दानी महात्मा


दानी महात्मा
दानी महात्मा

Enlightening and inspirational Hindi Story : एक महात्मा थे, बड़े सरल एवं उदार. सदा मोटे कपड़े का चोगा तन पर डाले रहते और कभी-कभी दीन दुखियों की सहायता के लिए उसे भी बेच देते. गरीब एवं असहाय व्यक्तियों की सेवा करना ही उनका मूल उद्देश्य था. कई बार आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने स्वयं को भी किसी के यहां बेच दिया और जो पैसे मिले उनसे गरीबों की सहायता की.

एक बार उनके एक मित्र ने महात्मा को फटेहाल देखा तो आश्चर्य से पूछा भाई आप यू नंगे और भूखे क्यों घूम रहे हैं. आपने यह कैसा वेश बना रखा है.

महात्मा मुस्कुराए और बोले – बंधू ! यह बात तो समझ की है. दीन व्यक्तियों की सहायता करना ही तो सबसे बड़ी मानवता है. मैं असहाय व्यक्तियों की सहायता के लिए ऐसा ही करता हूं. जब भी किसी दिन दुखी को देखता हूं तो मेरा मन उस की सहायता के लिए तड़प उठता है और तब तक अशांत रहता है जब तक मैं उसकी सेवा करके संतुष्ट ना हो जाऊं. मेरे धर्म ग्रंथ का यही आदेश है कि आपका सर्वस्व देकर गरीब एवं असहायों की सहायता करनी चाहिए. मुझे ऐसा करने में बड़ी शांति मिलती है.

मित्र का मस्तक महात्मा की बातें सुनकर श्रद्धा से झुक गया. उसने कहा महाराज मैं आपके विचारों की सराहना करता हूं तथा उस धर्म ग्रंथ को देखना चाहता हूं जो आपके मन में ऐसे सेवा भाव जागृत करता है.

महात्मा पुनः मुस्कुराए, बंधु गरीब एवं असहाय व्यक्तियों की सेवा के लिए मैंने उसे भी बेच दिया. जो ग्रंथ दूसरों की सेवा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की शिक्षा देता है उसे दीन दुखियों की सेवा के लिए बेच देने में क्या आपत्ति हो सकती है. उस की सबसे बड़ी उपयोगिता यही है कि वह दूसरों के काम आए और सबसे बड़ा लाभ यह है कि वह जिसके पास भी रहेगा सहायता की शिक्षा देगा.

मित्र को ज्ञान हो चुका था. उसने आदर से महात्मा के चरणों का स्पर्श किया और सर्वस्व दान की शिक्षा को स्वीकार लिया. उसने भी अपना सब कुछ दीन दुखियों के लिए दान कर दिया. असहाय एवं गरीबों की सेवा करने के लिए अब तो महात्मा के साथ पूरा संघ घूमता था. यह लोग जिधर भी जाते लगता था गरीबों के भगवान आ गए हैं.

इनकी प्रेरणा से कई धनाढ्य व्यक्तियों ने अपनी भोग विलास की वस्तुओं को बेच दिया. उन्हें लगा गरीबों की सेवा से जो आनंद मिलता है वह भोग से नहीं मिल सकता.

जानते हो यह सर्वस्व दानी महात्मा कौन थे ?

इनका नाम था सेरापियो, जो ईसा की चौथी शताब्दी में मिस्र में पैदा हुए थे.


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