मेष लग्न में सूर्य चतुर्थ घर या भाव में : वैदिक फलादेश


मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश
मेष लग्न में सूर्य पंचम घर या भाव में : वैदिक फलादेश

मेष लग्न में शनि की स्थिति चतुर्थ स्थान में

 

मेष लग्न में सूर्य पंचमेश यानी त्रिकोणाधिपति होने के कारण शुभ फलदाई है. चतुर्थ स्थान में सूर्य कर्क राशि का होगा ऐसा जातक राजदरबार में मान सम्मान पाने वाला समुंद्री यात्रा या विदेश यात्रा से लाभ कमाने वाला माता पिता का भक्त जमीन जायदाद का स्वामी होता है. जातक को थोड़ा सहयोग मिलने पर सरकारी नौकरी मिल सकती है. जातक पढ़ा-लिखा एवं उच्च शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करता है

अनुभव : भोज संगीता के अनुसार कर्कस्थ सूर्य यदि चतुर्थ में हो तो जातक विद्यावान होगा उसको सरकारी नौकरी मिल सकती है

 

निशानी : दूसरों के लिए जोड़ जोड़ कर मरे
दशा : सूर्य की दशा सुख में वृद्धि करेगी, राज्य में लाभ मिलेगा, संतति सुख मिलेगा, विद्या में वजीफा मिलेगा

 

 
सूर्य का अन्य ग्रहों से संबंध या युति

 

सूर्य चंद्र की युति : सूर्य के साथ यदि चंद्रमा हो तो जातक का जन्म श्रावण कृष्ण अमावस्या की मध्यरात्रि का होगा. जातक को माता की संपत्ति एवं उत्तम वाहन का सुख मिलेगा. यह युति प्रबल राजयोग कारक है.

सूर्य मंगल की युति : जातक की माता का स्वास्थ्य गड़बड़ रहेगा सुख संसाधनों में कुछ ना कुछ कमी बनी रहेगी

सूर्य बुध की युति : सूर्य के साथ यदि बुध हो तो बुधादित्य योग बनेगा. यह पंचमेश सूर्य के साथ तृतीय एवं षष्ठेश बुध की युति केंद्र स्थान में होगी जहां बुद्ध शत्रु क्षेत्री होगा. जातक का पुत्र सुखी होगा, उत्तम मकान बनाएगा

सूर्य गुरु की युति : सूरज के साथ गुरु हो तो हंस योग के कारण जातक राजनीति में सक्रिय हो कर उच्च पद को प्राप्त करेगा. जातक के पिता दीर्घजीवी होंगे. यदि यहां चंद्रमा भी हो तो जातक लाल बत्ती की गाड़ी का स्वामी होगा.

सूर्य शुक्र की युति : धनेश एवं पंचमेश की युति में विवाह पश्चात धन की प्राप्ति होगी. प्रथम संतति के पास धन और बढ़ेगा

सूर्य शनि की युति : जातक के स्वयं का भाग्योदय पिता की मृत्यु के बाद होगा. राजपथ में लाभ होगा

सूर्य राहु की युति : जातक का पिता बीमार रहेगा या पिता का साथ कम मिलेगा

सूर्य केतु की युति : सूरज के साथ यदि राहु केतु या शनि हो तो जातक की संतानों में केवल एक ही कन्या ही जीवित रह पाएगी

 

 

चतुर्थ भाव में सूर्य का उपचार

अंधों को भोजन दे
शरीर पर सोना पहने
सोने की मूर्ति या स्वर्ण फूल गले में धारण करें
अभिमंत्रित माणिक्य, सूर्य यंत्र के साथ गले में धारण करें


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