रहस्मय अलौकिक घटना : टीपू सुल्तान के दिव्य स्वपन


रहस्मय अलौकिक घटना : टीपू सुल्तान के दिव्य स्वपन
रहस्मय अलौकिक घटना : टीपू सुल्तान के दिव्य स्वपन

टीपू सुल्तान के दिव्य स्वपन : कुछ साल पहले एक अंग्रेज इतिहासकार ने टीपू सुल्तान की एक जीवनी लिखी थी. इस जीवनी में उसने टीपू सुल्तान की डायरी के कुछ ऐसी घटनाओं को प्रकाशित किया है, जिन्हे पढ़कर विश्वास हो जाता है कि टीपू सुलतान को समय समय पर स्वप्न के माध्यम से भविष्यवाणीयां मिलती रहती थी. उनका इन भविष्यवाणियों पर गहरा विश्वास था. यह रोजानामचा या डायरी आज भी लंदन के इंडिया हाउस लाइब्रेरी में सुरक्षित है.

इस डायरी के अनुसार, एक रविवार को उन्होंने स्वप्न में देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति हाथ में कांच का एक चमचमाता हुआ ढेला लेकर उनके पास आया है तथा कह रहा है – “सेलम के पास ऐसे कांच की खदान पहाड़ के पास है”. जब टीपू ने सैलेम के पास उस खदान की खोज कराई, तो वह वास्तव में एक पहाड़ के पास निकली.

मोहम्मद (1223) के खुशरबी महीने के पहले दिन एक स्वप्न में अपने दुश्मन मोहम्मद अली को मरते देखा. यह स्वप्न भी कुछ दिन बाद सच्चा साबित हुआ. जमादि महीने के तीसरे दिन उन्होंने स्वप्न में देखा कि उनके सामने चांदी की 3 तरह की तश्तरियों में उन्हीं के बाग की ताजी तथा रसीली खजूर रखी हुई थी. इस स्वप्न की भविष्वाणी उन्होंने यह लगाई कि उन्हें जल्दी ही अपने तीन विद्रोही सरदारों की सारी संपत्ति मिल जाएगी. उनकी अपने बारे में इस भविष्यवाणी कि यह व्याख्या सच निकली तथा सचमुच आगे चलकर उन्हें उन तीन सरदारों की सारी संपत्ति मिल गई. इनमें से एक सरदार था निजाम अली, जो इस स्वप्न के तीसरे दिन ही मृत्यु को प्राप्त हो गया तथा उसकी सारी संपत्ति टीपू सुल्तान ने फौरन अपने कब्जे में कर ली.

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मोहम्मद (1218) में जब टीपू फर्रुखी के इलाके से अपने सेना के साथ लौट रहे थे, तो उन्हें मालूम पड़ा कि चीन देश के बादशाह के कुछ दूत उनसे मिलने आए हैं. उन्होंने टीपू सुल्तान को सफेद हाथी भेंट में देते हुए कहा – “चीनीयों ने सिकंदर तथा हुजूरे आला के अलावा किसी और को सफेद हाथी भेट में नहीं दिया है. इस स्वप्न की भविष्यवाणी का उन्होंने अर्थ लगाया कि वह सिकंदर के समान ही महान योद्धा तथा विजेता है और उन्होंने यूरोपियन पर आक्रमण करके उन्हें एक युद्ध में हराया.

जऱ हिसाब के अनुसार बुस्साद के हैदरी महीने के 21वी दीन तुंगभद्रा के पास उन्होंने स्वप्न में देखा कि कयामत का दिन आ पहुंचा है, तभी एक हट्टे-कट्टे अरब ने टीपू सुल्तान का हाथ थाम कर पूछा – ” मैं मुर्तजा अली हूं. अल्लाह के रसूल ने कहा है कि वह आपके बिना बहिश्त में कदम नहीं रखेंगे.” इस स्वप्न के बाद तो टीपू की महत्वकांक्षा और बढ़ गई तथा उन्हें लगा कि वे अजय हैं. उन्होंने मराठों से लड़ाई छेड़ दी तथा उस लड़ाई में विजय प्राप्त की.

रहमानी महीने के 25 वे दिन टीपू को स्वप्न में दिखाई पड़ा कि हजरत मोहम्मद साहब ने उन्हें एक के बाद एक तीन पगड़ियां देते हुए फरमाया है, “इन्हें सिर पर पहनो.” इस स्वप्न का अर्थ उन्होंने यह लगाया अल्लाह तथा उनके पैगंबर ने उन्हें सारी दुनिया की बादशाहत अदा की है. वे निजाम को भारत से निकालने के तरीके अपनाने लगे.

इस प्रकार टीपू सुल्तान अपने सारे जीवन में स्वप्नों के विशिष्ट अर्थ लगाकर भविष्यवाणियों से अपना मार्गदर्शन करते रहे.

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