ताजमहल के अलावा और क्या देखने जा सकते है आगरा ?


ताजमहल के अलावा और क्या देखने जा सकते है आगरा ?
ताजमहल के अलावा और क्या देखने जा सकते है आगरा ?

आगरा उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है तथा ताजमहल के लिए विश्व प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां एक बहुत बड़ा जंगल था. जिसे राजा उग्रसेन कंस के पिता ने साफ करवा कर इस नगर की नीव रखी थी और अपने नाम पर इस नगर का नाम उग्रसेन रखा था जो धीरे-धीरे आगरा में बदल गया.दोस्तों आज के इस आर्टिकल ( ताजमहल के अलावा और क्या देखने जा सकते है आगरा ) में हम आज आपको बताएँगे आगरा और आगरा के आस पास कई महत्पूर्ण पर्यटन स्थलों के बारे में जिसे जान कर एक बार देखने का आपका भी मन जरूर करेगा.

 

दीवाने खास,खास महल तथा ख्वाबगाह,दीवाने आम,नौबतखाना,पंचमहल,हिरन मीनार,अनूप तालाब,जोधाबाई का  महल,शेख सलीम चिश्ती की दरगाह,बुलंद दरवाजा,फतेहपुर सीकरी,सिकंदरा भवन,जामा मस्जिद,स्वामी बाग़,चीनी का रोजा,एतमादुद्दौला,ताज महल,आगरा का किला,रामबाग

 

ताज महल ताज

महल मुगलकालीन कला का अद्भुत नमूना है. यमुना नदी के तट पर स्थित इस बेजोड़ और भव्य इमारत का नक्शा दुर्ग के नक्शा नवीस उस्ताद इशां ने तैयार किया था. भारत एवं इरानी मजदूरों के मिले-जुले श्रम से यह इमारत सन 1631 से 1653 के बीच तैयार की गई थी. इस इमारत को बनाने में उस समय 4 करोड़ , 84 लाख, 65 हजार और 1सौ 66 रुपए की लागत आई थी. ताजमहल, संगमरमर के दोहरे चबूतरे पर बना हुआ है. चबूतरे पर चढ़ने के लिए दो जीने बने हुए हैं. जिन पर चढ़ने के लिए 22 -22 सीढ़ियां है. मकबरे का भवन नीचे से अष्टकोण आकार का बना हुआ है. चबूतरे से मकबरे तक की ऊंचाई 220 फीट है. शाहजहां एवं उसकी प्रिय बेगम मुमताज की प्रेम कहानी सुनाता ताजमहल विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. चांदनी रात में इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है.

tajmahal

आगरा का किला 

जिस स्थान पर आगरा का किला है बहुत पहले यहां बादल गढ़ का किला हुआ करता था. समय के साथ-साथ वह किला नष्ट हो गया था. मुगल सम्राट ने 1563 ईस्वी से 1573 इसवी तक लगभग 8 वर्षों में बादल गढ़ किले (जो लगभग खंडहर हो गए थे) को नए तरीके से इस किले का निर्माण करवाया था. इस किले में अकबरी महल,जहांगीर महल, प्राचीन तथा प्रवेशद्वार अकबर ने बनवाए थे. जबकि शीश महल खास, महल दीवाने आम और दीवाने खास तक मोती मस्जिद का निर्माण अकबर के पोते सम्राट शाहजहां ने करवाया था. और परकोटे, पंचटोरन दीवारों तक बाहरी खाई का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था. इस किले में दिल्ली दरवाजा, अमर सिंह दरवाजा, दरियाई दरवाजा तथा दर्शनी दरवाजा नामक चार दरवाजे हैं. पर्यटकों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में अमर सिंह दरवाजा खुला होता है. किले के भीतर 3 मस्जिदें मीणा मस्जिद, शाही मस्जिद एवं नगीना मस्जिद है जो दर्शनीय है.

आगरा का किला

रामबाग

यह बाग़ अपनी हरियाली और सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. बाबर द्वारा बनाए गए इस बाग के बारे में कहा जाता है कि यह भारत का पहला मुगल उद्यान था. इस बाग के सौंदर्य को पास में बहती यमुना नदी और भी मनमोहक बना देती है.

रामबाग

एतमादुद्दौला

यह भी आगरा की प्रमुख दर्शनीय इमारत है जिसे नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा गयासुद्दीन बेग की याद में सन 1622 से 1628 के बीच में बनवाया था. यह भव्य एवं खूबसूरत इमारत सफेद पत्थर से बनी हुई है. यहां पत्थरों में की गई महीने नक्काशी तथा आकर्षक पच्चीकारी देखने लायक है. यह इमारत एक सुंदर आयताकार बगीचे से गिरी हुई है. इस में बनी जालियां तथा विभिन्न वनस्पतियों के रंगों से बनी चित्रकारी खास तौर से देखने योग्य है. इसे जहांगीर और नूरजहां का चित्रकला प्रेम बखूबी उजागर होता है.

एतमादुद्दौला

चीनी का रोजा

यह एक मकबरा है इसे सन 1618 में जहांगीर ने अपने वजीर एवं प्रमुख कवि शकुर उल्ला खां की याद में बनवाया था. इस मकबरे में चीनी मिट्टी की टाइल्स का अधिक उपयोग किया गया है. इसी वजह से यह मकबरा चीनी का रोजा के नाम से जाना जाता है.

