सच्ची कहानी : एक तांगेवाले के अरबपति बनने की कहानी


दोस्तों ऐसे तो एक तांगेवाले के अरबपति बनने की कहानी से भारत देश के लगभग सभी लोग वाकिफ होंगे. लेकिन फिर भी अगर आपमें से कोई ऐसा हो, जो इस तांगेवाले अरबपती से वाकिफ ना हो, तो हम आपको उनकी उस सच्ची कहानी को बताना चाहेंगे. जो हर इंसान के लिए सफलता का मूलमंत्र साबित हो सकता है. जी हां दोस्तों महाशय धर्मपाल जी एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से  कामयाबी के शिखर को छुआ है. जो ना सिर्फ भारतवासियों के लिए, बल्कि विश्वभर के लोगों के लिए एक मिसाल पेश करता है. इनकी जिंदगी इस बात का गवाह है, की अगर इंसान चाहे तो कुछ भी मुश्किल नहीं.

महाशय धर्मपाल जी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. M.D.H. मसाले न सिर्फ भारत देश में बल्कि पूरे विश्व भर में अपनी शुद्धता के लिए विख्यात है. लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए महाशय जी को काफी चुनौतीपूर्ण संघर्षों का सामना करना पड़ा है.

महाशय जी का जन्म सियालकोट में हुआ था. जो कि अब पाकिस्तान में है. बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले महाशय जी के परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक थी. बचपन सि हीं इन्हें पढ़ने में मन नहीं लगता था. स्कूल तो जाते थे, लेकिन पढ़ाई में बहुत हीं कमजोर थे. उनके पिताजी की बहुत इच्छा थी कि ये पढ़े-लिखे. इसलिए इन्हें वो हमेशा समझाते थे. लेकिन महाशय जी का पढ़ाई में बिल्कुल भी ध्यान नहीं लगता था. किसी तरह चौथी पास की. लेकिन पांचवी कक्षा में वो फेल हो गए. और उसके बाद स्कूल जाना हीं छोड़ दिया.

पिताजी ने इन्हें एक बढ़ई की दुकान पर लगा दिया, ताकि कुछ काम सीख सके. कुछ दिनों तक काम करने के बाद महाशय जी का मन वहां भी नहीं लगा. और उन्होंने काम छोड़ दिया. धीरे-धीरे समय बीतता गया, और 15 साल की उम्र तक इन्होंने लगभग 50 काम किए और छोड़ दिए.

उन दिनों सियालकोट में लाल मिर्च बहुत चलता था. और लाल मिर्च के लिए सियालकोट काफी प्रसिद्ध भी हुआ करता था. यही सोचकर महाशय जी के पिता ने उनके लिए एक छोटी सी मसाले की दुकान करवा दी. धीरे-धीरे इनका व्यापार चलने लगा. लेकिन इन दिनों परेशानी ये थी कि आजादी का आंदोलन चल रहा था. और वो अपने चरम पर था.

आंदोलन के बाद 1947 में जब देश आजाद हुआ तो सियालकोट पाकिस्तान का हिस्सा बन गया. और वहां रह रहे हिंदुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. इस वजह से वो असुरक्षा महसूस करते थे. और दंगे भी काफी भड़कते रहते थे. इसी डर से महाशय जी के परिवार ने सियालकोट छोड़ना हीं उचित समझा. और भारत के नानक डेरा आ गए. लेकिन उन दिनों चुकी वो शरणार्थी थे, उनका सब कुछ लूट चुका था. इस कारण पूरा परिवार मिलों चलकर किसी तरह अमृतसर पहुंचे.

महाशय जी के एक रिश्तेदार दिल्ली में रहते थे. इसी उम्मीद से वो दिल्ली के करोलबाग में आकर रहने लगे. उन दिनों उनके पास सिर्फ 1500 रुपए हीं थे. और दूसरा कोई काम – धंधा भी उनके पास नहीं था. किसी तरह कुछ और पैसे जुटा कर उन्होंने एक तांगा खरीद लिया. और वो बन गए एक तांगाचालक. दिल्ली में करीब 2 महीने तक उन्होंने तांगा चलाया. लेकिन उन्हें ये भी रास नहीं आया. और तांगा चलाना बंद कर दिया.

अब वो फिर से बेरोजगार हो गए थे. उनके पास कोई काम नहीं था. और मसाला बनाने के सिवा उन्हें और कुछ आता भी नहीं था. इसलिए काफी सोचने समझने के बाद उन्होंने घर पर हीं मसाला बना कर बेचने का मन बनाया. बाजार से मसाला लाकर घर पर हीं उसे तैयार करते थे. और फिर उसे बेचते थे. चुकी वो मसाला काफी शुद्ध लोगों को देते थे और बेहद ईमानदार किस्म के इंसान भी थे. सो उनका कारोबार काफी बढ़ने लगा. अब ज्यादा मसाले की जरूरत थी और घर पर तैयार कर पाना मुश्किल था. इसलिए वो व्यापारी के यहां चक्की पर मसाला पिसवाने लगे. लेकिन एक दिन उन्होंने देखा की चक्की वाला व्यापारी मसालों में मिलावट करता है. ये देख कर महाशय जी मन ही मन बहुत दुखी हुए. और खुद हीं मसाला पीसने की फैक्टरी लगाने की योजना बना ली.

दिल्ली के कीर्ति नगर में महाशय जी ने अपनी पहली मसाला बनाने की फैक्ट्री लगाई. और वो दिन था जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. और दिल्ली से दूसरे शहर और पूरे भारत भर में. इतना हीं नहीं भारत से भी आगे निकल कर विश्वभर में उन्होंने अपने कारोबार को फैला दिया. और M.D.H. मसाले के नाम से अपनी पैठ इस कदर बना ली की आज M.D.H. एक बड़ा ब्रांड बन चुका है.

महाशय जी अब बड़े समाज सेवक के रूप में भी जाने जाते हैं. भारत में कई जगहों पर उनके द्वारा चलाए गए अस्पताल और विद्यालय हैं जो लोगों की सेवा में अपना भरपूर योगदान दे रहें हैं.

महाशय जी हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा दाई हैं. उनकी जिंदगी हर किसी के लिए एक सीख है की व्यक्ति चाहे तो कुछ भी कर सकता है. हमें उम्मीद है दोस्तों की महाशय जी जैसे इंसान के ऊपर हमें और आप सब को नाज होगा. तो क्यों ना इसे हर किसी से शेयर करें. ताकि उनकी कहानी से प्रेरित होकर हर इंसान सफलता की ओर बढ़ने में अग्रसर हो सके.

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