सूरज चाचा


सूरज चाचा, सूरज चाचा
इतनी जल्दी क्यों आ जाता
तुम्हें नहीं क्या आलस आता।

मुझको और सोना है
नींद अभी भी बाकी है
थोड़ा सा छुप जाओ ना
मम्मी को समझाओ ना
समय पे रोक लगाओ ना

ब्रश भी करना पड़ता है
दूध पीना पड़ता है
स्कूल को जाना पड़ता है
ट्यूशन भी तो रहता है

कितना काम कराओगे
मैं जब खेलने जाती हूं
फिर से तुम छुप जाते हो
सुबह को जल्दी आते हो
फिर से मुझे भगाते हो

सूरज चाचा, सूरज चाचा
तुम्हें नहीं क्या आलस आता।

Writer – Khushbu singh


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