बातूनी कछुआ


बातूनी कछुआ
बातूनी कछुआ

Bodh Kahani : Hindi story with moral : एक दिन अचानक आकाश से एक कछुआ बाजार में गिरा और मर गया. कछुआ बाजार के मुख्य सड़क पर गिरा था. कुछ ही देर में उसको देखने के लिए भीड़ लग गई. सबको आश्चर्य था कि जल का जीव आसमान से कैसे गिरा.

लोग तरह तरह की बातें करने लगे. किसी ने कहा यह कोई प्रेत आत्मा है. कोई बोला यह महान विपत्ति की सूचना है. भगवान बुद्ध भी भीड़ में खड़े थे. उस समय भगवान बुद्ध को बोधिसत्व कहते थे. वह भी उस भीड़ में लोगों की बकझक सुन रहे थे.

भगवान बुद्ध ने सब को शांत करके कहा इस कछुए की मृत्यु का कारण मैं बताता हूं. यहां से बहुत दूर एक घने जंगल के बीच सुंदर सरोवर है. वहां हिमालय प्रदेश से दो हंस आया करते थे. यह कछुआ उसी सरोवर में रहता था. उन हंस और इन कच्छुए में मित्रता हो गई थी. लेकिन यह कछुआ बहुत बातुनी था. इसकी जीभ कभी शांति नहीं रहती थी. तालाब के अन्य कछुए और मछलियां भी इससे परेशान रहते थे. हंस भी इसके बातुनीपन से बहुत चिढ़ते थे.

एक दिन उन्होंने कहा, मित्र कच्छुए हम तुम्हें आज एक बुरी खबर सुना रहे हैं. इस सरोवर का पानी जल्दी सूखने वाला है. तुम हमारे मित्र हो इसलिए यह बात बता रहे हैं. अपने जीवन की रक्षा के लिए अभी से सोच लो. कछुए ने कहा मुसीबत के समय मित्र ही काम आते हैं. अब तुम दोनों ही कोई उपाय बता सकते हो.

हंसों ने कहा, तुम चाहो तो हमारे साथ हिमालय प्रदेश चल सकते हो. वहां की किसी सुंदर झील में सुख से रहना. कछुआ उनकी बात मान गया. हंस चले गए.

सरोवर के सारे जीवो को कच्छुए ने अपनी हिमालय यात्रा के बारे में बता दिया. जब सवेरे वे हंस इस कच्छुए को लेने आए. चलने से पहले उन्होंने एक शर्त रखी दी. कछुए से बोले तुम अपनी जीभ को एकदम रोककर रखना. जब तक हम ना कहे बिल्कुल मत बोलना. बातूनी कछुआ तुरंत उनकी शर्त मान गया.

इसके बाद हंसो ने एक लकड़ी को बीचों बीच में से कच्छुए को पकड़ा दिया फिर उसके दोनों सिरों को अपनी चोंच से पकड़कर उड़ चले. कछुआ आकाश में उड़ कर बहुत खुश हो रहा था. वह अपनी खुशी को बड़ी मुश्किल से रोका था. उसके गले में बार बार खुजली होती थी. किंतु शर्त याद करके चुप था.

जब यह हमारी बस्ती के ऊपर से गुजरा तब कुछ लोगों ने इस आश्चर्यजनक दृश्य को देखा भी. चिल्ला उठे. अजी देखो तो, दो हंस एक कछुए को टांग कर ले जा रहे हैं.

यह सुनकर बातूनी कछुआ शर्त भूल गया और यह बोलने के लिए मुंह खोल बैठा कि वह मुझे अपना खुशी से ले जा रहे हैं. तुम्हारा क्या बिगड़ता है. किंतु तब तक कछुआ उस लकड़ी से छूट चुका था और यहां सड़क पर गिर पड़ा. जब कोई बिना सोचे विचारे बात करता है तो उसे ऐसे ही मुसीबत उठानी पड़ती है. सोच विचार कर कम से कम बोलने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है.


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