चीनी का रोजा

स्वामी बाग़

यह आगरा से 8 किलोमीटर दूर राधा स्वामी संप्रदाय के प्रवर्तक का भव्य सफेद रंग का स्मारक है. यहां बेल-बूटों की नक्काशी और पच्चीकारी दर्शनीय है

स्वामी बाग़

जामा मस्जिद

इसका निर्माण शाहजहां की सबसे प्रिय पुत्री जहांआरा ने सन 1648 में करवाया था. सफेद तथा लाल पत्थरों से बनी यह इमारत आगरा किले के पास ही स्थित है.

जामा मस्जिद

सिकंदरा भवन

सम्राट सिकंदर लोधी ने सन 1942 ईस्वी में आगरा पर विजय पाई थी और इसी स्थान पर अपनी राजधानी बनाई थी. अपने नाम पर सिकंदर लोधी ने इस जगह का नाम सिकंदरा रखा था. यह स्थान आगरा से मथुरा रोड पर 5 मील की दूरी पर है. सम्राट अकबर को यह जगह बहुत पसंद आई थी. उनकी दिली इच्छा थी कि उन्हें यही पर दफनाया जाए. सन 1605 ईस्वी में अकबर की मृत्यु होने पर उनहे इसी स्थान पर दफनाया गया था. हालांकि इस मकबरे का निर्माण अकबर ने अपने जीते जी करवाना शुरू कर दिया था. लेकिन इसे पूरा करवाया था जहांगीर ने. लगभग 16 लाख रुपए की लागत से बना यह मकबरा सं 1613 में बनकर तैयार हुआ था. इस मकबरे के चारों कोनों पर सफेद पत्थर की चार खूबसूरत मीनारें हैं. इमारत में हिंदू तथा मुस्लिम सत्यापन कला का खूबसूरत मिश्रण है.

सिकंदरा भवन

फतेहपुर सीकरी

फतेहपुर सीकरी आगरा से लगभग 39 किलोमीटर दूर राजस्थान की सीमा से सटा एक पर्यटन स्थल है. इसका निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने अपनी राजधानी के रूप में स.1564 में शुरू कराया था लेकिन उस वक्त पानी की कमी होने की वजह से इस शहर को छोड़कर आगरा को अपनी राजधानी घोषित कर दी थी.

बुलंद दरवाजा

बुलंद दरवाजा

बुलंद दरवाजा फतेहपुर सीकरी का प्रवेश द्वार कहलाता है. लखनऊ 176 फुट ऊँचा यह दरवाजा एशिया का सबसे ऊंचा दरवाजा माना जाता है. इस दरवाजे का निर्माण सम्राट अकबर ने गुजरात पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष में करवाया था. पर्यटक इस दरवाजे को देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं.

बुलंद दरवाजा

शेख सलीम चिश्ती की दरगाह

दरगाह सफेद चमचमाती पत्थरों से बनी है इसकी जालियों पर की गई नक्काशी देखते ही बनती है. यहां एक विशाल मस्जिद भी है जिसमें १ लाख लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं.

शेख सलीम चिश्ती की दरगाह

जोधाबाई का महल

यह अकबर का रनिवास था जहां उसकी बेगम बादशाह का दिल बहलाया करती थी

जोधाबाई का महल

अनूप तालाब

इस सरोवर के बीचो-बीच एक बड़ा चबुतरा है कहा जाता है कि कभी इस चबूतरे पर बैठकर महान संगीतज्ञ तानसेन अपने इतिहास प्रसिद्ध रागों को बादशाह को सुनाया करते थे.

अनूप तालाब

हिरन मीनार

हिरन मीनार की दीवारों पर बड़े-बड़े सींगनुमा पत्थर लगे हुए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि यहां जंगल से पकड़कर हिरन लाए जाते थे तथा इस बुर्ज पर चढ़कर मुगल बेगमों उन हिरणों का शिकार किया करती थी.

हिरन मीनार

पंचमहल

पांच मंजिला इमारत बेहद खूबसूरत है कहा जाता है कि इस महल से मुस्लिम बेगमी ईद का चांद तथा हिंदू रानियां करवा चौथ का चांद देखा करती थी. इस इमारत में अलग-अलग डिजाइन के 176 खंबे है जो बेहद खूबसूरत है.

पंचमहल

नौबतखाना

लाल पत्थरों से बनी यह इमारत बेहद खूबसूरत एवं देखने योग्य है यह इमारत हिंदू-मुस्लिम सत्यापत्य कला के सम्मिश्रण का बेजोड़ उदाहरण है. कहा जाता है कि सम्राट के यहां प्रवेश करने पर नगाड़े बजाए जाते थे.

नौबतखाना

दीवाने आम

दीवान ए आम में सम्राट अकबर अपना जनता की फरियाद सुना करते थे और अन्याय संबंधी फैसले सुनाया करते थे. लाल पत्थरों से बने दीवाने आम की शिल्प कला और नक्काशी देखने लायक है.

दीवाने खास

खास महल तथा ख्वाबगाह

यह अकबर का शाही निवास था. संगीत सम्राट तानसेन का गायन अकबर इसी जगह पर बैठकर सुना करता था.

खास महल तथा ख्वाबगाह

दीवाने खास

इस जगह पर बैठकर अकबर अपने नवरत्नों के साथ एक गंभीर विचार विमर्श करता था. यह भवन बाहर से देखने पर दो मंजिला मालूम पड़ता है जबकि वास्तव में यह एक मंजिला है. इस के बीचों बीच स्थित अष्टकोणीय खंभों की नक्काशी देखने लायक है.

दीवाने खास


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