मेष लग्न में सूर्य तृतीय घर या भाव में : वैदिक फलादेश


मेष लग्न में सूर्य की स्थिति तृतीय स्थान में

मेष लग्न में सूर्य पंचमेश यानी त्रिकोणाधिपति होने के कारण शुभ फलदाई है. तृतीय स्थान में सूर्य मिथुन राशि में मित्र-क्षेत्री होता है. राजदरबार या सरकार में मुकदमे में हमेशा जीत पाने वाला. दृढ़ निश्चयी, भाइयों कुटुम्बियों से मान पाने वाला, पिता की संपत्ति पाने वाला, गणित का जानकार, ज्योतिष का विद्वान एवं महान पराक्रमी होगा.

 

अनुभव : भोज संघिता के अनुसार, ऐसे जातक के मित्र धनी होते हैं. भाई प्रभावशाली पद पर होता है. जातक साहसी होगा. उसे धर्म गुरु के रूप में यश मिलेगा. स्वयं अपने आप में बड़ा होगा जेष्ठ भाई का नाश होगा.

सूर्य की दशा – अंतर्दशा उत्तम फल देगी
सूर्य का अन्य ग्रहों से संबंध या युति

 

सूर्य चंद्र की युति : सूर्य के साथ चंद्रमा हो तो जातक का जन्म आषाढ़ कृष्ण अमावस्या रात्रि को 2:00 से 4:00 बजे के बीच होगा. जातक पराक्रमी होगा पर पीठ पीछे उसकी बुराई होती रहेगी पर जातक मित्रों को वशीभूत करने में समर्थ होगा.
सूर्य मंगल की युति : ऐसा जातक पराक्रमी होगा पर भाइयों से नहीं बनेगी
सूर्य बुध की युति : पंचमेश एवं तृतीयेश की युति मित्रों से लाभ दिलाएगी. कुटुंब परिवार में प्रतिष्ठा रहती है. जातक महापराक्रमी होता है. ऐसा जातक बहू प्रजवान संतति वाला होता है
सूर्य गुरु की युति: जातक भाग्यशाली होगा एवं भाइयों की मदद से आगे बढ़ेगा और दूसरों की मदद मिलती रहेगी

सूर्य शुक्र की युति : लग्नेश एवं पंचमेश की युति विवाह के बाद धन प्राप्ति करवाएगी. दूसरा भाग्योदय प्रथम संतति के बाद होगा

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सूर्य शनि की युति : सूर्य शनि की युति भाइयों में मनमुटाव उत्पन्न करवाएगी
सूर्य राहु की युति : सूर्य राहु परिजनों में विद्रोह कराएगा पर जातक जबरदस्त पराक्रमी होगा

सूर्य केतु की युति : जातक कीर्तिवान होगा. कुटुंब जनों के लिए त्याग करेगा और उसका फल नहीं मिलेगा
तृतीय भाव में सूर्य का उपचार

रोज माता का आशीर्वाद लेना चाहिए माता ना हो तो सास, मौसी या बुआ की सेवा कर आशीर्वाद लें

अपना चाल चलन ठीक रखें

माणिक्य युक्त सूर्य यंत्र धारण करें


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