बारकोड क्या होता है ?और इसकी शुरुआत कब हुई ?


बारकोड क्या होता है ?और इसकी शुरुआत कब हुई ?
बारकोड क्या होता है ?और इसकी शुरुआत कब हुई ?

पासबुक खुद अपडेट कर सकते हैं. बारकोड रीडर की सुलभता उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरुकता के कारण वस्तुओं पर बारकोड देना आम जलन बन रहा है. भविष्य में इसका उपयोग कईं अन्य क्षेत्रों में संभावित है. दोस्तों आज आपको अपने इस आर्टिकल ( बारकोड क्या होता है ?और इसकी शुरुआत कब हुई ? ) में बताने जा रहे हैं, बारकोड के बारे में बताएं कि आपको क्या होता है बारकोड और क्या है इसका इतिहास, कैसे रीड ( पढ़ ) कर लेता है बारकोड रीडर बारकोड को.

बारकोड होता क्या है ?
दोस्तों कोई सामान खरीदते समय आपने उस के पैकेट पर काले रंग की या रंगीन 8-10 या उससे भी ज्यादा लंबी लंबी लाइनें देखी होगी. इन लाइनों में कुछ खास सामान के बारे में पूरा ब्यौरा होता है, जिसमें उसकी कीमत भी होती है. विविध प्रकार के सामानों के बिल बनाने के लिए कैश काउंटर पर बैठा सख्स सामान को ऑप्टिकल स्केनर से गुजरता है. यह ऑप्टिकल स्केनर उसी कंप्यूटर से जुड़ा होता है जिससे बिल की परची निकाली जाती है. दरअसल स्केनर बारकोड के ऊपर से गुजरते ही प्रोडक्ट की सारी जानकारी खुद-ब-खुद कंप्यूटर को भेज देता है. इस तरह कंप्यूटर खरीदे हुए सामान को जोड़कर तुरंत बता देता है और बिल चंद मिनटों में ही सामानों के ब्योरे के साथ निकाल दिया जाता है. बैंकों द्वारा जो बार कोड लगाया जाता है उसे कीओस्क में डालते हैं वह उसमें लगाएंगे निशान को पढ़ लेता है और खाली पन्ने पर ग्राहक के सभी इंट्री को प्रिंट कर देता है.

बारकोड  को रीडर पढता कैसे हैं
दोस्तों बारकोड के मुख्य रूप से 5 हिस्से होते हैं. वाइट जोन  स्टार्ट जोन, करैक्टर, डाटा करैक्टर और स्टॉक कैरेक्टर. बारकोड को पढ़ने के लिए बारकोड रिडर का इस्तेमाल किया जाता है. इसे प्राइस स्केनर भी कहा जाता है. यह स्टेशनरी डिवाइस है जो बारकोड की सूचना को स्टोर करती है. रीडर में एक लेजर बीम लगी होती है जो लाइन और स्पेस में रिलेशंस के द्वारा कोड को डिजिटल डाटा में बदल देती है और इसे कंप्यूटर को भेज दिया जाता है.
बारकोड रीडर भी मुख्य रूप से पांच प्रकार के होते हैं. पेन वॉइस स्लॉट स्कैनर,सी सी डी स्कैनर, लेजर स्केनर और इमेज स्कैनर. इनमे पेन वॉइस सबसे आसान बारकोड रीडर होता है. बार कोड की शुरुआत एक स्पेशल कैरेक्टर से होती है. जिसे स्टार्ट कोड कहा जाता है. प्रत्येक कोड एक  स्पेशल कैरेक्टर के साथ होता है जिसे स्टॉक कोड कहा जाता है. स्टार्ट कोड बारकोड स्केनर को बारकोड पढ़ते वक्त शुरुआत के बारे में बताता है. स्टॉप कोर्ट बारकोड स्केनर को पढ़ते वक्त यह बताता है कि बारकोड आखिरी चरण तक पहुंच गया है. लीनियर बार कोड के साथ मौजूद नए इलेक्ट्रॉनिक बारकोड का चलन बढ़ा है. बारकोड का इस्तेमाल पुस्तकालयों द्वारा किताबों को ट्रैक करने में भी किया जाता है.
बारकोड क्या होता है ?और इसकी शुरुआत कब हुई ?
Barcode Reader

बारकोड का इतिहास
बारकोड की शुरुआत कैसे हुई थी और इसका कारोबारी इस्तेमाल क्या है. इन्वेन्डेर एक्सपर्ट मेरी बेलिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक बारकोड का पहला कारोबारी इस्तेमाल 1966 ईस्वी में किया गया. हालांकि जल्दी ही यह महसूस किया गया कि इसमें औधोगिक मानक के अनुरूप कुछ खामियां हैं. इसलिए 1970  लेजीकॉन इंक नामक एक कंपनी ने लिखित में यूनिवर्सल ग्रोसरी प्रोडक्ट आर्टिफिकेशन कोड यानि UGPIC तैयार किया गया. इस वर्ष अमेरिकन कंपनी मोनार्क मार्किंग ने खुदरा कारोबार के लिए पहली बार बारकोड यानि UGPIC का इस्तेमाल करते हुए उपकरण का उत्पादन किया. इसके अलावा इसी वर्ष प्लेसी टेलीकम्युनिकेशन नामक एक ब्रिटिश कंपनी ने अधोगिक इस्तेमाल वाले करण का उत्पादन शुरू किया.
UGPIC में यूपीसी सिंबल सेट किया यूनिवर्सल प्रोडक्ट कोड शामिल है. जिसका इस्तेमाल अभी अमेरिका में किया जाता है. इस रिपोर्ट के मुताबिक बारकोड युक्त पहला उत्पादन रिंगले की चिउमगम का पैकेट था.
आशा करता हूं आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा.
barcode kya hota hai, iski shuruat kab hui, barcode read kaise karta hai.


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