घर के मंदिर में ना रखें ये 5 चीजें, नकारात्मक ऊर्जा को देती है बुलावा !


घर के मंदिर में ना रखें ये 5 चीजें, नकारात्मक ऊर्जा को देती है बुलावा !

दोस्तों, हर किसी के घर में पूजा के लिए एक खास जगह होता है. वास्तुशास्त्र में पूजा स्थान के लिए ईशान कोण यानी कि उत्तर पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है. घर के उत्तर पूर्व दिशा में पूजा का स्थान होना घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला होता है. गलत जगह पर बने हुए पूजा स्थान में ना तो मन एकाग्र होता है, और ना हींं पूजा का पूरा फल प्राप्त हो पाता है.

इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि घर के मंदिर में कौन सी वे 5 चीजें नहीं होनी चाहिए जिससे की आपके घर परिवार में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो.

1. एक भगवान की दो तस्वीर ना रखें
दोस्तों, इस बात का खास ख्याल रखें कि अपने घर के मंदिर में एक हीं भगवान की 2 तस्वीरें गलती से भी ना रखें. और खासकर भगवान गणेश की 3 प्रतिमाएं तो बिल्कुल भी ना रखें. कहा जाता है कि इससे आपके हर शुभ कार्य में अड़चन पैदा होने लग जाती है.

2. मंदिर का सही स्थान
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा का स्थान घर के उत्तर या पूर्व दिशा में बनाएं. दक्षिण या पश्चिम दिशा अशुभ फलदाई हो सकता है. घर के मंदिर में दो शंख गलती से भी ना रखें.

3. मंदिर के आस-पास शौचालय ना हो
घर के पूजा घर के ऊपर या फिर अगल-बगल में शौचालय ना बनवाएं. ध्यान रखें कि घर के रसोई घर में भी मंदिर ना रखें. वास्तु शास्त्र में इसे गलत बताया गया है.

4. ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखें
अपने घर में बने मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए किसी भी देवता की बड़ी मूर्ति ना रखें. यहां तक कि अगर आप अपने मंदिर में शिवलिंग भी रखना चाहें तो शिवलिंग का आकार अंगूठे के आकार इतना हींं रहे. शिवलिंग काफी संवेदनशील रहता है, इस वजह से मंदिर में हमेशा छोटा शिवलिंग रखना ही उचित माना जाता है.

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5. खंडित मूर्ति ना रखें
शास्त्रों में इस बात को खास तौर पर बताया गया है कि किसी भी टूटी हुई या खंडित प्रतिमा की पूजा-अर्चना नहीं करनी चाहिए. अगर आप के मंदिर में लगी भगवान की कोई तस्वीर या मूर्ति खंडित हो जाए, तो उसे विसर्जित कर दें. क्योंकि खंडित हुई प्रतिमाओं की पूजा का फल अशुभ कारक होता है.

तो दोस्तों, अपने मंदिर में इन खास 5 बातों का बेहद खास ध्यान रखें. नहीं तो आप कितनी भी आस्था के साथ पूजा अर्चना कर लें, लेकिन उसका पूरी तरफ फल प्राप्त नहीं हो पाता. इसलिए शास्त्रों में पूजा-पाठ से जुड़े हर तरह के नियमों की विशेष तौर पर विधि बताई गई है. जिसका पालन करना हर किसी के लिए शुभकारक होता है.


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