OMG: दिन में सोने से कम होती है यादाश्त, सताने लगता है अंजाना डर


दिन में सोने से कम होती है यादाश्त : din me sone se kam hoti hai yadast

आज तक तो हम सभी यही जानते आए हैं कि नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है, इसलिए हर व्यक्ति को अधिक से अधिक नींद लेना चाहिए। सोने से हमारे शरीर को आराम पहुंचता है और हम दिमागी और शारीरिक तौर पर दुरुस्त महसूस करते हैं। हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।

हम ये भी सुनते आए हैं कि दिन में सोना भी आराम पहुंचाने वाला होता है लेकिन एक रिसर्च में इस बात का खुलासि किया गया है कि दिन में सोना हमारे यादाश्त के लिए अच्छा नहीं होता है। विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि दिन में सोने से मनुष्य के ज़हन में एक अंजाना सा डर बैठने लगता है जो वास्तविकता में होता ही नहीं। मस्तिष्क मनगढ़ंत यादों में उलझने को मजबूर होने लग जाता है।

दिन में सोने से कम होती है यादाश्त  बता दें कि ये अध्ययन लैंकास्टर यूनिवर्सिटी में किया गया है। अध्ययन की मानें तो दिन में 45 मिनट या 1 घंटे की नींद लेना अनुभवों को भुला देने वाला हो सकता है। वैसे तो सोने से हमारी याददाश्त अच्छी होती है लेकिन दिन में सोना हमारे मस्तिष्क के दाहिने हिस्से में कैद यादाश्त को भुलाने लगता है।

रात की अच्छी नींद दिनभर की एकत्र सूचनाओं के अंबार से दिमाग को आज़ादी दिलाती है और गैर जरूरी चीजों को मिटा देने का काम करती है। इससे मस्तिष्क में नई यादों, अनुभवों और सूचनाओं के लिए जगह बनती है। जबकि दिन में सोने से हमारे मस्तिष्क पर इसका विपरीत असर पड़ता है और एक अंजाना सा डर हमारे जहन में बैठ जाता है जो असल जिंदगी में नहीं होता।

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माना जाता है कि रात के समय में भी अधिक सोना हमारे दिमाग पर गलत असर डालता है। इस रिसर्च के सह लेखक और यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी विभाग में पीएचडी स्टूडेंट जॉन शॉ कहते हैं कि रिसर्च कहता है कि ‘चुकी मस्तिष्क में सूचनाओं की स्थिति बदलती है पर ये डराने वाली स्थिति भी है।’

गौरतलब है कि हमारे मस्तिष्क के बाएं भाग के मुकाबले दाहिने भाग में आभासी यादें ज्यादा होती हैं और दिन में सोने से दिमाग के दाहिने भाग पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण दाहिने भाग में मौजूद सूचिनाओं की स्थिति में ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है।


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