गणेश की वजह से उनके भाई कार्तिकेय रहे अविवाहित


गणेश की वजह से उनके भाई कार्तिकेय रहे अविवाहित

Pauranik Katha : भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र श्री गणेश और कुमार कार्तिकेय को तो जानते ही होंगे. आप यह भी जानते होंगे कि गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ हुआ था. वह विवाह कैसे हुआ था इसको हम अपने किसी और आर्टिकल में बताएंगे. परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश के भाई कार्तिकेय को कुमार कह कर क्यों संबोधित किया जाता है ? और इसके पीछे क्या कारण है ? चलिए जानते हैं अपने इस आर्टिकल में.

एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय तथा गणेश जी विवाह के लिए आपस में कलह करने लगे और इसके निवारण हेतु दोनों माता-पिता के पास पहुंचे. और उन्होंने कहा की, हमने ब्रम्हचर्य अवस्था को पार कर लिया है अब हम गृहस्थ धर्म में प्रवेश करना चाहते हैं. तब भगवान शिव तथा पार्वती यह सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और यह बोले कि – तुम दोनों में से जो कोई भी इस संसार की परिक्रमा करके पहले यहां आएगा उसी का विवाह पहले होगा.

यह शब्द सुनते ही कार्तिकेय जी तुरंत ही संसार की परिक्रमा करने के लिए अपने वाहन मोर पर बैठकर उड़ चले. परंतु स्थूलकाय श्री गणेश जी और उनका वाहन मूषक भला इतनी शीघ्रता से परिक्रमा कैसे कर सकते हैं. गणेश जी शरीर से जरूर स्थूल थे पर वे बुद्धि के सागर थे. उन्होंने कुछ विचार किया और अपने माता-पिता से 1 आसन पर बैठने का आग्रह किया फिर गणेश जी ने की सात बार परिक्रमा की और यह बोले लो मैंने एक बार नहीं अपितु 7 बार विश्व का परिभ्रमण कर लिया है. तब भगवान शंकर ने पूछा वह कैसे ? तो गणेश ने कहा – वेदो में लिखा है कि माता-पिता की परिक्रमा इतनी ही पवित्र है जितनी की संसार की परिक्रमा. इस प्रकार गणेश जी माता पिता की परिक्रमा करके संसार की परिक्रमा से प्राप्त होने वाले फल की प्राप्ति के अधिकारी बन गए. उनकी चतुर बुद्धि को देख कर शिव और पार्वती दोनों बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने गणेश जी का विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ करा दिया.

जब कई वर्षों के बाद कार्तिकेय संपूर्ण विश्व की परिक्रमा करके वापस आए तो या दृश्य देखकर बड़े ही दुखी हुए और फिर गुस्से में भरकर उन्होंने यह संकल्प किया कि वह आजन्म विवाह नहीं करेंगे और फिर उन्होंने अपने माता-पिता के चरण छू कर वहां से चले गए थे. यही कारण है कि कार्तिकेय जी को कुमार कहा जाता है.

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