After Death!


Man:
मुझे ऐसा बनाया क्यूँ
फिर उस दुनिया मे छोड़ आया क्यूँ
मुझे तूने यूँ आजमाया क्यूँ
मै था इतना पराया क्यूँ?

God:
जो तू दुनिया मे ना जाता
ये सब कुछ लिख ना पाता
गर तू प्यासा नही रहता
ये पानी खोज ना पाता

Man:
कहाँ पानी दिखा मुझको?
तूने प्यासा ही रखा मुझको
अब तू ही राह दिखा मुझको
बता सफेद-स्याह मुझको

God:
ना तो तू कल मरा था, ना तो आज मरा है
ना तो तू कल जिया था, ना तो तू आज जिया है
तूने जो जाला बुना था, तू खुद उसी मे जिया है
वो प्यासा ही मरा है जिसने सिर्फ खुद पानी पिया है

Man:
तो क्या मै प्यासा ही रहता
तो तू चुल्लू मे डूब ना मरता ?
कहने को तो तू सब जानता है
तूने ही फैलाया ये सब रायता है

God:
मेरे बच्चे, मैं दुनिया कहाँ चलाता हूँ
मै तो अब ठीक से देख भी कहाँ पाता हूँ
जो मै दुनिया चलाता
तो क्या बच्चा कोई प्यासा मर जाता?

Man:
तो फिर ये दुनिया बनी कैसे?
हुई किस से ये नादानी कैसे?
शुरू हुई मेरी कहानी कैसे?
हुई मुझे इतनी परेशानी कैसे?

God:
इस दुनिया ने खुद से बनाया है खुद को
फिर सब लोगो ने मिल कर बनाया है मुझको
ख्वाहिशो से इंसानो ने बनाया है खुद को
नफरतों से इंसानो ने मिटाया है खुद को

Man:
तो फिर क्या तू किसी काम का नही है
जब दुनिया खुद से बनी है
तो फिर क्यों तेरे आगे झुकी है?
मै हिन्दू हूँ, मुझे मुसलमानों से क्यों दुश्मनी है?

God:
ये तेरे मसले है, वो तेरी दुनिया है
मुझे क्या करना है, मैंने क्या किया है
तूने ही सुन्नी – शिया किया है
मैंने कब हरिजन – बनिया किया है
मैंने कब जमीन पर सरहदो को सिया है
मैंने तो बस तुम से प्यार किया है
तुमने ही जन्नत को जहन्नम किया है
मैंने अता की थी दुनिया करिश्माई, तुमने हिरोशिमाई किया है
मेरी तो बस आँखों को नम किया है
जब किसी ने मुझे परचम किया है
तुम लोगो ने ही मेरे दम खम को कम किया है
मेरी नसीहतों को तुमने बम किया है
अच्छा हुआ अब मैंने जमीं पर जाना ख़तम किया है
खुद को इसी कटघरे मे दफन किया है
और तुम जैसे लोगो के सवालो पर मनन किया है
बरहाल मैंने तुम्हारी ज़िन्दगी का गहन अध्ययन किया है
और तब जारी ये summons किया है
मैंने तेरे हवाले सुखन किया है
मैंने तेरी प्यास को तेरा बदन किया है

अब ये फैसला तुझे ही लेना है
तुझे अभी मरना है की और जीना है
वहाँ पर बड़े बड़े मंदिर-मस्जिद-मदीना है
यहाँ बस मेरा छोटा सा बिछौना है

मैं, जो की सब जानता हूँ,
कब कोई फैसला कर सकता है
तू यहाँ रूक भी सकता है
तू यहाँ से लौट भी सकता है
तू जब चाहे मर भी सकता है
तू अब से चाहे तो जी भी सकता है

मगर मेरे बच्चे यहाँ कोई जन्नत नहीं
मेरे पास बाबा राम या आसाराम जैसी सल्तनत नही
अब दुनिया पर भी मेरी हुकूमत नही
पत्थरो की कीमत है मेरी कीमत नही
तुमने ही शक्ल दिया वरना मेरी कोई शख्सियत नही

मगर जब तू फिर से उस दुनिया मे जाएगा
और अगर इस दफा नयी दुनिया बनाएगा
तेरी प्यास मेरे गुनाहो को कम कर देगी
तू मुझे भी जन्नत दिलवाएगा!

  • by AMIT CHOUDHARY

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