भीम में क्यों था 10000 हाथियों का बल


 

दोस्तों आप हस्तिनापुर के राजा पांडु के उन पांच पुत्रों के बारे में तो जानते ही होंगे जिन्हें पांडव कहा जाता था | और आप लोग यह भी जानते होंगे कि पांचो पांडव भाई धर्मानुसार तो राजा पांडु के ही पुत्र माने जाते थे |

परंतु यह सभी भाई अलग-अलग देवताओं की संतान थे जैसे युधिष्टर भगवान धर्मराज के पुत्र, अर्जुन देवराज इंद्र के पुत्र थे और नकुल सहदेव के पिता अश्विनी कुमार थे इसी प्रकार भीमकुंड भगवान वायु देव के पुत्र थे जिनके पुत्र महाबली श्री हनुमानजी थे |

दोस्तों महाबली भीम के बलशाली होने के प्रमाण उनके बचपन से ही मिलने लगे थे| कहा जाता है कि जब भीम बालक अवस्था में तीन साल के ही थे | तब एक दिन उनकी माता देवी कुंती पुञ भीम को गोद में लिए अपने आश्रम की कुटिया के बाहर राजा पांडु के साथ बैठी थी | तभी अचानक एक भयानक बाघउनके आश्रम के आया देवी कुंती उस बाघ को देखकर इतना घबरा गयी की भागने के लिए तुरंत खड़ी हुई | और अपनी उस घबराहट में यह भी भूल गयी थी उनका बेटा भी उनकी गोद में सोया है | देवी कुंती के इस तरह खड़े हो जाने से बालक माता की गोद से छिटककर एक चट्टान पर जाकर गिर गया | बालक के गिरने से वह चट्टान कई टुकड़ों में टूट गई थी | परंतु उससे बलवान बालक भीम को उससे जरा भी चोट नहीं आई थी | यह देखकर राजा पांडु और देवी कुंती दोनों ही बड़े आश्चर्य में पड़ गए थे |

दोस्तों आप सभी यह तो जानते ही होंगे कि राजा पांडु ने किंधव ऋषि और उनकी पत्नी को शिकार खेलते समय उस समय मार दिया था | जब किंधव ऋषि और उनकी पत्नी हिरन योनि में मैथुन किर्या कर रहे थे | राजा पांडु का बाण लगते ही हिरन बने किंधव ऋषि अपने मनुष्य रूप में आ गए थे और उन्होंने राजा पांडु को श्राप दिया था कि तुमने जिस अवस्था में मुझे मारा है उसी अवस्था में तुम जब भी होगी तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी |

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उसके बाद राजा पांडु ने हस्तिनापुर का राज्य अपने नेत्रहीन भाई धृतराष्ट्र को देकर खुद संयास ले लिया था | परंतु उनकी दोनों पत्नियों कुंती और माधवी भी उनके साथ जंगल में चली आई थी | बताते हैं कि एक दिन राजा पांडु के मन में काम भाव जाग उठा और उन्होंने अपनी पत्नी माधवी के मना करने के बाद भी उसके साथ जबरन सहवास किया | और फिर किंधव ऋषि के श्राप चलते वह मृत्यु को प्राप्त हो गए थे| माधवी भी अपने पति के साथ ही चिता पर सती हो गई और माता कुंती अपनी पांच बच्चों को लेकर हस्तिनापुर चली आयी |

हस्तिनापुर में कौरव और पांडव साथ ही खेल करते थे और खेल- खेल सभी कौरवो भाइयों बहुत मारा करते थे| जिसके कारण का सभी कौरव भाई भी उनसे परेशान हो गए थे | इसलिए एक दिन दुर्योधन ने खाने में उस समय जहर मिला दिया जब सभी बच्चे गंगा नदी के किनारे जल विहार करने गए थे | और जब भीम जहर के असर से अचेत पड़ गए तो दुर्योधन ने भीम को बँधबा कर गंगा नदी में फिकवा दिया था |

दोस्तों अपनी उसी बेहोश अवस्था में ही भीम नाग लोक पहुंच गए तो वहां के नागों ने उन्हें मार डालने के लिए डासना शुरू कर दिया | नागों के इस प्रकार डसने से नागों के जहर से भीम के खाए हुए जहर का असर खत्म हो गया और होश आ गया | उनकी नजर जब अपने चारों तरफ मौजूद नागों पर पड़ी तो उन्होंने उन नागों को पकड़कर पीटना शुरु कर दिया उसके बाद सारे नाग घबरा कर भाग गए और जाकर सारी बात नागराज वासुकी को बताइ| नागराज बासुकी अपने साथियों के साथ भीम के पास आया | नागराज वासुकी के एक साथी ने भीम को पहचान लिया क्योंकि वे भीम के नाना के नाना थे | उन्होंने नागराज वासुकी से निवेदन करके नागलोक के उन कुंडों का रस पिलाया जिसे पीने से हजारों हाथियों का बल प्राप्त हो जाता था | इस प्रकार महाबली भीम को 10 हजार हाथियों का बल प्राप्त हो गया था|

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