राम से पहले इस योद्धा से हारा था लंकापति रावण !


राम से पहले इस योद्धा से हारा था लंकापति रावण !
राम से पहले इस योद्धा से हारा था लंकापति रावण !

दोस्तों, आज हम इस आर्टिकल में लंका के राजा रावण और कृतवीर्य अर्जुन के बीच हुए युद्ध के बारे में बात करने वाले हैं. महाबली अर्जुन ने रावण को सिर्फ युद्ध में ही नहीं हराया था, बल्कि उस को कैद करके अपने पास रख लिया था. तब रावण के पितामह महर्षि पुलस्त्य जी ने आकर रावण को अर्जुन की कैद से आजाद कराया था. यह सब कैसे हुआ था चलिए जानते हैं इस कहानी के बारे में.

दोस्तों, यह कहानी उस समय की है जब महाबली रावण ने तीनों लोगों को जीतने की प्रतिज्ञा कर ली थी. और एक-एक कर पृथ्वी के सभी राजाओं को जितना आरंभ कर दिया था. दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हैं रावन अपने बल के सामने मनुष्यों को कुछ भी नहीं समझता था.

इसलिए वह पृथ्वी के जिस भी राजा के पास जाता था. उससे बड़े गर्व के साथ यही कहता था – या तो मुझसे युद्ध करो या कह दो तुम हार गए. तब पृथ्वी के ज्यादातर राजाओं ने डरकर बिना युद्ध लड़े ही अपनी हार मानकर रावण कीअधीनता स्वीकार कर ली थी.

दोस्तों रावण इसी प्रकार पृथ्वी के राजाओं को जीतता हुआ एक दिन महिष्मति नामक राज्य में जा पहुंचा. जहां अर्जुन नाम का एक राजा राज्य किया करता था. यह अर्जुन, कृतवीर्य का पुत्र था इस कारण उसे कृतवीर्य अर्जुन भी कहा जाता था.

रावण जब अर्जुन के राज्य में पहुंचा तो उस समय अर्जुन अपनी पत्नियों के साथ जल क्रीडा करने गया हुआ था. इसलिए रावण उसका इंतजार करने के लिए नर्मदा नदी के किनारे जा कर भगवान शंकर की पुजा करने लगा था.

दोस्तों बताते हैं कि, रावण जिस समय अपनी पूजा कर रहा था तभी नर्मदा नदी का पानी इतना ज्यादा बढ़ गया था कि वह रावण की पूजा की सभी सामग्रियों को बहा ले गया था. अपनी पूजा में विघ्न पड़ता देख रावण को क्रोध आ गया. और उसने अपने मंत्रियों को इशारे से आदेश दिया कि – पता करो यह सब कैसे हुआ.

तब रावण के राक्षस मंत्री आकाश मार्ग से यह पता लगाने निकले कि नदी का पानी इस तरह से कैसे बढ़ गया. तो उन्होंने कुछ दूर पर जाकर देखा कि एक मनुष्य जिसके 1000 हाथ है वह नर्मदा नदी के पानी को रोक कर खड़ा है. रावण के मंत्रियों ने जब वापस आकर रावण को यह बात बताई तो रावण समझ गया की वही अर्जुन है.

दोस्तों, उस समय रावण ने, अपनी पत्नियों के साथ जल क्रीडा कर रहे अर्जुन पर आक्रमण कर दिया. परंतु हजार भुजाओं वाले उस अर्जुन ने अकेले ही है रावण की सेना को तहस-नहस करके महाबली रावण को पकड़कर रस्सियों से बांध लिया था. और अपने महल में लाकर उसे अपने कैदखाने में डाल दिया था.

दोस्तों ये महाबली अर्जुन जिसकी 1000 भुजाएं थी इसका वध भगवान परशुराम ने किया था. और इस युद्ध में अपने फ़रशे से अर्जुन की सारी भुजाएं काट दी थी.

दोस्तों, रावण ने कभी यह सोचा भी नहीं था उसे कोई मनुष्य इस तरह अपना कैदी बना लेगा. रावण को समझ नहीं आ रहा था की वह अर्जुन की कैद से कैसे आजाद हो, क्योंकि उसे अपनी सेना पर इतना भरोसा नहीं था कि वह आकर उसे आजाद करा सकें.

इसलिए उसने उस समय अपने पितामाह महर्षि पुलस्त्य जी का स्मरण किया. दोस्तों महर्षि पुलस्त जी को देवताओं से यह मालूम पड़ चुका था की रावण को अर्जुन ने अपना कैदी बना लिया है. इसलिए वह राजा अर्जुन के पास आए और उन से विनती की, – की रावन मेरा पौत्र है इसलिए उसे छोड़ दो. तब महर्षि पुलस्त्य जी का सम्मान करते हुए महाबली अर्जुन ने रावण को अपनी कैद से आजाद कर दिया था.


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