ब्राह्मण श्रेष्ठ क्यों, जानिये क्या कहता है हमारा शास्त्र !


ब्राम्हण श्रेष्ठ क्यों, जानिये क्या कहता है हमारा शास्त्र !
ब्राम्हण श्रेष्ठ क्यों, जानिये क्या कहता है हमारा शास्त्र !

ब्राह्मण श्रेष्ठ क्यों, जानिये क्या कहता है हमारा शास्त्र : Brahman Shresth kyon, kya kehta hai hamara Shastra

दोस्तों आज के इस आर्टिकल ( ब्राह्मण श्रेष्ठ क्यों ) में आपको बताएँगे की क्यों हमारा शास्त्र कहता है की ब्राह्मण श्रेष्ठ है. दोस्तों, संसार में किसी भी व्यक्ति के श्रेष्ठता उसके गुण ज्ञान कर्म और कार्य से होती है. शरीर के अन्य अंग, हाथ, पांव आदि यदि खराब हो जाए तो व्यक्ति अपंग होकर भी जीवित रह सकता है. परंतु यदि सर कट जाए तो एक ही छन में जीवन लीला समाप्त. इसी प्रकार यदि ब्राह्मण वर्ग नष्ट हो जाएगा तो समझे राष्ट्र की आध्यात्मिक मानसिक और नैतिक शक्ति समाप्त हो जाएगी.

जिस प्रकार एक मनोरोगी या पागल व्यक्ति मस्तिष्क के विकृत हो जाने पर किसी काम का नहीं रहता, भले ही उसका संपूर्ण शरीर बलिष्ठ है. ठीक उसी प्रकार ब्राह्मण शरीर के मस्तिष्क हैं. जैसे सभी लकड़ियां तो एक समान है परंतु चंदन की लकड़ी का अपना अलग गुण है. धातुएं सभी एक समान धातु है, परंतु सोना का अपना ही महत्व है. सोना चाहे वह गंदी नाली में गिर जाए तो भी लोग उसे उठा कर धोकर वापस तिजोरी में संभाल कर रख लेते हैं. क्यों, इसमें वाद विवाद की बात नहीं है.

गुणों की प्रशंसा एक नैसर्गिक प्रतिक्रिया है और यही नैसर्गिक प्रतिक्रिया मात्र ब्राह्मणों के प्रति ही नहीं. शुद्र, कुलोत्पन्न, पक्षी, काक, व्याघ्र, राक्षसउत्पन्न विभीषण, दैत्यराज प्रहलाद और महेश्वरी वाल्मीकि को उनके गुणों के कारण ही सनातन धर्म में ऊंचा स्थान प्राप्त है. त्रिलोक विजयी, त्रिकालदर्शी, प्रकांड ज्ञानवान और श्रेष्ठ कुल उत्पन्न महाराज रावण के गुणों की प्रशंसा और अवगुण का निरादर सहज एक मानवीय प्रक्रिया है. इसमें किसी प्रकार के पक्षपात की तो कहीं कोई बात ही नहीं है.

दोस्तों आपकी क्या राय है श्रेष्ठ वर्ण ब्राह्मण के बारे में, आपका का क्या विचार, सोच और नजरिया है इस विषय के बारे में, कमेंट कर के जरूर बताएं !


Comments 0

Your email address will not be published. Required fields are marked *

log in

reset password

Back to
log in