श्री हनुमान जी की तरह यह 7 रहस्यमय लोग आज तक जीवित है!


श्री हनुमान जी की तरह यह 7 रहस्यमय लोग आज तक जीवित है!
श्री हनुमान जी की तरह यह 7 रहस्यमय लोग आज तक जीवित है!

आदि काल से ही देवता हो या फिर मनुष्य सभी इसी इक्षा के लिए तप करते थे कि उन्हें अमर होने का वरदान मिल जाए. लेकिन ऐसा वरदान किसी को नहीं मिला क्योंकि प्रकृति का नियम है जो आया है वह जाएगा ही. सात महामानव आज भी अजर-अमर है, वह कोई और नहीं इंसान हैं ये 7 लोग. अपने जन्म के बाद से लेकर आज तक हर युग में हर काल में मौजूद रहें. ऐसी महान इतिहास पुरुषों, जिनमें से कुछ ने मृत्यु पर विजय हासिल की तो कुछ को श्राप मिला कि पृथ्वी के अंत तक मुक्त नहीं होंगे.

१. द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को अमरत्व प्राप्त है यह अमरत्व का वरदान नहीं बल्कि श्राप है. अश्वथामा महाभारत में कुरुक्षेत्र का युद्ध करने वाले युद्ध में एकमात्र जीवित योद्धा है. जिन्होंने द्रोपदी के पांच निर्दोष पुत्रों की हत्या की. इस वजह से भगवन श्री कृष्णा ने अश्वधामा को पाप मुक्ति के लिए श्राप दिया वह सदी के अंत तक ऐसे ही चिरंजीवी बन कर रहना पड़ेगा, ना कोई उससे बात कर सकेगा न ही कोई उसे चाहेगा. उसे अपने भावनाओं के साथ ऐसे ही तड़पना होगा. समय समय पर ऐसा सुनने को मिला है की लोगों ने आज भी अवस्थामा को जिन्दा देखा है.

२. महाबली का राज्य तीन लोक में फेला हुआ था. भगवन विष्णु ने जब वामन अवतार रूप में दानी बली से तीन कदम जगह मांगी, भगवन ने एक कदम से धरती और दूसरी से पाताल, फिर तीसरे कदम के लिए जगह नहीं बची. इस पैर दानी बली ने भगवन को तीसरा कदम अपने सर पर रखने को कह दिया उसके इस भाव को देखकर भगवान विष्णु ने उन्हें चिरंजीवी बना दिया.

३. रुद्र अवतार और राम भक्त हनुमान के बारे में भी कहा जाता है कि वह चिरंजीवी है रामायण के समय में उन्होंने भगवान राम का साथ दिया वहीं महाभारत में अर्जुन की शक्ति बढ़ाने के लिए अर्जुन के रथ के पताका पर मौजूद रहे. कहा जाता है कि हनुमान को चिरंजीवी होने का आशीर्वाद माता सीता ने दिया था.

४. परशुराम भी चिरंजीवी है, परशुराम का वर्णन रामायण में सीता स्वयंवर के दौरान आता है. वही परशुराम की उपस्थिति महाभारत में भी. महाभारत में परशुराम को कर्ण और भीष्म पितामह का गुरु बताया गया है. पुराण के अनुसार परशुराम जी कल्कि अवतार थे

५. गुरु कृपाचार्य के बारे में अलग अलग राय है कुछ लोग उन्हें चिरंजवी मानते है कुछ नहीं , कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के गुरु थे. महाभारत युद्ध में राज धर्म निभाने के लिए कौरवों की तरफ से शामिल हुए.

६. व्यास मुनि ने महाभारत की रचना की थी और उस ग्रन्थ के एक पात्र भी थे. महर्षि व्यास का वर्णन रामायण के अलावा सतयुग में भी आता है.

७. रावण के भाई विभीषण को भी चिरंजीवी में से एक माना जाता है. राम और रावण के युद्ध के दौरान विभीषण ने राम का साथ दिया वही महाभारत काल में भी राजसूय यज्ञ समय विभीषण ने पांडवों का निमंत्रण स्वीकार किया और उन्हें उपहार भेजें

दोस्तों यह तो हिंदू मान्यता के अनुसार यह थे ७ महापुरुष जो सृष्टि के आदि काल से अंत काल तक चिरंजीवी रहेंगे. इनमे से छह चिरंजीवी अपनी योग्यता और गुणों के कारण अजर अमर है वही अश्वत्थामा एक श्राप के कारण अमरत्व को झेल रहे हैं.


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