धृतराष्ट्र अंधे क्यों थे महाभारत की अनसुनी कहानी


धृतराष्ट्र अंधे क्यों थे महाभारत की अनसुनी कहानी
धृतराष्ट्र अंधे क्यों थे महाभारत की अनसुनी कहानी

दोस्तों आज हम आप को बताएंगे महाभारत की कहानी के कुछ रोचक और रहश्मय तथ्य. ऐसे दोस्तों महाभारत के हस्तिनापुर नगरी के महाराजा धृतराष्ट्र के बारे में तो आपने सुना ही होगा और सब यह भी जानते थे कि वह नेत्रहीन थे. महाभारत की कथा के अनुसार धृतराष्ट्र जन्मजात अंधे थे. पर आज हम आपको बताएंगे महाभारत की कहानी के कुछ पहलु जिसमे छिपी है कुछ रह एक रहश्यमय बातें.

एक श्राप के कारण धृतराष्ट्र जन्मे थे अंधे. महाभारत में धृतराष्ट्र अंधे थे लेकिन उन्हें यह अंधापन पिछले जन्म में एक श्राप के कारण मिला था. कहा जाता है कि धृतराष्ट्र अपने पिछले जन्म में एक बहुत ही दुष्ट राजा थे. और एक दिन जब दिन राजा शिकार पर निकले और थक कर नदी के किनारे एक पेड़ के पास अपने साथियों के साथ बैठ गए. तब उनकी नजर नदी में तैरते हुए एक हंस पर पड़ी, जो अपने बच्चों के साथ नदी में तैरता हुआ आनंद क्रिया कर रहा था. धृतराष्ट्र से यह देखा नहीं गया और उसने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि उस हंस की फोड़ दे जाए और उनके सभी बच्चों को मार दिया जाए. बस फिर क्या था सिपाही ने राजा की आज्ञा का पालन किया और हंस की आँखें फोड़ दी और उसके बच्चों को मार दिया.

इसी वजह से अगले जन्म में धृतराष्ट्र अंधा पैदा हुआ और उसके पुत्र भी इसी तरह मृत्यु को प्राप्त हुए जैसे कि हंस के बच्चे. अब इस जन्म की सजा को अगले जन्म में पूरा करने के लिए विधि ने कुछ किस तरह का विधान रचा.

अगले जन्म में महाराज शांतनु और उनकी पत्नी सत्यवती के दो पुत्र थे विचित्रविर्य और चित्रागंद. चित्रागंद काम आयु में ही युद्ध में मारे गए. इसके बाद भीष्म ने विचित्रविर्य का विवाह काशी की राजकुमारी अंबिका और अंबालिका से कराया. विवाह के कुछ दिनों के बाद ही विचित्रविर्य की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई. अंबिका और अंबालिका दोनों संतानहीन थी. तब सत्यवती के सामने यह संकट उत्पन्न हुआ की कौरव वंश आगे कैसे बढ़ेगा. वंश को आगे बढ़ाने के लिए सत्यवती ने महाऋषि वेद व्यास से पूछा तब वेद व्यास ने अपनी दिव्य शक्ति से अंबिका और अंबालिका से संतान उत्पन्न की. अम्बिका ने महाऋषि के भय के कारण आंखें बंद कर ली थी इसी कारण उन्हें अंधी संतान की प्राप्ति हुई थी. दूसरी राजकुमारी अंबालिका भी महाऋषि से डर गयी और उसका शरीर पीला पड़ गया जिस कारण उसकी संतान पांडू हुई थी. पाण्डु जन्म से ही कमजोर थे. दोनों राजकुमारी के बाद एक दासी पर भी महाऋषि वेद व्यास ने दृष्टिपात किया था. उस दासी से संतान के रूप में महात्मा विदुर उत्पन्न हुए थे.

अंधे होने के कारण धृतराष्ट्र से पहले पांडू राजा बन गए. धृतराष्ट्र पांडु और विदुर के पालन पोषण का भार भीष्म के ऊपर था. तीनों पुत्र बड़े हुए तो उन्हें विद्या अर्जित करने के लिए भेजा गया. धृतराष्ट्र बल विद्या में श्रेस्ट हुए और पांडु धनुर विद्या में और विदुर धर्म और नीति में हुए . तीनो पुत्र बड़े हुए तो पुत्र धृतराष्ट्र को राज्य नहीं पांडू को राजा बनाया गया. क्योंकि धृतराष्ट्र अंधे थे और विदुर दासी के पुत्र. पांडु की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र को राजा बनाया. धृतराष्ट्र नहीं चाहते थे कि उनके बाद युधिस्टर राजा बने, वह चाहते थे कि उनका पुत्र दुर्योधन राजा बने. इसी कारण लगातार पांडवों की अपेक्षा करते रहना उनका काम बन गया.

दोस्तों ये थी अंधे धृतराष्ट्र के पीछे छिपी हुई एक कथा. आपको हमारी यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट के द्वारा बता सकते हैं.

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