर रहे थे वहां पर सूर्य पुत्री कालिंदी, भगवान कृष्ण को पति रूप में प्राप्ति की कामना से तप कर रही थी. कालिंदी की तप से प्रसन्न और मनोकामना पूर्ण करने के लिए श्री कृष्ण ने उसके साथ विवाह कर लिया.

फिर वे एक दिन उज्जयिनी की राजकुमारी मित्रबिंदा को स्वयंवर से वर लाए. उसके बाद कौशल के राजा नग्नजित के सात बैलों को एक साथ नाथ कर उनकी कन्या सत्या से पाणिग्रहण किया. तत्पश्चात उनका विवाह कैकेय की राजकुमारी भद्रा से हुआ. भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा भी कृष्ण से प्रेम करती थी, लेकिन उनके माता-पिता श्री कृष्ण से विवाह के लिए राजी नहीं थे तब लक्ष्मणा को श्री कृष्ण अकेले ही हरकर ले आए. इस तरह भगवान श्री कृष्ण की आठ पत्नियां थी : रुक्मणी, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रबिंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा.

द्वारिका नगरी में अपनी आठों पत्नियों के साथ भगवान श्री कृष्ण अच्छे से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे. इसी दौरान एक दिन देवराज इंद्र ने आकर उनसे प्रार्थना की, ‘हे द्वारकाधीश श्री कृष्ण! प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवलोक के सभी देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं. दैत्य भौमासुर ने वरुण का छत्र, अदिति के कुण्डल और देवताओं की मणि छीन ली है और वह त्रिलोक विजयी हो गया है. इंद्र ने कहा, भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आमजनों की अति सुन्दरी कन्याओं का हरण कर उन्हें अपने यहां कारावास में डाल रखा है. कृपया कर आप इस संकट की घरी में मार्गदर्शन करें.

इंद्र की प्रार्थना स्वीकार कर के भगवान श्री कृष्ण अपनी प्रिय पत्नी सत्यभामा को साथ लेकर गरुड़ पर सवार हो प्रागज्योतिषपुर पहुंचे. वहां पहुंचकर श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से सबसे पहले मुर दैत्य समेत मुर के छः पुत्र : ताम्र, अंतरिक्ष, विभावसु, नभश्वान, श्रवण और अरुण का संहार किया. मुर दैत्य के मारे जाने का समाचार सुन भौमासुर अपने सेनापतियों और दैत्यों की सेना समेत युद्ध के लिए निकला. भौमासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था. इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और घोर युद्ध के बाद अंत में श्री कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध कर डाला.

इस प्रकार भौमासुर को मारकर श्री कृष्ण ने उसके पुत्र भगदत्त को क्षमादान देकर उसे प्रागज्योतिष का राजा बनाया. भौमासुर के द्वारा हरण कर लाई गईं 16100 कन्याओं को श्री कृष्ण ने मुक्त कर दिया. ये सभी अपहृत नारियां थीं या फिर भय के कारण उपहार में दी गई थीं और किसी और माध्यम से उस बंदीगृह में लाई गई थीं. वे सभी भौमासुर के द्वारा पीड़ित,दुखी, अपमानित, लांछित और कलंकित थीं. सामाजिक मान्यताओं के चलते भौमासुर द्वारा बंधक बनाकर रखी गई इन नारियों को कोई भी विवाह करने को तैयार नहीं था, तब अंत में श्रीकृष्ण ने इन सभी कन्याओ के साथ विवाह किया और उन सभी कन्याओं ने श्री कृष्ण को पति रूप में स्वीकार किया. उन सभी को श्री कृष्ण अपने साथ द्वारिका नगरी ले आए. वहां वे सभी कन्याएं स्वतंत्रतापूर्वक अपनी इच्छानुसार सम्मानपूर्वक रहती थीं.

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चलिए अब जानिए भगवान श्रीकृष्ण के कितने थे पुत्र :

भगवान श्रीकृष्ण की 8 पटरानियां यानि पत्नियां थी. प्रत्येक पत्नी से उन्हें 10 पुत्रों की प्राप्ति हुई. इस तरह से उनके 80 पुत्र हुए थे. भगवान श्रीकृष्ण की 8 रानियों और 80 पुत्रों के नाम इस प्रकार है : Sri Krishn ki 8 Patniyo Aur 80 Putro Ke Naam

 

रूक्मिणी के पुत्रों के ये नाम थे : विचारू, चारू, चरूगुप्त, सुदेष्ण, चारूदेह, प्रद्युम्न, चारूदेष्ण, सुचारू, भद्रचारू, चारूचंद्र.

सत्यभामा के पुत्रों के नाम थे : भानुमान, चंद्रभानु, भानु, सुभानु, वृहद्भानु, अतिभानु, स्वरभानु, प्रभानु, श्रीभानु और प्रतिभानु.

सत्या के बेटों के नाम ये थे : चित्रगु, वसु, वेगवान, वीर, अश्वसेन, चंद्र, वृष, आम, शंकु और कुंत.

जाम्बवंती के पुत्र ये थे : पुरूजित, शतजित, विजय, चित्रकेतु, साम्ब, सुमित्र, सहस्रजित, वसुमान, द्रविड़ व क्रतु.

कालिंदी के पुत्रों के नाम ये थे : शांति, सुबाहु, श्रुत, कवि, वृष, वीर, भद्र, दर्श, पूर्णमास एवं सोमक.

लक्ष्मणा के पुत्रों के नाम थे : सिंह, ऊध्र्वग, बल, प्रबल, प्रघोष, गात्रवान, महाशक्ति, सह, ओज एवं अपराजित.

मित्रविंदा के पुत्रों के नाम : अन्नाद, महांश, वृक, हर्ष, पावन, वहिन, अनिल, गृध, वर्धन तथा क्षुधि.

भद्रा के पुत्र : सुभद्र, वाम, शूर, प्रहरण, संग्रामजित, वृहत्सेन, अरिजित, जय, आयु और सत्यक.


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