बूढ़ा नहीं होगा इंसान लेकिन उम्र बढ़ेगी, अब तक की सबसे बड़ी खोज


बूढ़ा नहीं होगा इंसान लेकिन उम्र बढ़ेगी, अब तक की सबसे बड़ी खोज
बूढ़ा नहीं होगा इंसान लेकिन उम्र बढ़ेगी, अब तक की सबसे बड़ी खोज

आने वाले समय में इंसान की उम्र 100 साल से ज्यादा होगी, लेकिन उसके चेहरे पर पड़ने वाले झुर्रियां नहीं दिखेंगी. कैलिफ़ोर्निया के साल्क इंस्टीट्यूट ने प्रकृति और किस्मत के खेल को बदलने का दावा किया है. उनकी रिसर्च ये कहा गया की अब इंसान को बूढ़ा नहीं होने, उम्र तो बढ़ेगी ही लेकिन उम्र के निशान शरीर और चेहरे पर नजर नहीं आएंगे. चुकी, ये प्रयोग बेहद शुरुआती दौर में है और वैज्ञानिकों की मानें तो ये इंतजार लंबा खिंच सकता है. लेकिन इतना तो पक्का है कि अगर प्रयोग सफल सिद्ध हुआ तो ये मानव जगत के इतिहास की सबसे बड़ी खोज साबित होगी. रिसर्च में ये बात सामने आयी की शरीर को भी कंप्यूटर की तरह प्रोग्राम किया जा सकता है, जिसे नाम दिया गया है सेल्यूलर प्रोग्रामिं.

व्यक्ति के चेहरे पर नजर आने वाली झुर्रियों के पीछे का माजरा क्या है? दरअसल, हमारी त्वचा के नीचे प्रोटीन की एक परत होती है जो बुढ़ापे में गायब हो जाती है और इसी कारण त्वचा पर झुर्रियां नजर आने लगती है. ऐसा ही शरीर के दूसरे हिस्सों में भी होता है. साल्क इंस्टीट्यूट रिसर्च का दावा है कि इस प्रोटीन के खत्म होने को रोका जा सकता है और जिसे वो कहते हैं सेल्यूलर प्रोग्रामिंग.

हमारा शरीर छोटे-छोटे अनगिनत सेल्स से मिलकर बना है इन सेल्स को रिप्रोग्राम करके शरीर की त्वचा को किसी भी अनुरूप में ढाला जा सकता है. इस प्रक्रिया में उन सेल्स को उस स्थिति में लाया जाता है जैसे वो अपने जन्म के समय थे. ये सब आपके जीन्स में बदलाव करके किया जाता है. साल्क इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पाया कि सेल्स को रिप्रोग्राम करने से वो नए जैसे दिखने लगते हैं यानि की आपके बचपन के सेल्स की तरह. उनमें नई जान आ जाती है और उनकी उम्र बढ़ जाती है. यानी आपकी झुर्रियां ग़ायब हो जाएंगी, सफ़ेद बाल फिर से काले हो जाएंगे और ढलती काया नज़र नहीं आएगी.

अगर ये इलाज प्रयोग में लाया जाए तो इंसान की जिंदगी 108 साल तक पहुंच सकती है. जबकि आमतौर पर इंसान की औसत उम्र 70 साल के करीब होती है. साल्क इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग को फिलहाल चूहों पर आज़माया था. इलाज के बाद चूहों के अंदर ग़ज़ब के बदलाव देखने को मिले. छह हफ्ते तक चली इस थेरेपी के बाद चूहे जवान दिखने लगे. उनमें जवानी जैसी फुर्ती आ गई, उनका दिल बेहतर तरीके से काम करने लगा. घायल होने पर वो जल्दी ठीक होने लगे. उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई और तो और, वो 30 फीसद तक ज्यादा भी जिए.

यहां खास ध्यान देने वाली बात ये है कि जिन चूहों पर ये रिसर्च की गई वो प्रोजेरिया बीमारी से ग्रसित थे. यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें जीव तेज़ी से बूढ़ा होने लगता है. रिसर्च के दौरान चूहों के सेल्स को दोबारा से नया बनाने की कोशिश की गई. इसके अलावा स्वस्थ चूहों पर भी ये प्रयोग किया गया और वहां भी बेहतरीन नतीजे नजर आए. हालाँकि, बीमार चूहों के मुकाबले उनमें प्रयोग का धीमा असर हुआ।

 

बुढ़ापे को बढ़ने से रोका जा सकता है.

इंसान को जवान बनाए रखना विज्ञान की सबसे बड़ी ख्वाहिश और एक चुन्नोती भरा काम है. इंसानी शरीर के बूढ़े होने की वजह, एक ऐसी अनसुलझी पहेली है जिसे वो अब तक नहीं सुलझा पाया है. बूढ़े होने की कई वजहें बताई जाती हैं, लेकिन इस रिसर्च ने इंसान के बूढ़े होने वाले रहश्य को भी सुलझा लिया है. इस रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रकर्ति ने बुढ़ापा आने का कोई कड़ा निय़म नहीं बनाया है यानी ये ज़रूरी नहीं कि बुढ़ापे के लक्षण एक बार दिखाई दें तो उन्हें ख़त्म ना किया जा सके. इस रिसर्च का दावा है कि आप बुढ़ापे के कुछ संकेतों को ठीक वैसे ही मिटा सकते हैं जैसे दवाइयों से बीमारी.

साल्क इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक बुढ़ापे का पूरी तरह से मिटाने की बात नहीं कहते, पर उनका मकसद बुढ़ापे की प्रक्रिया को काफी धीमा करना है ताकि इंसान स्वस्थ रहे और ज्यादा दिनों तक जिन्दा रह सके. लेकिन, ये रिसर्च आपको जवान बनाने की सौ फीसदी गारंटी भी नहीं देता क्योंकि ज्यादा मात्रा में सेल्स से छेड़छाड़ करने से शरीर के जरूरी अंग काम करना बंद कर सकते हैं और इससे इंसान की मौत भी हो सकती है.

इंसान को जवान बनाये रखने के लिए ये रिसर्च अभी दूर की कौड़ी है क्योंकि इंसानी शरीर और चूहों की बनावट में काफी अंतर है. वैज्ञानिक खुद इस बात को मानते हैं कि इंसानों पर इस रिसर्च का प्रयोग काफी मुश्किल होगा क्योंकि इसमें भ्रूण की सेल्स में मौजूद डीएनए से छेड़छाड़ करनी होगी. लेकिन रिसर्च में दावा भी किया गया है कि दवाइयों के जरिए जीन्स पर काम किया जा सकता है. खास तरह के दवाईयों को किसी क्रीम या इंजेक्शन के जरिए त्वचा, मांसपेशियों और हड्डियों में पहुंचाया जा सकता है. लेकिन इसमें भी 10 साल का लंबा वक़्त लगेगा.

फिर भी ये रिसर्च मेडिकल इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खोज है क्योंकि अब बुढ़ापे से जुड़ी तकलीफों का नहीं बल्कि सीधे बुढ़ापे का इलाज किया जाएगा. अगर इस रिसर्च के दावे सही निकले तो इंसान की जवान रहने की खवाहिश सिर्फ ख्वाहिश नहीं रह जाएगी.

salk institute ke vaigyanik ne daawa kiya ab insan bhudha nahi hoga budhape per padne waali jhurriyon ko khatm kiya ja sakta hai. 


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